सामाजिक सरोकार : भारतीय गणतांत्रिक व्यवस्था के सूत्रधार थे सम्राट विक्रमादित्य

साहित्यकार डॉक्टर मुरलीधर चांदनीवाला ने कहा
वे नियम और नीतियां आज भी प्रासंगिक : दशोत्तर
राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति द्वारा संगोष्ठी आयोजित
हरमुद्दा
रतलाम, 31 मार्च। राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति द्वारा चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य महाराज द्वारा प्रवर्तित “विक्रम संवत -2082 नववर्ष” पर एक संगोष्ठी का आयोजन स्थानीय डोगरा नगर स्थित कार्यालय पर किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार एवं वैदिक ऋचाओं के प्रमुख व्याख्याकार डॉ. मुरलीधर चांदनीवाला, विशेष अतिथि साहित्यकार आशीष दशोत्तर थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ रंगकर्मी एवं पूर्व प्राचार्य ओ. पी . मिश्र ने की।

यह जानकारी देते हुए संस्था के जिला संयोजक नरेन्द्रसिंह डोडिया ने बताया कि संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पॅंवार ने सम्राट विक्रमादित्य के व्यक्तित्व और उनकी ऐतिहासिकता पर प्रकाश डालते हुए नौ रत्नों के रुप में स्थापित शासन व्यवस्था की प्रासंगिकता को वर्तमान परिप्रेक्ष्य में रेखांकित किया। श्री पॅंवार ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ने दो हजार वर्ष पूर्व ही सुचारू शासन के संचालन हेतु नौ विभाग बनाए थे जोकि उनके नौ रत्न कहलाते हैं।
गणतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने वाले प्रथम शासक विक्रमादित्य
मुख्य अतिथि डॉ. चांदनीवाला ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य ही भारत में गणतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने वाले प्रथम शासक हैं। सम्राट विक्रमादित्य भारतीय स्वाधीनता और राष्ट्रीय अस्मिता के दैदीप्यमान नक्षत्र भी हैं, जिन्होंने दो हजार वर्ष पूर्व ही दुर्दांत शकों को देश से बाहर खदेड़ कर भारत को स्वतंत्रता का पाठ पढ़ाया। श्री चांदनीवाला ने विक्रम संवत को राष्ट्रीय संवत के रुप में मान्यता दिलवाने के लिए संस्था के माध्यम से मुहिम चलाने का आह्वान भी किया।
वे नियम और नीतियां आज भी प्रासंगिक
अपने लेखन के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर अमिट छाप छोड़ने वाले साहित्यकार आशीष दशोत्तर ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य द्वारा दो हजार वर्ष पूर्व शासन, सामाज, शिक्षा, व्यवसाय और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए जो नियम और नीतियां बनाई थी वो आज भी प्रासंगिक हैं। आज आवश्यकता है कि सम्राट विक्रमादित्य द्वारा सामाजिक उत्थान के जिन मापदण्डों को स्थापित किया गया था उनका पुनर्मूल्यांकन हो और जन-जीवन में उनका प्रचार प्रसार हो।
महत्वपूर्ण है ऐसे आयोजन
संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए ओ.पी. मिश्र ने राजा भोज जनकल्याण सेवा समिति द्वारा प्रतिवर्ष आयोजित किए जाने वाले विक्रमोत्सव की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए इस प्रकार के आयोजन की महत्ता को रेखांकित किया।
इन्होंने भी किए विचार व्यक्त
विक्रम संवत नववर्ष पर आयोजित संगोष्ठी में शहर के साहित्य प्रेमी विनोद झालानी , प्रो. दिनेश राजपुरोहित, जनवादी लेखक संघ के जिलाध्यक्ष रणजीतसिंह राठौर एवं महाराव अखेराज सोनगरा क्षत्रिय चेतना मंच के सह संयोजक नटवरसिंह सोनगरा ने भी सम्राट विक्रमादित्य की न्याय व्यवस्था और सामाजिक उत्थान पर अपने विचार रखे।

इस अवसर पर डॉ. चांदनीवाला ने संस्था द्वारा विकसित किए जा रहे पुस्तकालय के लिए वैदिक ऋचाओं के सात खंड भी संस्था अध्यक्ष नरेन्द्रसिंह पॅंवार को भेंट किए।
अंत में महाराव अखेराज सोनगरा क्षत्रिय चेतना मंच के राष्ट्रीय संयोजक बहादुरसिंह सोनगरा ने आभार व्यक्त किया।