श्रावण मास में गुजराती कॉलेज एलुमनी ने किए ज्योतिर्लिंगों के दर्शन...

श्रावण मास में गुजराती कॉलेज एलुमनी ने किए ज्योतिर्लिंगों के दर्शन...

एलुमनी ग्रुप के 34 सदस्यों ने की धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा

⚫ प्राचीन कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत को जाना

हरमुद्दा
इंदौर, 13 अगस्त। सावन के पवित्र महीने में गुजराती आर्ट एंड लॉ कॉलेज स्टूडेंट्स एलुमनी ग्रुप के 34 सदस्यों ने धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की यात्रा के तहत त्र्यंबकेश्वर, घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और एलोरा की यात्रा की।

यह जानकारी देते हुए ग्रुप के संयोजक प्रवीण नागदिवे ने बताया कि इस धार्मिक यात्रा के दौरान सदस्यों ने विधि-विधान से ज्योतिर्लिंगों की पूजा-अर्चना कर देश की समृद्ध धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को करीब से जाना।

प्राचीन कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत को जाना

सावन के उत्साह और आस्था के बीच ढोल-धमाकों के साथ श्रद्धालुओं ने ज्योतिर्लिंगों के दर्शन किए। इस धार्मिक यात्रा के दौरान दर्शन को आये अन्य श्रद्धालुओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यात्रा के दौरान पूरे मार्ग में भक्ति और उल्लास का वातावरण बना रहा। यात्रा के दौरान समूह के सदस्यों ने त्र्यंबकेश्वर और घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग के धार्मिक महत्व के साथ-साथ इन स्थलों से जुड़ी ऐतिहासिक एवं पौराणिक जानकारियां प्राप्त कीं। एलोरा की ऐतिहासिक गुफाओं का भ्रमण कर वहां की प्राचीन कला, स्थापत्य और सांस्कृतिक विरासत के बारे में भी जानकारी हासिल की।

यह रहे शामिल

इस यात्रा में प्रमुख रूप से एलुमनी ग्रुप के मनीषा नागदिवे, प्रवीण नागदिवे, शैलेन्द्र बघेल, के एल मीणा, रूपेश यादव, जगदीश पटेल, गोपाल बोरसी, सुषमा बन्दावड़े, नित्या बन्दावड़े, डॉ. अर्चना वैद्य, रंजना उपाध्याय, सारिका सिंह, जया महाडिक, पिंकी यादव, आराध्या यादव, विभूति यादव, शीला कैथवास, अंशुमान व्यास, राकेश अहिरवार,देवनारायण पांचाल, राजेश सुनहरे, योगेश पांचाल, राधा पांचाल, पुष्कर पांचाल, खुशबू पांचाल, जितेंद्र गुप्ता, वर्षा गुप्ता, श्रृष्टि गुप्ता, सुदर्शना काले, रोहित पटेरिया, सुशील वर्मा, जितेंद्र कुशवाह, राजकुमार जायसवाल, मुरली भोजक, दीपाली कुलकर्णी शामिल रहे।

सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराना ही यात्रा का उद्देश्य

एलुमनी ग्रुप द्वारा सदस्यों को लगातार देश के धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों से रूबरू कराने के उद्देश्य से ऐसी यात्राओं का आयोजन किया जाता रहा है। ग्रुप का उद्देश्य आपसी मेलजोल को बढ़ावा देने के साथ-साथ अपनी पीढ़ी को देश की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराना भी है।