मेरी नजर से : शिव के लिए दो देशों में युद्ध दशकों से
प्रेम विहार शिखेश्वर शिव मंदिर का भीषण विवाद तो 2008 से शुरू हुआ, जब यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज ने इस अनुपम मंदिर को विश्व धरोहर के लिए रजिस्टर्ड करने की पहल कर दी। हेरिटेज हो जाने पर कंबोडिया विश्व पर्यटन का नायब देश बन जाता। इसलिए तब से अब तक संघर्ष और तनाव के कारण, हजारों निवासी विस्थापित हो चुके हैं।
⚫ डॉ. प्रदीपसिंह राव
श्रावण के इस पवित्र माह में हमारे देश में जगह जगह शिव पूजा हो रही है। शिवालयों में ॐ नमः शिवाय की गूंज है। तो वहीं भारत से 4,784 कि मी दूर कंबोडिया और थाईलैंड में "शिव संघर्ष" चल रहा है। किसी मंदिर को लेकर भारत से इतनी दूर दो देशों में युद्ध होना अचरज भरा ही लगता है।

दोनो देशों में मंदिर को लेकर संघर्ष 1907, से ही चल रहा है, जब कंबोडिया, फ्रांस के अधीन था। तब नक्शे में फ्रांस ने अति प्राचीन शिव मन्दिर को कंबोडिया की सीमा में बता दिया था। थाईलैंड तब से इसे नहीं मानता है।
प्रेम विहार शिखेश्वर शिव मंदिर

11वीं सदी में कंबोज के खमेर साम्राज्य के राजा सूर्य वर्मन प्रथम ने, "प्रेह विहार" (शिखेश्वर शिव मंदिर) विशाल स्तर पर बनवाया था। हालांकि इसकी नींव 9वीं शताब्दी में एक हिंदू तपस्वी आश्रम में ही उस जगह होने की किंवदंती है। भारत के राजाओं ने कई दूरस्थ देशों में हिंदू धर्म उपनिवेश स्थापित कर लिए थे। बौद्ध धर्म भी इसी तरह फैलता रहा।

मंदिर की वास्तुकला दक्षिण के चोल राजाओं के समय की
इस भव्य मंदिर की वास्तुकला दक्षिण के भारत के चोल राजाओं के समय की है। "अंकोरवाट" के विष्णु मंदिर में हिंदू देवी देवताओं की नक्काशी है। राम रावण के प्रसंग हैं।
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने दिया फैसला जिस कर दिया अमान्य
1962 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने शिव मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा मान लिया था, लेकिन थाईलैंड ने उसे अमान्य कर दिया। इसका भीषण विवाद तो 2008 से शुरू हुआ, जब यूनेस्को के वर्ल्ड हेरिटेज ने इस अनुपम मंदिर को विश्व धरोहर के लिए रजिस्टर्ड करने की पहल कर दी। हेरिटेज हो जाने पर कंबोडिया विश्व पर्यटन का नायब देश बन जाता। इसलिए तब से अब तक संघर्ष और तनाव के कारण, हजारों निवासी विस्थापित हो चुके हैं और पिछले कुछ दिनों में कई लोग मारे भी गए हैं।

मामला पहुंचा संयुक्त राष्ट्र संघ में
पूरा विश्व दोनों देशों से शांति की अपील कर चुका है। मामला संयुक्त राष्ट्र संघ में पहुंचा हुआ है, लेकिन कोई भी मान नहीं रहा। शिव की महिमा अपरम्पार है। भारतीयों को पता है कि शिव विश्वव्यापी शक्ति हैं, जिसे पाने के लिए दो देशों में युद्ध की नौबत आ गई है। ॐ नमः शिवाय।
Hemant Bhatt