मुद्दे की बात : भविष्य में स्कूल हादसों को रोकने के लिए तत्काल कदम जरूरी...

मुद्दे की बात : भविष्य में स्कूल हादसों को रोकने के लिए तत्काल कदम जरूरी...

त्रासदी के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का विवादास्पद बयान

ब्रजेश कुमार त्रिवेदी
25 जुलाई, 2025 को राजस्थान के झालावाड़ में एक स्कूल भवन के ढहने से सात मासूम बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस त्रासदी के बाद शिक्षा मंत्री मदन दिलावर का विवादास्पद बयान "राज्य में सभी स्कूल भवनों की मरम्मत संभव नहीं है! इसके लिए मैं अपनी जेब से पैसा नहीं दे सकता"। न केवल जनता के गुस्से का कारण बना, बल्कि सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं। जबकि शिक्षा बजट में भारी राशि आवंटित की जाती है, रखरखाव और बुनियादी ढांचे की अनदेखी घातक साबित हो रही है।

केवल और केवल प्रबंधन के साथ इच्छा शक्ति का मामला

हालांकि, मरम्मत के लिए धन का अभाव एक बहाना हो सकता है, लेकिन सरकार के पास ऐसा करना संभव है, जो उसके नियंत्रण में है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्राथमिकता नई भवनों के निर्माण की नहीं, बल्कि बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसके लिए स्कूल भवनों का नियमित और पारदर्शी सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य होना चाहिए। यदि कोई भवन जर्जर है या बारिश के मौसम में गिरने का खतरा है, तो उसे तुरंत चिह्नित करके बच्चों और शिक्षकों को सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित किया जाए। यह कदम धन की कमी के बावजूद लागू हो सकता है, क्योंकि यह केवल प्रबंधन और इच्छाशक्ति का मामला है।

बारिश के पहले ध्यान देने की जरूरत

बारिश की ऋतु में स्कूलों को अस्थायी रूप से अन्य सुरक्षित इमारतों जैसे सामुदायिक केंद्रों या पक्के सरकारी भवनों में संचालित करने की व्यवस्था की जा सकती है, जहां बच्चों और शिक्षकों का संचालन सुरक्षित रूप से हो सके। यह सुनिश्चित करना सरकार का नैतिक और संवैधानिक दायित्व है, क्योंकि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के तहत बच्चों को सुरक्षित वातावरण में पढ़ने का अधिकार है। इसके लिए स्थानीय प्रशासन, अभिभावक समितियों, और शिक्षा विभाग को मिलकर त्वरित योजना बनानी होगी।

अनदेखी की भयावहता

झालावाड़ हादसा एक सबक है कि बुनियादी ढांचे की अनदेखी कितनी भयावह हो सकती है। सरकार को मरम्मत के लिए धन जुटाने के बजाय, पहले बच्चों और शिक्षकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए। यह न केवल एक प्रशासनिक कदम होगा, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही और संवेदनशीलता का भी प्रमाण होगा। समय रहते कार्रवाई न हुई, तो आने वाले दिनों में और जानें जा सकती हैं और यह किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।