कलेक्टर की कार्रवाई : 16 पटवारी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, निकाला गया नौकरी से, डेढ़ करोड़ रुपए का किया गबन

फसल क्षति के रूप में किसानों को वितरित करना था मुआवजा
मुआवजा वितरण में किया गया घोटाला
जांच रिपोर्ट में मामला पाया सही
18 पटवारी और दो लिपिकों के खिलाफ शुरू हुई थी जांच
हरमुद्दा
देवास, 21 मई। कलेक्टर ने जिले में पटवारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मुआवजे घोटाले में देवास जिला प्रशासन ने 16 पटवारियों को नौकरी से निकाल दिया है। इन सबकी संलिप्तता मुआवजे घोटाले में थी। यह राशि किसानों को उनकी फसल क्षति के मुआवजे के तौर पर बांटी जानी थी।

कलेक्टर ऋषभ गुप्ता के अनुसार यह कार्रवाई करीब एक साल पहले सामने आई पटवारियों और क्लर्कों की ओर से की गई वित्तीय अनियमितताओं की रिपोर्ट पर की गई है।
18 पटवारी और दो लिपिकों के खिलाफ शुरू हुई थी जांच
देवास कलेक्टर ने बताया कि कुल 18 पटवारियों और दो लिपिकों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई थी, जो हाल ही में पूरी हुई है। इसमें पता चला है कि आरोपियों ने फसल क्षति का सामना कर रहे किसानों को मिलने वाले मुआवजे के करीब डेढ़ करोड़ रुपये का गबन किया है। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि इससे पहले दो पटवारियों और इतने ही लिपिकों की सेवाएं समाप्त की गई थीं, जबकि आज 16 पटवारियों के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई की गई है।
इनको धोना पड़ा नौकरी से हाथ
ये सभी पटवारी और लिपिक कन्नौद, खातेगांव, सोनकच्छ और टोंक खुर्द तहसील में पदस्थ थे। देवास प्रशासन ने बंशीलाल डाबर, प्यारसिंह सोलंकी, अमित कुशवाह, दिनेश सिसोदिया, दिलीप यादव, भैयालाल नरगावे, महेंद्र मण्डलोई, नंद किशोर शर्मा, अनिरूद्ध यादव, अनिल धुर्वे, रायसिंह देवड़ा, विकास सरोठिया, नवीन धीमान, अर्जुन वर्मा, रामोतार जोनवाल और अजय चौधरी को नौकरी से बर्खास्त किया है।
वसूली के प्रयास जारी
उन्होंने विभागीय जांच में साबित हो चुके पैसे का दावा करने के लिए अपने, रिश्तेदारों और दोस्तों के बैंक खातों का इस्तेमाल किया। कलेक्टर ने बताया कि आरोपियों से गबन की गई राशि की वसूली के प्रयास जारी हैं।