देश के पहले "सुख शक्ति धाम" का लोकार्पण 4 जनवरी को, सभी संप्रदाय के लिए

“सुख शक्ति धाम” सभी संप्रदायों के लिए खुला आत्म निरीक्षण केंद्र है। यहां कर्मकांड नहीं, बल्कि “क्यों” की खोज है। उद्देश्य है कि व्यक्ति अपने स्वयं के अनुभव से सत्य को जाने और उसे जीवन में उतारे।

देश के पहले "सुख शक्ति धाम" का लोकार्पण 4 जनवरी को, सभी संप्रदाय के लिए

आएंगी प्रमुख हस्तियां

⚫ “सुखी और शक्तिमान समाज के लिए आत्मनिरीक्षण आवश्यक” : वल्लभ भंसाली ने कहा

हरमुद्दा
रतलाम, 17 दिसंबर। देश के पहले सुख शक्ति धाम का लोकार्पण चार जनवरी को किया जाएगा लोकार्पण समारोह में देश की प्रमुख हस्तियां  शामिल होंगी। “सुख शक्ति धाम” सभी संप्रदायों के लिए खुला आत्म निरीक्षण केंद्र है। यहां कर्मकांड नहीं, बल्कि “क्यों” की खोज है। उद्देश्य है कि व्यक्ति अपने स्वयं के अनुभव से सत्य को जाने और उसे जीवन में उतारे।

यह बात पत्रकार वार्ता में वरिष्ठ विचारक, सामाजिक चिंतक सत्य विज्ञान फाउंडेशन एवं देश अपनाए फाउंडेशन के वल्लभ भंसाली ने कही। 30000 से अधिक स्क्वायर फीट के क्षेत्र में परिसर बनाया गया है जिसमें लगभग 9000 स्क्वायर फीट पर निर्माण हुआ है। प्राकृतिक रूप से बनाए गए सुख शक्ति धाम में अपार शांति की अनुभूति होगी। 

इनकी रहेगी लोकार्पण समारोह में मौजूद

यह केंद्र रतलाम सहित पूरे देश के लिए प्रेरणा बने, इसी उद्देश्य से 4 जनवरी को इसका भव्य उद्घाटन प्रस्तावित है।  लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति होंगे। विशिष्ट अतिथियों में फोर्स मोटर्स के चेयरमैन एवं अभय प्रभावना म्यूजियम के संस्थापक डॉ. अभय फिरोदिया, टोरेंट  एनर्जी के मानद अध्यक्ष सुधीरभाई मेहता, रतलाम विधायक एवं मध्यप्रदेश कैबिनेट मंत्री चैतन्य काश्यप तथा सुख शक्ति धाम के द्रष्टा, इनाम सिक्योरिटीज के सह-संस्थापक डॉ. वल्लभ भंसाली उपस्थित रहेंगे।

सुख शक्ति धाम के संयोजक मंडल में है यह सभी

सुख शक्ति धाम के संयोजक मंडल में रतलाम के समाजसेवी मुकेश जैन, संजय व्यास, अजीत छाबड़ा, मोहित मूणत, विकास शैवाल, मेघ कुमार लूनिया, जयंत जैन, गौरव त्रिपाठी, वैभव रांका, संजय चपलोत, डॉ. श्याम सुंदर पाटीदार, राजीव श्रीवास्तव, गुस्ताद अंकलेसरिया शामिल हैं।

देखने का नहीं, अनुभव करने का स्थल है सुख शक्ति धाम

यह केंद्र केवल देखने की नहीं, बल्कि अनुभव करने की जगह है-जहां व्यक्ति अपने जीवन को अधिक नैतिक, संतुलित और शक्तिमान बना सकता है। इस विचार को समाज तक पहुंचाने में प्रेस एवं मीडिया की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

व्यवस्थाएं जिम्मेदार है हम स्वयं

श्री भंसाली ने कहा कि यदि हमारे आसपास सड़कें टूटी हैं, नालियां बह रही हैं या ऐसे पुल टूट रहे हैं जिन्हें नहीं टूटना चाहिए, तो क्या इसके लिए केवल व्यवस्था जिम्मेदार है, या हम स्वयं भी? इसी मूल प्रश्न से शुरू हुई यह चर्चा एक व्यापक सामाजिक, नैतिक और आध्यात्मिक विमर्श में परिवर्तित हो गई।

अच्छे देश में अच्छे समाज की कल्पना

श्री भंसाली ने कहा कि हम एक अच्छे समाज और अच्छे देश की कल्पना तो करते हैं, लेकिन उसके निर्माण की जिम्मेदारी किसी मसीहा, किसी नेता या किसी चुनाव परिणाम पर छोड़ देते हैं। हम शिकायत करते हैं, पर स्वयं शुरुआत नहीं करते। 

केवल संकल्प होते हैं क्रियान्वयन नहीं

हर वर्ष न्यू ईयर रिज़ॉल्यूशन बनते हैं, लेकिन अधिकतर असफल हो जाते हैं क्योंकि वे केवल संकल्प होते हैं, क्रियान्वयन नहीं। यही स्थिति देश और समाज को लेकर भी है। सुझाव देने वाले बहुत हैं, लेकिन स्वयं क्या कर रहे हैं। इस पर मौन है।

नहीं दिया जाता नैतिक प्रगति पर ध्यान

श्री भंसाली ने नैतिक पतन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि टूटी सड़क और अच्छी सड़क, दोनों पर होने वाला खर्च GDP में समान रूप से गिना जाता है। यही कारण है कि आर्थिक प्रगति के साथ नैतिक प्रगति पर ध्यान नहीं दिया जाता।

कोई सीमा नहीं लालच और भय की

डिजिटल युग में मनुष्य जाग्रत होकर जीने के बजाय प्रमाद में जीना सीख रहा है। सत्य, मर्यादा और संयम जैसे मूल्य कमजोर होते जा रहे हैं। इसी कारण हमारे ऋषियों ने यम और व्रत की अवधारणा दी, जो मनुष्य की रक्षा करते हैं। जब जीवन से ये हट जाते हैं, तब लालच और भय की कोई सीमा नहीं रहती।

इसलिए हुई सुख शक्ति धाम की परिकल्पना

इन्हीं अनुभव-सिद्ध और विज्ञानसम्मत विचारों के आधार पर “सुख शक्ति धाम” की परिकल्पना की गई है। यह केंद्र इस शोध पर आधारित है कि सुखी होने के लिए जो चाहिए, वही शक्तिमान बनने के लिए भी आवश्यक है। इस विचारधारा के समानांतर श्री भंसाली जी लंबे समय से इस बात पर बल देते रहे हैं कि लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका केवल मतदान तक सीमित नहीं होनी चाहिए। इसी व्यापक सोच से प्रेरित होकर “देश अपनाए” जैसी पहल सामने आई हैं, जिनका उद्देश्य नागरिकों में अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के प्रति सजगता और देश के प्रति आत्मीय उत्तरदायित्व का भाव विकसित करना है।

इस धाम की प्रमुख विशेषताएं है

⚫  पूर्णतः निःशुल्क व्यवस्था  

⚫ कोई शोर, कोई लाउडस्पीकर नहीं  

⚫ मौन, ध्यान और आत्मनिरीक्षण का वातावरण  

⚫ परिचय कक्ष, ध्यान कक्ष और स्वभाव-आधारित प्रयोगात्मक संरचनाएं  

⚫ भारतीय संस्कृति के पांच महापुरुषों -श्रीकृष्ण, भगवान महावीर, गौतम बुद्ध, कबीर दास और गुरु नानक देव के संदेश