सूरीनाम के प्रिंस बॉलरूम में हुआ 'दिव्य गीता सत्संग' का भव्य आयोजन
⚫ आचार्य सत्यव्रत शास्त्री के विचारों से निहाल हुए श्रद्धालु
⚫ धर्म एवं संस्कृति से ओत प्रोत सांस्कृतिक नृत्य की हुई प्रस्तुति
हरमुद्दा
सूरीनाम, 13 जुलाई। वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति की गूंज और मानवीय मूल्यों के प्रसार के संकल्प के साथ सूरीनाम के सुप्रसिद्ध 'प्रिंस बॉलरूम' में एक विशाल एवं 'दिव्य गीता सत्संग' का भव्य आयोजन किया गया। 'दिव्य गीता सत्संग' ने भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की खुशबू से पूरे माहौल को सराबोर कर दिया। भव्य धार्मिक सभा में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त विद्वान एवं प्रख्यात धर्म प्रवक्ता आचार्य सत्यव्रत शास्त्री ने मुख्य वक्ता के रूप में पधारे। उन्होंने अपने ओजस्वी और ज्ञानवर्धक विचारों से उपस्थित विशाल जनसमूह को श्रीमद्भगवद्गीता के शाश्वत संदेश से रू-ब-रू कराया।
वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ शुभारंभ

शंख ध्वनि के साथ श्रीमद् भागवत गीता का प्रवेश
सत्संग की शुरुआत पारंपरिक और दिव्य तरीके से हुई। वैदिक मंत्रोच्चार की गूंज और शंखध्वनि के बीच पावन ग्रंथ श्रीमद्भगवद्गीता का प्रवेश और पूजन किया गया।

आचार्य श्री शास्त्री का आगमन
दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दौरान पूरा परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर हो उठा। इसके बाद उपस्थित भक्तों ने सामूहिक रूप से भगवद्गीता के पवित्र श्लोकों का सस्वर वाचन किया, जिससे उत्पन्न हुई सकारात्मक ऊर्जा ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। श्री सनातन गीता परिवार के सलाहकार प्रेम दत्त विशुन, आनन्द केवलभान सिंह, सरिता बलदेव रॉय, सभापति वेदितम विशुन, उपसभापति वर्षा सोनई, सचिव रेशमा खरगु, साधना मोहन, सन्तोष शिवनारायण, कोषाध्यक्ष अनुराधा जालिम सिंह एवं रीमा छुटकन ने पूजन अर्चन कर धर्म लाभ लिया।
भजनों की सुमधुर प्रस्तुति और सांस्कृतिक संगम

सत्संग के सांस्कृतिक सत्र में स्थानीय और आमंत्रित कलाकारों द्वारा सुमधुर भजनों की प्रस्तुतियां दी गईं। इन भक्तिमय भजनों पर श्रद्धालु झूमने लगे। प्रस्तुति ने न केवल लोगों को आध्यात्मिक आनंद दिया, बल्कि सूरीनाम की धरती पर भारतीय सांस्कृतिक विरासत की जड़ों को और मजबूती से प्रदर्शित किया।
गीता केवल ग्रंथ नहीं, जीवन जीने की कला है: आचार्य सत्यव्रत शास्त्री

धर्म सभा को संबोधित करते हुए आचार्य सत्यव्रत शास्त्री ने कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता किसी एक काल, देश या जाति के लिए नहीं, बल्कि पूरी मानवता के कल्याण के लिए है। उन्होंने आधुनिक जीवन में तनाव और असमंजस से मुक्ति पाने के लिए गीता के व्यावहारिक सूत्रों को समझाया। आचार्य जी ने अत्यंत सरल और मर्मस्पर्शी भाषा में कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में यदि हम गीता के उपदेशों को अपने दैनिक जीवन में उतार लें, तो मानसिक शांति के साथ-साथ एक आदर्श समाज का निर्माण एवं वैश्विक सौहार्द की स्थापना की जा सके।
सूरीनाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
प्रिंस बॉलरूम में आयोजित इस दिव्य सत्संग में सूरीनाम के कोने-कोने से आए प्रवासी भारतीयों और सनातन धर्म प्रेमियों की भारी भीड़ उमड़ी। पूरा परिसर भजनों और जयकारों से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने आचार्य जी के विचारों को बड़े ही ध्यान और श्रद्धा भाव से सुना।

विश्व शांति एवं मानव कल्याण की प्रार्थना के साथ हुई आरती
कार्यक्रम के अंत में दिव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने विश्व शांति और मानव कल्याण की प्रार्थना की।
इस सफल आयोजन ने न केवल सूरीनाम में रह रहे भारतीय समुदाय को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का काम किया, बल्कि सात समंदर पार सनातन धर्म की महिमा को भी एक नई ऊंचाई दी।
ऐसे आयोजन से मिलती है आत्मिक शांति
कार्यक्रम में शामिल हुए लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजनों से विदेशों में रह रहे प्रवासी समुदाय को एक सूत्र में पिरोने और आत्मिक शांति प्राप्त करने में बड़ी मदद मिलती है।

सामाजिक चेतना जगाने वाले आयोजन होते रहेंगे निरंतर
सनातन गीता परिवार सूरीनाम' ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए
परिवार ने संकल्प जताया कि भविष्य में भी ऐसे आध्यात्मिक और सामाजिक चेतना जगाने वाले आयोजन निरंतर जारी रहेंगे, ताकि भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों पर गर्व हो सके।
Hemant Bhatt