साहित्य सरोकार : कविता में झूठ की गुंजाइश नहीं होती

प्रो. चौहान ने कहा
‘एक रचनाकार का रचना संसार’ कार्यक्रम की शुरुआत
हरमुद्दा
रतलाम, 1 अप्रैल। कविता में झूठ बिल्कुल नहीं चलता । कविता झूठ का पर्दाफाश करती है। वही कविता प्रभावी होती है जो पूरी सच्चाई के साथ उभरे। कविता में अगर कहीं कोई झूठ समाविष्ट कर भी लिया जाता है तो उसे पाठक- श्रोता नकार देते हैं और वह कविता निष्प्रभावी हो जाती है । जिस तरह स्त्री को विधाता ने बुरी नज़रों को पहचानने की दृष्टि दी है उसी तरह कविता को भी झूठ को पहचानने की शक्ति हासिल है।

यह विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा प्रारंभ किए गए ‘ एक रचनाकार का रचना संसार ‘ कार्यक्रम के तहत व्यक्त किए गए। उन्होंने कहा कि कविता लिखना आसान नहीं है। कविता कई प्रक्रियाओं से होकर गुज़रती है तब जाकर सही अर्थों में सामने आ पाती है । इसके बाद भी पाठक और श्रोता ही उसके बारे में सही निर्णय करते हैं । इसलिए कवि में जितनी ईमानदारी होगी उसकी कविता उतनी अधिक दूर तक पहुंचेगी।
इन्होंने किया रचना पाठ
इस कार्यक्रम का पहला आयोजन प्रो. रतन चौहान की कविताओं पर ही केंद्रित था । प्रो. चौहान की 13 पसंदीदा कविताओं को विभिन्न रचनाप्रेमियों ने पढ़ा और उन कविताओं के पसंद के संबंध में अपना पक्ष भी रखा । कविताओं का पाठ यूसुफ़ जावेदी , आशीष दशोत्तर, रणजीत सिंह राठौर, डॉ. पूर्णिमा शर्मा , आशा श्रीवास्तव , कला डामोर , गीता राठौर , मांगीलाल नागावत , कीर्ति शर्मा, हीरालाल खराड़ी , जितेंद्र सिंह पथिक , जुबेर आलम कुरेशी ने किया । इन्होंने प्रस्तुत कविता को पसंद किए जाने संबंधी अपना वक्तव्य भी दिया ।
अगला आयोजन प्राण गुप्त पर केंद्रित
जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने बताया कि जनवादी लेखक संघ द्वारा प्रतिमाह यह आयोजन किया जाएगा , जिसमें किसी एक रचनाकार की पसंदीदा रचनाओं का पाठ शहर के रचनाप्रेमी कर सकेंगे । इस क्रम के अंतर्गत 13 अप्रैल रविवार को प्रातः 11 बजे भगत सिंह वाचनालय, शहर सराय पर रतलाम के मूर्धन्य गीतकार रहे प्राणवल्लभ गुप्त के रचनाओं का पाठ किया जाएगा । उन्होंने नगर के रचना प्रेमियों से आग्रह किया है कि आयोजन में अवश्य सहभागिता करें।