ये रिश्ता क्या कहलाता है, त्रिमूर्ति ने दुनिया में मचाया तहलका

अब चीन, भारत, रूस के त्रिगुट से नया वैश्विक पुनर्नवीनीकरण हो सकता है। ये तीनों देश विश्व की आधी से अधिक आबादी वाले, सबसे बड़ी सैन्य शक्ति वाले और बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश हैं और इनकी भौगोलिक समीपता यूरोप के देशों से भिन्न है। ट्रंप के लिए यह खतरनाक चुनौती है।

ये रिश्ता क्या कहलाता है, त्रिमूर्ति ने दुनिया में मचाया तहलका

 ⚫ भारत चीन के नए संबंधों पर टिप्पणी : डॉ. प्रदीपसिंह राव

सारी दुनिया इस बात से अचंभित है कि दो घोर दुश्मन देश आपस में रातों - रात कैसे एक होते दिख रहे हैं। RIC रशिया, इंडिया और चाइना के त्रिगुट ने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया। ट्रंप के टैरिफ टेरर से भारत को पूरी दुनियां में अमेरिका याचक और मजबूर बताना चाहता था लेकिन संयोग वश sco मीटिंग इसी समय चीन में होने से, तीन महाशक्तियों को एक होने का अवसर मिल गया।

चीन के राष्ट्रपति ने मोदी को हाथों हाथ लिया और गंभीर कूटनीति का परिचय दिया।मोदी ने जापान की यात्रा की और व्यापारिक समझौता करने के बाद चीन गए। यहां,"शंघाई कॉपरेशन आर्गेनाइजेशन" SCO के 8 देशों -भारत, पाकिस्तान, चीन, रूस, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज़्बेकिस्तान और ईरान के संगठन में नई जान फूंक दी। वहीं रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने मोदी के कंधे पर हाथ रख कर बोला,,मै हूं न,,।

भारत के लिए रणनीतिक कुशलता का यह सबसे बड़ा उदाहरण मिला। आज भारत पुरानी गुट निरपेक्षता की जगह "मल्टी एलाइनमेंट," बहुपक्षीयता की राह पर चल पड़ा है। यानी सभी देशों, गुटों से संबंध रखो।रूस के पूर्व राष्ट्रपति गार्बाचोव ने ग्लासनोस्ट और परेस्त्रैका जैसी खुली नीतियों की घोषणा करके वैश्विक परिवर्तन की नींव 1990 में रखी थी।

विश्व तभी से बहु ध्रुवीय होना शुरू हुआ। अब चीन, भारत, रूस के त्रिगुट से नया वैश्विक पुनर्नवीनीकरण हो सकता है। ये तीनों देश विश्व की आधी से अधिक आबादी वाले, सबसे बड़ी सैन्य शक्ति वाले और बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश हैं और इनकी भौगोलिक समीपता यूरोप के देशों से भिन्न है। ट्रंप के लिए यह खतरनाक चुनौती है। भारत के साथ एशिया के कई देश हैं,जापान हर वक्त साथ है,उसके लिए अमेरिका से पहले भारत है।

महामिलन और प्रश्न की झड़ी

बंगलादेश और पाकिस्तान की इन बड़ी शक्तियों के बीच क्या बिसात रह जाएगी। अमेरिका को तो अब यूक्रेन भी हिकारत से देख रहा है,और मोदी को समझदार मान रहा है।                        इस महामिलन के बाद क्या भारत अमेरिका के टैरिफ वार को झेल पाएगा। क्या चीन वास्तव में भारत का साझेदार बन जाएगा जिसकी 3448 किलोमीटर सीमा (LAC)भारत से सटी हुई है। पाक अधिकृत जमीन, डॉकलाम,नाकूला, पेंगोग झील, गलवान विवाद, सिक्किम, तिब्बत, अरुणाचल प्रदेश और CPEC पाकिस्तान चीन आर्थिक गलियारा सहित कई मुद्दे हैं जो दोनों देशों के बीच बड़ी चुनौती हैं। क्या अपने आर्थिक हितों के  लिए चीन सब कुछ भूल कर भारत से बड़े बाजार में खपत के स्वार्थ से  नया रिश्ता मंजूर करेगा। क्या वह पाकिस्तान के आतंकवादी मनसूबों को रोकेगा ? अभी ये यक्ष प्रश्न हैं।वैसे चीन के ही माओ ने कहा था कि सभी अंडों को एक टोकनी में नहीं रखना चाहिए,अलग अलग रखना चाहिए ताकि सुरक्षित रहें।पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री (1784-1865) लॉर्ड पामर्स्टन ने कहा था, कि "राजनीति में हमारा कोई स्थाई मित्र और न कोई स्थाई शत्रु होता है।"