मुद्दे की बात : जीवन, दर्शन के बिना व्यर्थ, बच्चों को तराशों, उन्हें तहजीब दो

त्रिभुवनेश भारद्वाज
जीवन दर्शन के बिना व्यर्थ
बच्चों को तराशों
उन्हें तहजीब दो
चीजों को सही सही समझने की
उन्हें बताओ धन अहम है
लेकिन उससे भी अहम है जज़्बात
उन्हें समझाओ समंदर क्यों
महानता की मिसाल है
उन्हें दिखाओ बादल का गौरव
वो अपने पास कुछ नहीं रखता
बच्चों को दिखाओ बाग़ के फूल
इनकी खुशबू दूसरों के लिए है
उन्हें ले जाओ नदी के तट पर
यह दिखाने कि ये बहती ही रहती है
इसके प्रवाह का अर्थ क्या है

बच्चों को चढ़ाओ पहाड़ और समझाओ
इनकी अहमियत एक कण से ही है
बच्चों को उगता सूरज दिखाओ
उन्हें बताओ कि
सूर्य के आधीन दिशाएं होती है
उन्हें दिखाओ सांध्य का रवि का सम्मान
और बताओ उसके गौरव का रंग
रात को टिमटिमाते तारें दिखाओ और
कहो इनकी जगमग सूरज से है
चाँद को दिखाओ और
समझाओ
इसकी शीतलता इसे आकर्षक बनाती है
बच्चों को बताओ खग वृन्द
इनका चहकता समूह आकाश की शान है
बच्चों को बताओ कि
मन्दिर मस्जिद क्या है
इनमें कौन रहता है,
क्या करता है
बच्चों को सिखाओ कि
मुस्कान क्या करती है
उनको समझाओ कि वतन की माटी
हरदम जाग्रत ईश्वर है
इसे मान दो
उन्हें समझाओ कि जिंदगी
अपने लिए जी तो ख़त्म हो जाती है
उन्हें यह भी बताओ कि
बलिदान क्या है
सिखाओ उन्हें कि
हमें आजादी मिली कैसे है
उन्हें बताओ कि
विनम्रता से क्या मिल सकता है
और क्रोध से क्या क्या
जा सकता है
उन्हें बताओ
पुस्तकों से मित्रता का अर्थ
उन्हें बताओ कि स्वर्ग
सज्जनों का घर है
और नरक दुर्जनो की संगत
यह भी बताओ कि घृणा क्या है
और प्रेम का अर्थ क्या है
आपकी औलाद को
मंहगा स्कूल क्या देगा ?
केवल भरण पोषण के औजार देगा,
जीवन की कला नही
उन्हें ठीक से समझाओ
अपने लिए जीना पशु प्रक्रिया है
उन्हें ठीक से बताओ ईमान क्या होता है
और नैतिकता ईश्वर की पूजा क्यों है
औलाद इंसान बन जाए
माँ बाप की यही सफलता है

त्रिभुवनेश भारद्वाज