साहित्य रचना : अटल बिहारी वाजपेई- कवि हृदय लेकिन अविचलित पंथ 

पिता का शीश भी किया उन्नत माता की कोख निहाल हुई कृष्ण और कृष्णा की छवि प्रस्फुटित अटल में हो आई।

साहित्य रचना : अटल बिहारी वाजपेई- कवि हृदय लेकिन अविचलित पंथ 

डाॅ. सुषमा श्रीवास्तव (लखनऊ)       

पाषाण सम जो अटल अडिग
वह हृदय से पुष्प से कोमल थे 
कर्म क्षेत्र ही युद्ध क्षेत्र है 
यह उनका हरदम कहना था 
कवि हृदय लेकिन अविचलित पंथ 

भाव निराशा का नहीं कभी 
ओजस्वी स्वर से भरे हुए
जय और पराजय एक बराबर 
युद्ध नहीं है समाधान
अटलजी यह कहते रहे सदा 

सादगी पूर्ण जीवन उनका था 
मौन को मानते थे कायरता 
वक्ता मुखर और नेता कुशल  
अटल पहुंचे देश के शिखर
राजनीतिक रथ पर चढ़कर

भीष्म पितामह जैसा पाया जीवन 
ग्वालियर नगर में लिया जन्म
धनधन्य वहां की धरा हुई 
पिता का शीश भी किया उन्नत
माता की कोख निहाल हुई
कृष्ण और कृष्णा  की छवि
प्रस्फुटित अटल में हो आई।