रोजगार समाधान : तथ्यात्मक जानकारी देते हुए गहन विश्लेषण प्रस्तुतकर विशेषज्ञों ने बताएं रोजगार के सैकड़ों अवसर

🔲 “गृहविज्ञान विषय में नए उभरते रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर विषय पर’’ एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का हुआ आयोजन

🔲 देश के विभिन्न राज्यों के अनेक शहरों से जुड़े जानकर

हरमुद्दा
रतलाम, 26 फरवरी। विश्वबैंक परियोजना के अन्तर्गत ” गृहविज्ञान विषय में नए उभरते रोजगार एवं उद्यमिता के अवसर विषय पर ’’ एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबीनार का आयोजन शासकीय कन्या महाविद्यालय रतलाम में किया गया। वेबीनार में देश के विभिन्न राज्यों के अनेक शहरों से जानकार इस वेबीनार में जुड़े। वेबीनार में जानकारों ने तथ्यात्मक जानकारी देते हुए विशेषज्ञों ने गहन विश्लेषण प्रस्तुतकर रोजगार के सैकड़ों अवसर बताएं।

वेबीनार के विषयपूर्ण तथ्यों को रखते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा कार्यक्रम समन्वयक डाॅ. माणिक डांगे ने दी। तत्पश्चात् प्राचार्य एवं संरक्षक डाॅ. आर.के कटारे द्वारा अभिनंदन उद्धबोधन देते हुए विषय की सार्थकता पर प्रकाश डाला।

इन राज्यों के प्रतिभागी शामिल हुए वेबीनार में

वेबीनार में देश के विभिन्न प्रांतो जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, उडीसा, तमिलनाडू, राजस्थान एवं म.प्र. के प्रतिभागियों ने पूर्ण संजीदगी से प्रतिभागिता की।

नए उभरते रोजगार के अवसर बताएं विशेषज्ञों ने

छात्राएं देश विदेश में कमा रही है नाम : डाॅ. सोनावत

प्रमुख वक्ता डाॅ. रीता सोनावत डायरेक्टर ई.सी.इ एम्परसन ग्रुप मुंबई एवं भूतपूर्व डीन मानव विकास एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय मुंबई महाराष्ट्र ने गृह विज्ञान संकाय में नए उभरते रोजगार के अवसर एवं उद्यमित विषय पर विस्तार पूर्वक तथ्यात्मक जानकारी दी। इस विषय में, उद्यमिता के विभिन्न आयामों आहार एवं पोषण में निर्माण से लेकर किसी प्रोडक्ट के निर्माण व्यापार संबंधी गहन विश्लेषण प्रस्तुत किया। साथ ही मानव विकास, वस्त्र विज्ञान, पारिवारिक संसाधन प्रबंध इत्यादि विषय को समेटते हुए, अति सुन्दर शैली में वर्चुअल रूप से सबसे रूबरू हुए। डाॅ. सोनावत ने एस.एन.डी.टी. विश्वविद्यालय में संचालित विविध डिप्लोमा कोर्सेस, सर्टिफिकेट कोर्सेस, आॅनलाईन कोर्सेस, पी.जी.डीप्लोमा कोर्सेस, 6-6 माह के कोर्सेस आयोजित किए जाते है। वि.वि. के कई पूर्व छात्राएं देश विदेश में नाम कमा रही है। डाॅ. सोनावत ने देश एवं विदेशों में पूर्व शालेय शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न संगोष्ठियों, कार्यशालाओं में हजारों शिक्षक एवं शासकीय कर्मियों को प्रशिक्षित किया। इस क्षेत्र में अनेक शोध पत्र देश एवं विदेशो के प्रख्यात जर्नलो में प्रकाशित हुए है।

गृहविज्ञान खाना पकाने का ही केवल विषय नहीं : डाॅ. अवस्थी

शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय किला भवन इन्दौर की सह प्राध्यापक डाॅ. अनुराधा अवस्थी, पारिवारिक संसाधन प्रबंधन का परिचय गृहविज्ञान की प्राध्यापिका डाॅ. मीना सिसौदिया ने दिया। डाॅ. अवस्थी ने अपने पाॅवर पाईन्ट प्रेजेन्टेशन में बताया कि गृहविज्ञान खाना पकाने का ही केवल विषय नहीं है। इसमें कौशल का विकास होता है, जिसमें मानवीय मूल्यों के विकास के साथ सामाजिक उत्तरदायित्त्वों को पूरा करके राष्ट्र निर्माण में योगदान दिया जाता है। डाॅ. अवस्थी ने भारत में गृहविज्ञान का इतिहास बताते हुए कहा कि 1913 में महाराज सयाजीराव गायकवाड ने इसकी शुरुआत की। 1932 में लेडी इरविन काॅलेज दिल्ली में शुरू हुआ। 1935 में इलाहाबाद कृषि संस्थान में डिप्लोमा कोर्स प्रारंभ हुआ। 1945 में विश्वविद्यालय में यह पाठ्यक्रम शुरू हुआ। मद्रास विश्वविद्यालय के क्वीन मेरी काॅलेज, वीमेन क्रिश्चन काॅलेज में 1942 में गृहविज्ञान प्रारंभ हुआ। 1951-1970 में भारत के कई विश्व विद्यालयों में गृहविज्ञान पाठ्यक्रम संचालित किए जाने लगे जैसे कि अविनाशलिंगम विश्वविद्यालय, कोयमबटूर, एस.एन.डी.टी. मुंबई, लुधियाना, उदयपुर, जबलपुर, भोपाल, इन्दौर आदि में प्रारंभ हुआ।

पारिवारिक संसाधन प्रबंधन में बताए रोजगार के अवसर :

गृह विज्ञान विषय पर इतिहास की जानकारी देने के साथ पारिवारिक संसाधन प्रबंधन में रोजगार के अवसर बताए जैसे कि इवेंट मैनेजर, मैनेजमेंट कसंलटेंट, टेवल प्लान मैनेजर, हाऊस प्लानर, इंटिरियर स्पेस डिजाइनर, अर्किटेट, एसीसेटेट प्लानर, लेण्ड स्केप डिजाइनर, किचन प्लानर, फ्लावर डेकोरेटर, कर्टन डिजाइनर, गिफ्ट पैकिंग डिजाइनर, आदि क्षेत्रों में अपार संभावना हैं।

रोजगार क्षेत्रों की डाॅ. त्रिपाठी ने अपार संभावना पर की चर्चा

शासकीय एम.एच. गृहविज्ञान, विज्ञान कन्या महाविद्यालय की सहप्राध्यापक डाॅ. राजलक्ष्मी त्रिपाठी, आहार एवं पोषण, का परिचय प्रो. सुषमा कटारे वनस्पति विभाग विभागाध्यक्ष ने दिया। डाॅ. त्रिपाठी ने पाॅवर पाईट प्रस्तुतीकरण के द्वारा यह बताया कि आहार एवं पोषण विज्ञान में सभी विषय सम्मिलित है। जिसमें कृषि विज्ञान, रसायन, शरीर क्रिया विज्ञान, आनुवांशिकी, मनोविज्ञान, भूगोल, अर्थशास्त्र एवं संस्कृति समाहित हैं। आहार एवं पोषण विज्ञान में डायटिशियन, पोषण विशेषज्ञ, पेथोलाॅजिस्ट, फूड पेकेजिंग, लेब टेक्नीशियन, फूड मार्केटिंग, मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम, हेल्दी फूड पेकेजिंग, मार्केटिंग, क्लिनिकल डायटीशियन, हाॅस्पिटल में डायटीशियन की आवश्यकता होती हैं। डिब्बा बंद भोज्य सामग्री, भोज्य संरक्षण, सूखे पावडर, पेस्ट, मसाले, पापड़, अचार, डेयरी प्रोडक्ट्स, फूड पेकेजिंग, रेडी टू इट, बेकिंग आयटम – केक, पेस्ट्री, क्रीम रोल, बर्थडे प्लानर, मेनू प्लानर, इवेंट मैनेजर आदि क्षेत्रों में अपार संभावनाऐं हैं । इन रोजगार क्षेत्रों की डाॅ. त्रिपाठी ने विस्तारपूर्वक चर्चा की।

वस्त्रविज्ञान, परिधान एवं फैशन के क्षेत्र में बढ़ते रोजगार : डाॅ. शर्मा

शासकीय एम.एच. गृहविज्ञान, विज्ञान महाविद्यालय की वस्त्र विज्ञान एवं परिधान विभाग की विभागाध्यक्ष डाॅ. भावना शर्मा का परिचय कन्या महाविद्यालय की गृहविज्ञान विभाग की प्राध्यापक डाॅ. संध्या सक्सेना ने दिया। डाॅ. शर्मा ने वस्त्रविज्ञान, परिधान एवं फैशन के क्षेत्र में बढ़ते रोजगार के अवसरों के बारे में पाॅवर पाईंट प्रेजेन्टेशन के द्वारा विस्तारपूर्वक बताया। आपने बताया कि शासकीय, अर्द्धशासकीय , स्वरोजगार के क्षेत्र में वस्त्र विज्ञान फैशन में रोजगार की असीम संभावनाऐं हैं – टेक्सटाईल डिजाइनर, डाईंग एक्सपर्ट, प्रिटिंग एक्सपर्ट, सीएडी डिजाइनर, फेब्रिक एनेलिस्टि, मर्चेंट डिजाइनर, पेर्टन मेकर, कटिंग एक्सपर्ट, सुईंग आॅपरेटर, सुपरवाइजर, टैगिंग, लेबल मोनो डिजाइनर, पैकेज डिजाइनर, एसेसरीज डिजाइनर, वेस्ट मैनेजमेंट एडवाइजर, क्वालिटी कंट्रोल, कम्प्यूटर एडेड डिजाइनर, फैशन वेयर, रिटेल मर्चेन्ट डाइजर, फैशन लेखक, मास्क मेकिंग, हेंड एम्ब्रायडरी आदि।

यह थे मौजूद

वेबीनार में मौजूद प्राध्यापक

शासकीय कन्या महाविद्यालय रतलाम के समस्त प्राध्यापकों ने इस विषय को सुरूचिपूर्ण बताया।
आईक्यूएसी प्रभारी व वाणिज्य विषय के विभागाध्यक्ष प्रो. सुरेश कटारिया ने विषय को गुणवत्तापूर्ण बताते हुए अतिथियों का स्वागत किया। डाॅ. सुरेश चौहान, डाॅ. मंगलेश्वरी जोशी, डाॅ. पुष्पा कपूर, डाॅ. बी. वर्षा, डाॅ. स्नेहा पंडित, डाॅ. नीरज राव, डाॅ. अनामिका सारस्वत, डाॅ. सुनीता श्रीमाल, प्रो. विनोद जैन, डाॅ. बामनिया, डाॅ. आनंद सिंदल, प्रो. वी.के जैन, डाॅ. एम.एल गांगले, डाॅ. सुप्रिया पैठणकर ने अपनी पूरी उपस्थिति दर्ज की।

इनका रहा तकनीकी सहयोग

वेबीनार में तकनीकी सहयोग उमेश सिंह, प्रो सौरभ गुर्जर, प्रो मेघा आचार्य, निशांक जोशी एवं शिवप्रकाश पुरोहित ने तकनीकी सहयोग प्रदान किया। संचालन समन्वयक व गृहविज्ञान विभागाध्यक्ष डाॅ. माणिक डांगे ने किया। आभार आयोजन समिति सदस्य डाॅ. अनिल जैन ने माना।

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