रतलाम हेरिटेज वाक : मंच की पांच विशिष्ट कुर्सियां करती रही इंतजार, अतिथि बैठ गए आमजन के बीच

कोरोना जागरूकता का संदेश देने वाले बिना मास्क के आए नजर
तथ्यहीन और अप्रामाणिक जानकारी भी दे गए वे
हरमुद्दा
रतलाम, 2 जनवरी। नए साल के दूसरे दिन रतलाम हेरिटेज वाक का शुभारंभ गुलाब चक्कर से हुआ। कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम एवं पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी ने हरी झंडी दिखाकर शुरुआत की। आयोजन की खास बात यह रही कि अतिथि कलेक्टर और एसपी मंच पर शोभायमान विशिष्ट कुर्सियों पर ना बैठते हुए आमजन के बीच लगी लाल कुर्सियों पर बैठ गए। इस कारण अतिथियों के साथ बैठने की मंशा रखने वाले के मंसूबे कामयाब नहीं हुए।

रविवार को तय समय पर शहर के कुछ प्रबुद्धजन रतलाम के पुराने कलेक्टोरेट स्थित गुलाब चक्कर पर पहुंच गए थे। जिला प्रशासन से एसडीएम अभिषेक गहलोत, तहसीलदार गोपाल सोनी, शहरी विकास प्राधिकरण के प्रभारी अरुण पाठक, समाजसेवी अनिल झालानी, राज परिवार के निकटतम नरेंद्रसिंह पवार सहित विशिष्ट जन आयोजन स्थल पर मौजूद रहे। रतलाम हेरिटेज वॉक के संबंध में जानकारी आयोजक विनीता तातेड़ ने दी। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया।
आपका शहर है और आपकी धरोहर

हेरिटेज शहर का होता है यह आपका शहर है और धरोहर भी आपकी ही है। रतलाम जिंदा लोगों का शहर है। ऐतिहासिक धरोहरों को सहेज कर रखना सब की जिम्मेदारी है गुलाब चक्कर को व्यवस्थित रूप देने के लिए 27 लाख रुपए की योजना बनाई है।
कुमार पुरुषोत्तम, कलेक्टर, रतलाम
युवाओं का प्रयास प्रशंसनीय
शहर और जिले की धरोहर से न केवल परिचित कराने अपितु उसे सहेजने और संवारने के लिए युवा पीढ़ी ने जो शुरुआत की है वह प्रशंसनीय है। बड़े बुजुर्ग की रूचि ऐसे कार्य में होती है मगर युवाओं में यह रुचि अनुकरणीय है। युवाओं से आह्वान कि वे इस कार्य में रुचि लेकर अपने जिले को पहचाने और जाने।

गौरव तिवारी, पुलिस अधीक्षक, रतलाम


…और हांकेने लगे अपनी-अपनी डींगे
जिला पुरातत्व पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के सहयोग से आयोजन का बीड़ा ने उठाने वाली सुश्री तातेड़ ने गुलाब चक्कर की गरिमा और गौरव के संबंध में जानकारी दी। प्राचीन और ऐतिहासिक गुलाब चक्कर की गरिमा को धूल दूसरे होते हुए देखकर लोग हतप्रभ थे। अव्यवस्थाओं के बीच पुरातत्व की प्राचीन प्रतिमाएं अस्त-व्यस्त नजर आई। इस दौरान अन्य लोग भी अपनी-अपनी डींगे हांकने लगे और जो मन में आया, वह जानकारी के रूप में दे दिया, जो कि तथ्यात्मक व प्रामाणिक नहीं था। इस आयोजन से इतिहासकार सहित अन्य जानकारों को दूर क्यों रखा गया ? यह समझ से परे है।
यह रही खास बात

खास बात यह रही कि आयोजकों ने जो कार्ड छपवाया था, उसमें उन्होंने कोरोना जागरूकता का संदेश देते हुए लिखवाया की “मास्क पहनकर पधारें एवं सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें” अतिथियों सहित अन्य ने ऐसा किया लेकिन आयोजक सुश्री तांतेड़ व उनके सहयोगी ने मास्क नहीं लगाए। बिना मास्क लगाए हुए बोलते रहे। जबकि अतिथि जब बोल रहे थे तब भी उनके मुंह पर मास्क था।
होना चाहिए ऐसा
आयोजन स्थल पर मौजूद विशिष्टजन व समाजसेवी का सुझाव था कि ऐतिहासिक धरोहरों को रोचक एवं जिज्ञासा पूर्ण लहजे में समझाना चाहिए। जो जानकार हैं वे ही बातें बताएं। स्थापत्य कला से लेकर वर्तमान दुर्दशा और क्या सुधार हो सकते हैं। यह सभी जानकारी देना चाहिए। जगह-जगह जाने की बजाय ऐतिहासिक धरोहरों की एक-एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई जाए। उसका प्रसारण श्री कालिका माता पर्यटन क्षेत्र, गुलाब चक्कर, हनुमान ताल में होता रहे। तय समय रहे। आयोजन स्थल पर रतलाम के चटाकेदार लजीज व्यंजन की व्यवस्था (सशुल्क) हो ताकि लोग व्यंजनों का लेते हुए अपनी धरोहर से परिचित हो सकें।