धर्म संस्कृति : स्वर्ग को छोड़कर धरती पर मानव रूप धारण करते हैं भगवान, ताकि सुन सके प्रभु का गुणगान
धर्म संस्कृति : स्वर्ग को छोड़कर धरती पर मानव रूप धारण करते हैं भगवान, ताकि सुन सके प्रभु का गुणगान
⚫ आचार्य प्रवर पंडित गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी ने कहा
⚫ पूर्वजों की स्मृति में जोशी परिवार द्वारा श्री शिव महापुराण कथामृत महोत्सव
⚫ कथा का विश्राम होगा 14 फरवरी को
हरमुद्दा
रतलाम, 11 फरवरी। स्वर्ग को छोड़कर भगवान धरती पर मानव रूप धारण करते हैं, ताकि लीला अवतार में भगवान प्रभु का गुणगान सुन सके। धरती पर जन्म लेने वाले मनुष्य भगवान से भी ज्यादा भाग्यशाली हैं कि उन्हें भगवान की सभी कथाओं का श्रवण करने का अवसर मिल रहा है।

शिवमहा पुराण कथा श्रवण करते हुए आचार्य प्रवर श्री चतुर्वेदी
यह विचार आचार्य प्रवर गोपाल कृष्ण चतुर्वेदी ने व्यक्त किए। आचार्य श्री चतुर्वेदी श्री शिवमहा पुराण कथा अमृत महोत्सव में श्रद्धालुओं को संबोधित कर रहे थे।

कथा के प्रारंभ में पूजन करते हुए जोशी दंपत्त
चतुर्थ दिन की कथा की शुरुआत में धर्मनिष्ठ सुरेशचन्द्र जोशी दंपति ने पुराण का पूजन किया। उल्लेखनीय है कि पितृ पुरुष पंडित भवानी शंकर जोशी, लक्ष्मीदेवी जोशी, प्रभु दयाल जोशी, शांति देवी जोशी, वासुदेव जोशी, प्रमोद शर्मा एवं नीता जोशी की पुण्य स्मृति में श्री शिव महापुराण कथा अमृत महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। श्री कुबेरेश्वर महादेव मंदिर 330 -331 दीनदयाल नगर सुबह 12:30 से शाम 4:30 बजे तक आचार्य प्रवर श्री चतुर्वेदी द्वारा कथा श्रवण कराई जा रही है। कथा के मुख्य यजमान पंडित कौशलेश सुरेश जोशी एवं श्रीमती श्रुति कौशलेश जोशी है
गहरा पहलू उजागर करता है भक्ति का
श्री चतुर्वेदी ने कहा कि ईश्वर का अवतार केवल दुष्टों का संहार करने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने भक्तों के प्रेम और अपनी कथा (लीला) को सुनने के लिए भी होता है। यह तथ्य सनातन धर्म की भक्ति परंपरा का एक बहुत ही सुंदर और गहरा पहलू उजागर करता है। भगवान को अपने भक्तों का प्रेम और उनके द्वारा गाई गई अपनी कथा सुनने में परम आनंद मिलता है। वे अपनी लीलाओं के रस का स्वयं आस्वादन करने के लिए अवतरित होते हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जब भगवान पृथ्वी पर मानव रूप में आते हैं, तो वे अपनी ही कथा सुनते हैं और अपनी लीलाओं को पुनः जीते हैं।
भक्ति के लिए लेते अवतार
श्री चतुर्वेदी ने कहा कि भगवान चाहते हैं कि भक्त उनकी लीलाओं को गाएं, सुनें और आनंदित हों। उनके अवतार लेने का उद्देश्य ही प्रेम-भक्ति को संसार में फैलाना है। यद्यपि वे सर्वशक्तिमान हैं, फिर भी एक भक्त के प्रेम में वे खुद को सीमित कर लेते हैं, ताकि वे उस प्रेम और कथा का आनंद ले सकें जो केवल एक मनुष्य रूप में ही संभव है। इसलिए इस संसार में जन्म लेने वाले सभी मनुष्यों को चाहिए वे भगवान की लीलाओं को श्रवण अपने मानव जीवन को सार्थक करें।
कथा श्रवण करने का आह्वान
श्री शिव महापुराण कथा अमृत महोत्सव में कथा का विश्राम 14 फरवरी को होगा। धर्मालु सुशीला देवी जोशी पंडित रघुनंदन जोशी, शकुंतला जोशी, सुमन लता जोशी मनकामेश्वर जोशी, डॉ. राजेश जोशी, गिरीश जोशी, दिनेश जोशी, महेश जोशी, मंजुला जोशी, कुसुम जोशी, संगीता जोशी, तृप्ति जोशी, चेतना जोशी भक्तों से कथा श्रवण करने का आह्वान किया है।
Hemant Bhatt