मुद्दे की बात : रतलाम में "कुत्तों" की संख्या में चमत्कारिक इजाफा

याद आता है कि रतलाम शहर में कुत्तों के बंध्याकरण का कागजी अभियान चला था। अनेक कुत्तों के कान कटे देखकर आपको यकीन नहीं करना चाहिए कि ये प्रजाति विस्तार में असमर्थ है। हमारे ही इलाके में कान कटे कुत्तों के द्वारा वंश वृद्धि की जा रही है। दरअसल "ऑपरेशन"अक्सर असफल ही होते हैं।

मुद्दे की बात : रतलाम में "कुत्तों" की संख्या में चमत्कारिक इजाफा

त्रिभुवनेश भारद्वाज

रतलाम में "कुत्तों" की संख्या में चमत्कारिक इजाफा हुआ है।रात में पैदल या दो पहिया वाहन से कहीं जाना, अपनी कीमती जान कुत्तों के हवाले करने जैसा है। माननीय उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली एनसीआर के रहवासियों की तकलीफ को जल्दी सुन लिया और  महा नगर निगम को आदेश दे दिया कि कुत्तें सड़क पर नहीं दिखना चाहिए इन्हें पकड़कर शेल्टर होम पहुंचाए और कोई व्यक्ति या संगठन इसमें रुकावट बनता है तो उनके खिलाफ कोर्ट के आदेश की अवमानना के तहत कार्यवाही की जाएगी।


माननीय न्यायालय ने इस अखिल भारतीय समस्या पर एकसाथ विचार किया होता तो हमारी भी पीड़ाएं कम हो सकती थी। हमारे शहर रतलाम में दिन और रात में अब कोई खास फर्क नहीं। बेशर्म कुत्तें हुजूम में ही रहते हैं। आमतौर पर चलती गाड़ियों के पीछे दौड़ते है। राह चलते लोगों को काटने लगते हैं। बड़ा खतरा तो स्कूली विद्यार्थी उठाते हैं।

हल्ला करने पर और हो जाते हैं उग्र

कुत्तें एकता के सूत्र में बंधे है और नागरिकों को अकेले ही आना जाना पड़ता है। बिना वार्निंग के मौका मिलते ही काट लेते हैं।बचाओ बचाओ का हो हल्ला करने पर अधिक उग्र हो जाते हैं जैसे ये हरकत भी उनको नागवार लगती हो।एक कुत्तें के कमजोर पड़ने पर सांस्कृतिक समूह बनाकर एकसाथ हमला करते हैं। याद आता है कि रतलाम शहर में कुत्तों के बंध्याकरण का कागजी अभियान चला था। अनेक कुत्तों के कान कटे देखकर आपको यकीन नहीं करना चाहिए कि ये प्रजाति विस्तार में असमर्थ है। हमारे ही इलाके में कान कटे कुत्तों के द्वारा वंश वृद्धि की जा रही है। दरअसल "ऑपरेशन" अक्सर असफल ही होते हैं और खासतौर पर तब जब किए ही नहीं गए हो।

कर्णभेदी सुरों को सहन करना असम्भव

हम अपने क्षेत्र के चिर परिचित कुत्तों को हटाने की बात करें तो सरासर गलती होगी क्योंकि रात में कुत्तों की संख्या अचानक सौ  तक पँहुच जाती है और इनके कर्णभेदी सुरों को सहन करना असम्भव होता है। रतलाम नगर निगम आयुक्त से करबद्ध याचना है कि रोटी देने के लिए एक आध कुत्ता (कुतिया कतई नहीं) को छोड़कर बाकी सारे कुत्तें यदि कोई शेल्टर होम जैसी जगह हो तो वहाँ पहुंचाने का कष्ट करें और ये काम ऐसे जिम्मेदारों को सौंपे जो पकड़ने के बजाए उल्टे दो चार बाहर के दुष्ट कुत्तें न छोड़ जाए।