राजेश घोटीकर प्रसिद्धि और सम्मान की भूख बुद्धिमत्ता को निगल जाती है................ एक जंगल था। इस जंगल में बड़े सुन्दर...
साहित्य
त्रिभुवनेश भारद्वाज –---------------------- अरण्य रुदन अग्नि में सुकांति सुमन नित्य निरंतर सिसकी सुबकी पलक झरे अनिमेष अंसुअन शिवा की प्रणयिनी...
इंदु सिन्हा नारी का भाग्य टेरिस पर गमले में उगाए गए पौधे के समान है ,तो गलत नहीं होगा, जैसे...
डॉ. मुरलीधर चाँदनीवाला –----- ----------------------- दुर्गा कहो मुझे या चण्डी , अबला कहो या सती सावित्री , सब तुम्हारी इच्छा...
हरमुद्दा डॉट कॉम रतलाम। कविता हम सबके भीतर होती है, हर काम कविता की शक्ल ले सकता है। कोई डाक्टर या...
हरमुद्दा डॉट कॉम नई दिल्ली। हिन्दी आलोचना के शिखर पुरुष नामवर सिंह का मंगलवार की मध्य रात्रि यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान...
डॉ. मुरलीधर चाँदनीवाला ---------------------------- हे धरती ! हे आकाश ! मेरे खून में क्रान्ति भर दो । मेरे दिल में...
त्रिभुवनेश भारद्वाज ------------------------ सच नहीं भाई नहीं चाहिए आगे जाइए यहाँ कोई सुनने वाला नहीं सब तरफ निपुण व्यवसायी हैं...
त्रिभुवनेश भारद्वाज ------------------------ रोम-रोम पुलकित हुआ, अँखिया ढूँढे मीत ऋतु बसंत के साथ जब फागुन गाए गीत मौसम की अंगड़ाई...