लॉक डाउन : किराना के थोक व्यापारियों ने मचा रखी है लूट, प्रशासन को नहीं कोई सूद

गांव वालों को शहर नहीं आने दिया जा रहा है किराना सामान लेने
फुटकर व्यापारियों पर लग रहे हैं लूटने के आरोप
जमीनी हकीकत पर कोई कार्रवाई
हरमुद्दा
रतलाम, 27 मार्च। कोरोना वायरस के खतरे से बचाव के मद्देनजर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही 24 मार्च की रात को 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा की। उसके अगले ही दिन किराना के थोक व्यापारियों ने भाव में अनाप-शनाप तेजी कर दी। फुटकर किराना व्यापारियों को लूटने के आरोप सुनने मिल रहे हैं। कोई अपशब्द भी बोले जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को शहरी क्षेत्र में किराना सामग्री लेने के लिए रोका जा रहा है। इस ओर भी प्रशासन का ध्यान नहीं है। प्रशासन अनजान बना हुआ है।
जब से लॉक डाउन हुआ है, तबसे से दावे किए जा रहे हैं कि कोई भी व्यापारी ब्लैकमेल नहीं करेगा। अधिक मूल्य वसूल नहीं करेगा। यह सिर्फ बातों में और आदेशों तक ही सीमित है। मुद्दे की बात तो यह है कि प्रशासनिक अधिकारियों को आटे दाल के भाव तक पता नहीं है। वे कार्रवाई कैसे करेंगे और नहीं इसे जानने की उन्होंने कोई चेष्टा की। जमीनी हकीकत पर कोई कार्रवाई अब तक नहीं हुई है। जबकि अब तक तो लोग थोक व्यापारियों की अनाप-शनाप ठगी का शिकार हो चुके हैं।
एक नजर थोक किराना व्यापारियों की लूट पर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तुवर दाल थोक में 78 से 80 रुपए किलो मिल रही थी। थोक किराना व्यापारियों ने उसी के भाव 95 से 100 रुपए कर दिए हैं। खेरची में ₹110 किलो मिल रही है। किसी तरह मूंग मोगर 88 से 92 रुपए किलो थी। थोक में अब 110 से 115 रुपए किलो कर दी गई। खेरची में 120 रुपए किलो बेची जा रही है। उड़द मोगर 84 से 88 रुपए प्रति किलो थी जो कि अब 88 से 100 रुपए रुपए किलो कर दी गई। फुटकर में 110 रुपए किलो बेची जा रही है। तेल के डिब्बों पर डेढ़ सौ से ढाई सौ रुपए तक बढ़ा दिए हैं। वहीं तेल पाउच 10 से 15 अधिक रुपए लिए जा रहे हैं।
प्रशासन का इस ओर जरा भी नहीं ध्यान
थोक व्यापारियों ने रातों-रात भाव बढ़ा दिए जबकि उनके पास स्टॉक में था। प्रशासन का इस ओर जरा सा भी ध्यान नहीं रहा और लाखों लोग को थोक व्यापारियों ने लूट लिया है। कॉलोनी वाले खेरची व्यापारी परेशान है। थोक व्यापारियों ने लॉक डाउन का लाभ उठाया है। किराना व्यापारी आम लोगों से अपशब्द सुन रहे हैं। लूटने के आरोप लग रहे हैं। जबकि लूट पट्टी मचाने वाले थोक व्यापारी हैं।
गांवों में नहीं पहुंच पा रहा है किराना
रतलाम के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किराना सामग्री नहीं पहुंच पा रही है। ग्रामीणों को शहरी क्षेत्र में आने नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते गांव की दुकानों में भी राशन खत्म हो चुका है। पुलिस की कार्रवाई में वाहनों को जप्त कर लिया गया है। वाहन छोड़ने की बात पर। पुलिस वालों का कहना है कि अब 14 अप्रैल के बाद गाड़ियां मिलेगी। ग्रामीण व्यापारियों का कहना है कि जिला प्रशासन कोई भी सकारात्मक रणनीति नहीं बना पाया है। उसे इस मामले में ध्यान देना चाहिए, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को राशन की दिक्कत ना हो। ग्रामीण क्षेत्रों से दूध तो शहर में आ रहा है लेकिन शहरी क्षेत्र से राशन ग्रामीण क्षेत्र में नहीं जा पा रहा है यह बड़ी विडंबना है।
कोई नहीं रुकेगा उन्हें शहर आने से
ग्रामीण क्षेत्रों में किराना सामग्री पहुंचाने के लिए एसडीएम से इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा है कि छूट की समय सीमा में गांव से शहर किराना सामग्री लेने आ सकते हैं, उन्हें कोई नहीं रोकेगा।
दिलीप मकवाना, रतलाम ग्रामीण विधायक
नहीं उठाया कलेक्टर ने मोबाइल फोन
इस संबंध में जानकारी लेने के लिए जब कलेक्टर रुचिका चौहान को मोबाइल फोन लगाया गया तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।