विचार सरोकार : देश में अंबानी, अडानी, जिंदल जैसे धनाढ्य, बावजूद मासूम अनिका उपचार के लिए मोहताज

देश में सिर्फ अमीरों की आबादी बढ़ी है। मगर देने की भावना जरा भी नहीं। ऐसे धनाढ्यों के कारण गर्व नहीं शर्म आती है। मुकेश अंबानी, गौतम अडानी, सावित्री जिंदल (महिला) होने के बावजूद भी उनका दिल मासूम के लिए अब तक नहीं पसीजा है। चिंतनीय विडंबना है कि मासूम उपचार के लिए परेशान है

विचार सरोकार : देश में अंबानी, अडानी, जिंदल जैसे धनाढ्य, बावजूद मासूम अनिका उपचार के लिए मोहताज

सोशल मीडिया पर मदद की गुहार से 4:30 करोड़ हुए एकत्र

⚫ उपचार में जितना विलंब उतनी परेशानियां

⚫ सावित्री जिंदल जैसी महिला का दिल भी नहीं पसीजा

हरमुद्दा
देश में धनाढ्य वर्ग की कमी नहीं है, मगर वे तंग दिल है। अंबानी, अडानी, जिंदल, जैसे बस नाम है। यही कारण है कि इंदौर की रहने वाली 3 साल की मासूम अनिका शर्मा को उपचार के लिए इतना इंतजार करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं मध्यम परिवार को मदद के लिए हाथ फैलाने पड़ रहे हैं मगर उनकी आवाज ऐसे वर्ग पर के कानों में नहीं जा रही है। इन लोगों के लिए तो उनकी संपत्ति में से 9 करोड़ की राशि एक चम्मच भर पानी के बराबर है। यहां तक की सावित्री जिंदल महिला होने के बावजूद भी उनका दिल मासूम के लिए अब तक नहीं पसीजा है। चिंतनीय विडंबना है कि मासूम उपचार के लिए परेशान है। सामान्य मध्यम परिवार के हाथ मदद के लिए उठ रहे हैं मगर वह तो कण के बराबर भी नहीं है। इस मामले में देखा जाए तो देश को ऐसे धनाढ्य वर्ग पर गर्व नहीं शर्म है।

अनिका शर्मा की कहानी वाकई हृदयविदारक है और यह हमारे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था और दुर्लभ बीमारियों (Rare Diseases) के लिए नीतिगत ढांचे पर कई सवाल खड़े करती है।

अनिका SMA Type-2 (Spinal Muscular Atrophy) नाम की एक बेहद दुर्लभ और जानलेवा जेनेटिक बीमारी से जूझ रही है। इस बीमारी में शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं, जिससे बच्चा न बैठ पाता है, न चल पाता है और अंततः सांस लेने में भी तकलीफ होने लगती है।

इस मामले के प्रमुख बिंदु

इलाज की भारी कीमत : अनिका को जिस इंजेक्शन की जरूरत है, उसकी कीमत लगभग ₹9 करोड़ बताई जा रही है। एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए इतनी बड़ी राशि जुटाना लगभग असंभव है।

 मंत्रालय और सरकार की भूमिका

अनिका के माता-पिता ने केंद्र और राज्य सरकार, दोनों से मदद की गुहार लगाई है। हालांकि भारत सरकार की 'दुर्लभ बीमारियों के लिए राष्ट्रीय नीति' (National Policy for Rare Diseases) मौजूद है, लेकिन इसमें मिलने वाली वित्तीय सहायता की सीमा ₹50 लाख तक है, जो ₹9 करोड़ के सामने बेहद कम है। इसी 'सिस्टम' की सीमा को अक्सर परिवार "अनदेखी" के रूप में महसूस करते हैं।

क्राउड फंडिंग का सहारा

सरकार से पर्याप्त मदद न मिलने की स्थिति में, अनिका के परिजनों ने सोशल मीडिया और क्राउडफंडिंग का सहारा लिया है। जबकि देश के राजनेता चाहे तो बड़े-बड़े उद्योगपति चंद मिनट में व्यवस्था कर सकते हैं मगर नन्ही के लिए नेताओं के दिल में जरा सा भी दर्द नहीं है मन व्यथित नहीं है। 

अब तक मिले जानकारी के अनुसार करीब ₹4.30 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई जा चुकी है, लेकिन अभी भी लक्ष्य आधा ही पूरा हुआ है।

सेलेब्रिटी सहयोग 

अभिनेता सोनू सूद और कई स्थानीय संगठनों ने भी अनिका की जान बचाने के लिए लोगों से अपील की है। हाल ही में बच्चों के माध्यम से भी एक अभियान शुरू किया गया है ताकि बूंद-बूंद से यह बड़ा फंड इकट्ठा किया जा सके।

क्या किया जा सकता है?

अनिका के पास समय कम है क्योंकि ऐसी बीमारियों में दवा जितनी जल्दी दी जाए, उसका असर उतना ही बेहतर होता है। 

होना चाहिए विशेष दबाव

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठा जा रहा हैं ताकि स्वास्थ्य मंत्रालय पर इस तरह की दुर्लभ बीमारियों के लिए विशेष फंड बनाने का दबाव बने।

संपत्ति तो है मगर देने की भावना नहीं

एक नज़र इधर भी

2025 भारत में 350 से अधिक अरबपति (billionaires) हैं, जो हुरुन इंडिया रिच लिस्ट के अनुसार विश्व में तीसरे स्थान पर हैं। फोर्ब्स के अनुसार 2024 में 191 बिलियनर्स थे, जिनकी कुल संपत्ति 82.6 लाख करोड़ रुपए थी। वहीं, लगभग 85,698 लोगों की संपत्ति ₹87 करोड़ ($10 मिलियन) से अधिक है। मुकेश अंबानी और गौतम अडानी देश के सबसे धनी व्यक्ति हैं। 

मुकेश अंबानी : रिलायंस इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष, सबसे धनी।

गौतम अडानी: अडानी समूह के अध्यक्ष, दूसरे सबसे धनी।

सावित्री जिंदल: भारत की सबसे धनी महिला।

अन्य: सुनील मित्तल, रोशनी नादर मल्होत्रा, और शाहरुख खान प्रमुख अरबपतियों में शामिल हैं। 

भारत में 8.7 लाख से अधिक ऐसे परिवार हैं जो करोड़पति (मिलियन-डॉलर वाले) हैं। यह संख्या 2021 की तुलना में दोगुनी हो गई है, जो तेजी से बढ़ते हुए अमीरों की आबादी को दर्शाता है। मगर सिर्फ उनकी आबादी बढ़ी है। मगर देने की भावना जरा भी नहीं। ऐसे धनाढ्यों के कारण गर्व नहीं शर्म आती है।