शख्सियत : गीत और ग़ज़ल भारतीय साहित्य तथा संगीत की है धरोहर
⚫ शायर रामदयाल शर्मा का कहना
⚫ नरेंद्र गौड़
’गीत और ग़ज़ल दोनों ही भारतीय साहित्य और संगीत की महत्वपूर्ण धरोहर हैं, लेकिन इनका इतिहास, संरचना और अभिव्यक्ति के तरीके अलग-अलग हैं। गीत का इतिहास बहुत प्राचीन है। यह भारतीय लोकगीतों और शास्त्रीय संगीत से जुड़ा हुआ है।’

शायर रामदयाल शर्मा
यह बात गीत ग़ज़ल की दुनिया के सशक्त हस्ताक्षर रामदयाल शर्मा ने कही। इनका कहना था कि ग़ज़ल का इतिहास 1400 वर्ष पुराना है, जिसकी उत्पत्ति अरब और फारस में हुई थी। यह कविता और संगीत का एक उत्कृष्ट मिश्रण है, जो मानवीय भावनाओं और अनुभवों को व्यक्त करने की क्षमता के लिए जानी जाती है। एक सवाल के जवाब में शर्मा जी ने कहा कि ग़ज़ल की उत्पत्ति अरबी साहित्य में हुई और फिर फारसी, उर्दू और अन्य भाषाओं में लोकप्रिय हुई। 18 वीं और 19 वीं शताब्दी में मीर तकी मीर और मिर्जा ग़ालिब जैसे शायरों ने उर्दू ग़ज़ल को एक नई पहचान दी।
गीत में राग होना वांछित
शर्मा जी का कहना था कि भारतीय उपमहाव्दीप में ग़ज़ल ने स्थानीय काव्य और संगीत परंपराओं के साथ मिलकर एक अनूठी शैली का विकास किया। इसी प्रकार गीत भी हिंदी साहित्य की महत्वपूर्ण विधा है, जो कि विभिन्न छंदों और लय में लिखी जाती है। गीत में राग का होना भी वांछित है। ग़ज़ल की शुरूआत एक लम्बी कविता, क़सीदा से हुई, जिसमें 100 से अधिक शेर होते थे। 11 वीं शताब्दी में कवि रूदाकी ने क़सीदा के एक भाग को अलग करके ग़ज़ल नामक एक नई शैली बनाई।
अनेक रचनाएं प्रसारित एवं प्रकाशित
शर्मा जी का जन्म शाजापुर जिले की तहसील शुजालपुर के ग्राम शाहपुर में हुआ। आपने पोस्ट ग्रेजुएट शुजालपुर से और एलएलबी शाजापुर से किया। कुछ दिनों आपने शिक्षा विभाग में नौकरी की। इन दिनों आप वाणिज्य कर विभाग से सेवा निवृत्त होकर स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। इनकी पत्नी श्रीमती कृष्णा शर्मा आकाशवाणी की प्रथम श्रेणी गायिका हैं। बेटा व्योम शर्मा चीन में सेवारत है। एक बेटी अमेरिका और दूसरी पूणे में निवास कर रही हैं। इनकी अनेक रचनाएं आकाशवाणी से प्रसारित एवं विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं प्रकाशित हो हो चुकी हैं और आप विभिन्न मंचों से भी रचनापाठ करते रहे हैं।
रामदयाल शर्मा की ग़ज़लें
(एक)
बादलों और बिजलियों के साथ में
हो गये हम दरबदर बरसात में
हो गई शामिल हुकूमत भी यहां
बाढ़ आंधी बारुदों की जात में।
रास्ते अनजान बेगाना शहर
मासूमों को फिर मिला सौगात में।
सो गए बच्चे सुलाने पर मगर
जाने क्या बतिया रहे थे रात में
देखता हूं रोशनी के नाम पर
आग रख दी है किसी ने हाथ में।
हैं नुमाइंदे नुमाइश भर यहां
चल रहे जलसों में जो बारात में।
हंै कई अंदाज ए बारिश तेरे
चांदिया बरसीं कहीं बरसात में।
आब है या तिश्नगी है आप की
देखिए बरसात को बरसात में।
रहनुमाओं मुल्क को अब बक्श दो,
और मत घोलो जहर हालत में।
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(दो)
हर नये किरदार में, देखें हैं तेवर आपके
दिल में है बारुद, हाथों में कबूतर आपके।
हम परिंदे आंख अपनी बस फलक पर ही टिकी है
सारी जमीं है आप की,सारे समंदर आप के।
जंग जारी है हमारी बस कलम ले हाथ में
हो मुबारक आप को शमशीरों खंजर आप के।
किस तरह आकाश में परवाज भर पायेंगे आप
आंख धुंधली और है,भीगे हुए पर आप के।
आप के गम आप की खुशियां सभी पर्दे में है
है बड़ा मुश्किल बताना क्या है अन्दर आप के।
बंद सारी खिड़कियां दरबान दरवाजों पे हैं
क्या घुटन क्या बेबसी है घर के अन्दर आप के।
रास्ते ही हमसफर, हमदम रही दीवानगी
मंजिलें जितनी भी हैं, सारी नजर है आप के।
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(तीन)
हर हादसा अब बेअसर होता नजर आए
हत्याओं, हुकूमत में, समझोता नजर आए।
यूं धुवें और राख की पुरजोर मांगें हैं
अब हमें भी आग का दर्जा दिया जाए
चार झीलें हैं शहर में, और लाखों झुग्गियां
आप तय कीजे शहर को क्या कहा जाए।
ये जमीं गौतम की है, यह देश गांधी का
कब तलक बेजान ये जुमला सुना जाए
हो रही तब्दील सारी बस्तियां बाजार में
किस जगह घर द्वार व आंगन रख जाए।
शोर से बहरा हुआ है, स्वार्थ में अंधा
इस सदी के आदमी को क्या कहा जाए।
माना कि मुश्किल है हवा का रुख बदल पाना
पर मुनासिब भी नहीं,संग संग बहा जाए
जगमगाते शहर में, कितना अन्धेरा हो रहा,
फिर नया इक चांद व सूरज रचा जाए
बुझ गई है आग गांवों में अलावों की ,
ये तबाही या तरक्की क्या कहा जाए।

Hemant Bhatt