साहित्य सरोकार
साहित्य रचना : एक कविता लिखी है
बस तुम यूं ही समझ लेना, कोरे कागज़ को पढ़ लेना, पढ़ लेना तहरीर स्याही की, जो कुछ...
साहित्य रचना : अटल बिहारी वाजपेई- कवि हृदय लेकिन अविचलित...
पिता का शीश भी किया उन्नत माता की कोख निहाल हुई कृष्ण और कृष्णा की छवि प्रस्फुटित...
साहित्य रचना : स्त्री-मन
थोड़ा सम्मान थोड़ी स्नेह की बारिश करते रहो तो भूमि की तरह वह बस तुम्हें देती जाएगी...
संस्मरण : कह 'काका' कविराय बने बमचक से 'धमचक'
काफी समय तक अपने मूल नाम के साथ ही मंचों से कविताएं पढ़ते रहे । उस दौर के प्रमुख...
साहित्य रचना : हर चट्टान पे वक्त लिखा है, संघर्षों की सूक्त...
मानव! तू क्यों भूल गया है, मौन भी करता है संवाद धूप, हिम, तूफ़ान से लड़कर, पर्वत...
साहित्य रचना : हर चट्टान पे वक्त लिखा है, संघर्षों की सूक्त...
मानव! तू क्यों भूल गया है, मौन भी करता है संवाद धूप, हिम, तूफ़ान से लड़कर, पर्वत...
साहित्य रचना : शरद का चांद रजत किरणों से धरती का अभिषेक...
शरद पूर्णिमा का चांद साक्षी बन कर रहा चरण वंदन उतर गया इसलिए धरती के आंगन यमुना...