फैसला : पत्नी के हत्यारे पति उस्मान अब्बासी को आजीवन कारावास

फैसला : पत्नी के हत्यारे पति उस्मान अब्बासी को आजीवन कारावास

70 कार्य दिवस में हुआ फैसला

⚫ आरोपी ने किया था प्रेम विवाह

हरमुद्दा
रतलाम 13 मई।  पत्नी की हत्या के आरोपी पति को न्यायालय ने आजीवन कारावास एवं 5000 के जुर्माना से दंडित किया। आरोपी ने मृतका से प्रेम विवाह किया था। न्यायालय द्वारा 70 कार्य दिवस में फैसला सुनाया गया। अभियोजन द्वारा 11 गवाहों के कथन एवं 37 दस्तावेज प्रस्तुत किए गए थे।

शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी

अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी ने बताया कि घटना दिनांक 9 फरवरी 2023 की मध्य रात्रि की है।आरोपी उस्मान पिता सुलेमान अब्बासी उम्र 25 वर्ष निवासी मस्जिद के पास बजरंग नगर रतलाम का निकाह वर्ष 2022 में मृतिका  शिरीन  पिता यूनुस  के साथ हुआ था। मृतिका शिरीन एवं आरोपी के घर आमने-सामने थे। शादी के बाद आरोपी एवं आरोपी  का का झगड़ा होता था। घटना दिनांक को शिरीन  का अपनी सास से झगड़ा हुआ था। रिपोर्ट करने के लिए घर से निकली थी, लेकिन अपनी सहेली के घर चली गई। पति उस्मान उसे ढूंढ रहा था। सहेली के घर आरोपी उस्मान और मृतका का  भाई गया था। उस्मान लोडिंग टेंपो चलाता है। वह शिरीन को टेंपो में लेकर आया और रास्ते में शिरीन के भाई को उतार कर आरोपी एवं मृतिका शिरीन दोनों ढाबे पर भोजन करने गए थे।

भोजन के बाद हुआ विवाद

भोजन के बाद आरोपी एवं मृतिका शिरीन का सालाखेड़ी के पीछे रोड पर विवाद हुआ था। विवाद के दौरान आरोपी उस्मान ने गला दबाकर शिरीन की हत्या कर दी। इसके बाद घर वालों को बताया। मृतिका के शव के दौरान चिकित्सक द्वारा भी दम घुटने से मृत्यु होना बताया गया। पुलिस थाना स्टेशन रोड द्वारा आरोपी के विरुद्ध अभियोग पत्र  न्यायालय में प्रस्तुत किया था।

अंतिम बार साथ में जाना बना सजा का आधार 

न्यायालय तृतीय सत्र न्यायाधीश बरखा दिनकर द्वारा आरोपी उस्मान को भादवि की धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा दी गई। न्यायालय ने अपने फैसले में लिखा की अंतिम बार मृतिका शिरीन आरोपी उस्मान के साथ टेंपो में गई थी l टेंपो से  टूटी हुई चूड़ियां भी बरामद की गई। टेंपो आरोपी का था। इसे प्रमाणित होता है कि आरोपी ने ही शिरीन की हत्या की है। मृतका के माता-पिता को नियमानुसार प्रतिकर  प्रदान करने की भी न्यायालय ने अनुशंसा की है। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक एवं शासकीय अधिवक्ता सतीश त्रिपाठी द्वारा की गई।