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सामाजिक सरोकार : जनजाति सुरक्षा मंच के आह्वान पर आज निकलेगी जनजाति समाज की महारैली 

सामाजिक सरोकार : जनजाति सुरक्षा मंच के आह्वान पर आज निकलेगी जनजाति समाज की महारैली 

⚫ जनजाति समाज से धर्मांतरित हुए लोगों को डीलिस्टिंग करने को लेकर करेंगे आवाज बुलंद

⚫ जिलेभर से 50,000 से अधिक समाज जन होंगे एकत्रित

⚫ 1 महीने से चल रहा है जिले के गांव गांव में जन जागरूकता अभियान

हरमुद्दा
रतलाम, 1 मई। जनजाति सुरक्षा मंच के आह्वान पर जिले के जनजाति समाज के सभी जन एक मई को रतलाम शहर में महा रैली निकालेंगे। शासकीय कला एवं विज्ञान विद्यालय मैदान पर एकत्र होंगे। जनजातीय समाज से धर्मांतरित होकर अन्य समाज में जाने के बावजूद जनजाति समाज की सुविधाओं का लाभ लेने वाले सभी को डीलिस्टिंग करने के लिए आवाज बुलंद की जाएगी। महा रैली को लेकर जिले के गांव गांव में 1 माह से जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। महारैली में जिले भर से तकरीबन 50000 लोगों के एकत्र होने की संभावना है।

जनजाति सुरक्षा मंच के जिला संयोजक कैलाश वसुनिया प्रांत निधि प्रमुख डॉक्टर रूपचंद्र मईडा, प्रचार प्रसार प्रभारी दीपक निनामा, कमलेश शर्मा सहित अन्य लोगों ने बताया कि महारैली की तैयारियां पूरी हो गई है टोलियां बनाकर विभिन्न जिम्मेदारियां सौंप दी गई है। महा रैली में शामिल होने वाले जनजाति समाज के लोगों स्वागत जलपान विश्राम आदि की सभी तैयारियां हो चुकी है। गांव गांव से आने वाले लोगों के वाहन की पार्किंग की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर दी गई है।

यह रहेगा महारैली का मार्ग

पूरे जिले से जनजाति समाज के लोगों का आगमन शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय में सुबह 11:00 बजे तक हो जाएगा। तत्पश्चात महा रैली निकाली जाएगी जो कि जेल रोड, लोकेंद्र टॉकीज, शहर सराय, धानमंडी, रानी जी का मंदिर, गणेश देवरी, बजाज खाना, तोपखाना, चांदनी चौक, चौमुखी पुल, घास बाजार, दौलत गंज, डालू मोदी बाजार, पैलेस रोड, महल वाडा, नगर निगम तिराहे से होते हुए आरंभिक स्तर पर समापन होगा।

दुर्भाग्यवश धर्मांतरित लोग मूल जनजातियों का 80 फीसदी लाभ छीन रहे

उल्लेखनीय है कि देश में 700 से अधिक जनजातियां हैं। इनके विकास और उन्नति के लिए संविधान निर्माताओं ने आरक्षण एवं अन्य सुविधाओं का प्रावधान किया है। सुविधाओं का लाभ उन जनजातियों के स्थान पर वे लोग उठा रहे हैं जो अपनी जाति छोड़कर ईसाई या मुस्लिम बन गए। जनजातियों को ये सुविधाएं एवं अधिकार अपनी संस्कृत, आस्था, परंपरा की सुरक्षा करते हुए विकास करने के लिए सशक्त बनाने के लिए मिले थे। दुर्भाग्यवश धर्मांतरित लोग मूल जनजातियों का 80 फीसदी लाभ छीन रहे हैं।

संवैधानिक विसंगति की ओर किया था संसद का ध्यान आकर्षित

पूर्व सांसद डॉ. कार्तिक बाबू उरांव ने इस संवैधानिक विसंगति की ओर संसद का ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने इसे दूर करने के लिए ’20 वर्ष की काली रात’ पुस्तक भी लिखी। डॉ. उरांव द्वारा किए सर्वे में यह बात सामने आई थी कि 5 प्रतिशत धर्मांतरित ईसाई राष्ट्रीय स्तर पर अनुसूचित जनजाति की 62 फीसदी से अधिक नौकरियां, छात्रवृत्तियां एवं शासकीय अनुदान ले रहे हैं। इस विसंगति को दूर करने के लिए तब संयुक्त संसदीय समिति का गठन भी हुआ था जिसने अनुच्छेद 342 में धर्मांतरित लोगों को बाहर करने के लिए 1950 में राष्ट्रपति द्वारा जारी आदेश में संशोधन की अनुशंसा की थी। 1970 के दशक में प्रयास जारी थे किंतु कानून बनने से पहले ही लोकसभा भंग हो गई। सन 2000 की जनगणना व 2009 के डॉ. जे. के. बजाज के अध्ययन में भी उपरोक्त बात उजागर हुई थी।

⚫ 2009 में अपने एक सूत्री अभियान के तहत 28 लाख पोस्टकार्ड लिखवाकर राष्ट्रपति को भेज कर धर्मांतरित ईसाई व मुस्लिम को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर करने के लिए कानून बनाने की मांग की गई थी।

⚫ 2020 में 448 जिलों में जिला कलेक्टर व संभागीय आयुक्त के माध्यम से तथा विभिन्न राज्यों के राज्यपाल व मुख्यमंत्रियों से मिल कर भी राष्ट्रपति तक बात पहुंचाई गई।

⚫ 29 अक्टूबर 2021 को डॉ. कार्तिक उरांव के जन्मदिन पर इस बारे में विस्तृत चर्चा की गई।

यह चाहता है जनजातीय समाज

⚫ राजनीतिक दल अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित सीट पर धर्मांतरित व्यक्ति को टिकट नहीं दें।

⚫ अनुसूचित जनजाति सीट का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक व सासंद इस मांग के समर्थन में आवाज उठाएं और धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति की सूची में से हटाने में मदद करें।

⚫ ऐसे लोग जो समाज के लिए कुछ करना चाहते हैं वे जनजातीय वर्ग के साथ हो रहे इस अन्याय की लड़ाई मंच के साथ खड़े हों।

⚫ ग्राम पंचायत से लेकर सामाजिक पदों पर बैठे धर्मांतरित व्यक्तियों को बेनकाब करें।

⚫ जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित सरकारी नौकरियों को हथियाने वाले ऐसे गलत एवं षड्यंत्रकारी धर्मांतरित व्यक्तियों के खिलाफ न्यायालयीन कार्यवाही हेतु आगे आएं।

⚫ केंद्र एवं राज्य सरकारों में ऊंचे पदों पर बैठे अफसरों से भी यह अपेक्षा है कि वे समाज के अंतिम छोर पर खड़े इस जनजातीय समुदाय की आवाज बनें और धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुचित लाभ देने से खुद को रोकें।

⚫ भारत के प्रत्येक सांसद एवं विधानसभा सदस्य जनजातियों को उनका वाजिब हक दिलाने में अपनी ओर से व्यक्तिगत रुचि लेकर पहल करें

⚫ धर्मांतरित जनजातीय व्यक्तियों को, अनुसूचित जनजात सूची से हटाया जाए।

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