धारा 144 लागू, स्कूल कॉलेज बंद आक्रोशितों ने कई वाहनों फूंके गृहमंत्री ने कहा स्थिति नियंत्रण में...
कर्णाटक
माता-पिता ने लिया फैसला अंगदान का, जो बन गया मिसाल झकझोर दिया आयोजन में मौजूद मेहमानों को हरमुद्दारविवार,...
पंखे से लटकर की खुदकुशी हरमुद्दाशुक्रवार, 28 जनवरी। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा (BS Yediyurappa)...
चार राज्यों में वीकेंड लॉकडाउन हरमुद्दाशनिवार, 8 जनवरी। कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच दिल्ली के साथ ही गुजरात,...
आलोट सिविल अस्पताल में डिजिटल एक्सरे, आईसीयू तथा लेब का लोकार्पण हरमुद्दारतलाम, 27 अगस्त। कर्नाटक के राज्यपाल (Governor of Karnataka)...
डॉ. रत्नदीप निगम मित्रों , आज आपको शीतला सप्तमी की वास्तविक, प्रामाणिक एवम भारत के आयुर्वेद विज्ञान की रोचक...
संजय भट्ट भाई साहब को आपदा में अवसर ढॅूढने में महारत हांसिल थी। वे किसी भी आपदा में अवसर...
घर की दहलीज के बाहर खुशियां बांटी ना, तो "बगैर मास्क" वालों को यमराज कोरोना नहीं छोड़ेगा
दिनेश...
‘जीवन के दुःख-दर्द हमारे बीच ही हैं और खुशियां भी हमारे करीब।ज़रूरत इन्हें देखने और महसूस करने की है। सड़क पर चलते हुए जब किसी आदिवासी के फटे पैर दिखते हैं तो भीतर का कवि जाग जाता है।उस पीड़ा को वही समझ सकता है जो उस आदिवासी के प्रति संवेदना रखता हो।‘ इन संवेदनाओं को अपने सक्रिय जीवन में कई बार अभिव्यक्त करते रहे हिन्दी और मालवी के कवि, डाॅ. देवव्रत जोशी आम जनता की पीड़ा, दुःख-दर्द से, कलम और देह से उसी तरह जुड़े रहे जिस तरह कोई शाख पेड़ से जुड़ी रहती है। पाॅच दशक तक निरंतर लिखते हुए देवव्रत जी ने साहित्य के कई उतार-चढ़ाव देखे। वे छंदबद्ध रचना छंदमुक्त दौर के सर्जक/साक्षी रहे। उन्होंने गीत-नवगीत और नई कविताएॅं लिखी। उनकी कलम जब भी चली नई परिपाटी को गढ़ती चली गई। ज़िन्दगी से लम्बी जद्दोजहद के...