चुनाव : दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में पहली बार बनी महिला राष्ट्रपति 

चुनाव : दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में पहली बार बनी महिला राष्ट्रपति 

संकटग्रस्त देश की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में चुना
डॉक्टर जेनिफर गेर्लिंग्स-सिमंस को

⚫ जेनिफर 16 जुलाई को राष्ट्रपति के रूप में लेंगी शपथ

⚫ समुद्र किनारे उम्मीद है तेल मिलाने की, 2028 तक हो सकता है उत्पादन

⚫ सूरीनाम में हिंदू धर्म एवं भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार कर रहे हैं रतलाम मध्य प्रदेश के आचार्य सत्यव्रत शास्त्री

हरमुद्दा
सोमवार 7 जुलाई। दक्षिण अमेरिकी देश सूरीनाम में पहली बार महिला राष्ट्रपति बनी हैं। संसद ने रविवार (स्थानीय समयानुसार) को डॉक्टर जेनिफर गेर्लिंग्स-सिमंस को संकटग्रस्त देश की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में चुना। नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी का नेतृत्व करने वाली जेनिफर 16 जुलाई को राष्ट्रपति के रूप में शपथ लेंगी। रतलाम मध्य प्रदेश के रहने वाले आचार्य सत्यव्रत शास्त्री ढाई दशक से सूरीनाम में हिंदू धर्म एवं भारतीय संस्कृति का प्रचार प्रसार कर रहे हैं।


सूरीनाम की नेशनल असेंबली दो-तिहाई मतों से राष्ट्रपति का चुनाव करती है। जेनिफर, जो पहले कांग्रेसी थीं। उन्होंने निर्विरोध चुनाव जीता, क्योंकि उनकी पार्टी ने मई में हुए चुनाव के बाद देश के मौजूदा नेता को हटाने के उद्देश्य से एक गठबंधन बनाया था, जिसमें कोई स्पष्ट विजेता नहीं था। यह गठबंधन ऐसे समय में बना है, जब सूरीनाम को समुद्र के किनारे तेल मिलने की उम्मीद है और 2028 तक इसका उत्पादन शुरू हो सकता है। 

पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी और भी बढ़ी: 

जेनिफर राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतने के बाद जेनिफर ने कहा, 'मुझे पता है कि राष्ट्रपति का पद बहुत बड़ा है, और इस तथ्य से जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है कि मैं इस पद पर देश की सेवा करने वाली पहली महिला हूं।' बता दें कि सूरीनाम 646,000 से अधिक लोगों वाला डच-भाषी देश है। 

भ्रष्टाचार के मामलों से भरा रहा संतोखी का कार्यकाल 

राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी

राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी का पांच साल का कार्यकाल भ्रष्टाचार के मामलों से भरा रहा है। राजनेता और पूर्व पुलिस अधिकारी थे, जो 2020 से सूरीनाम के 9वें राष्ट्रपति हैं। 2020 के चुनाव जीतने के बाद, संतोखी एकमात्र सूरीनाम के राष्ट्रपति उम्मीदवार थे। उन्हें सूरीनाम की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से मदद मांगने के लिए मजबूर होना पड़ा। इसके चलते देश के सार्वजनिक कर्ज का बड़े पैमाने पर पुनर्गठन किया गया। सरकारी सब्सिडी में कटौती की गई। इससे आर्थिक हालात थोड़े सुधरे, लेकिन आम लोगों को बहुत मुश्किलें झेलनी पड़ीं और कई बार हिंसक प्रदर्शन भी हुए।

देश की आर्थिक स्थिति सुधारना

71 वर्षीय जेनिफर और उनके साथी ग्रेगरी रुसलैंड ने रविवार को बताया कि वे सबसे पहले देश की आर्थिक स्थिति को सुधारेंगे। खासतौर पर छोटे स्तर की सोने की खदानों से टैक्स वसूलने जैसे तरीकों से सरकारी कमाई बढ़ाने की बात कही है।

तेल निकलने से पहले करना होगा चुनौतियों का सामना : रामौतारसिंह

सूरीनाम के अर्थशास्त्रियों के संघ के पूर्व अध्यक्ष विंस्टन रामौतारसिंह ने कहा कि तेल निकलने से पहले के इन वर्षों में राष्ट्रपति को बहुत चुनौतियों का सामना करना होगा, क्योंकि देश को हर साल लगभग 400 मिलियन डॉलर का कर्ज और ब्याज चुकाना है। उन्होंने कहा, 'सूरीनाम के पास इतना पैसा नहीं है। पिछली सरकार ने ऋणों को पुनर्निर्धारित किया था, लेकिन वह सिर्फ एक अस्थायी राहत थी।'

अफ्रीकी और भारतीय धर्मों का अभी भी व्यापक रूप से पालन

हिंदू धर्म प्रचारक आचार्य सत्यव्रत शास्त्री

सूरीनाम में हिंदू धर्म एवं भारतीय संस्कृति तथा परंपरा का प्रचार प्रसार करने वाले रतलाम मध्य प्रदेश के आचार्य सत्यव्रत शास्त्री ने बताया कि मुख्य धर्म ईसाई धर्म है, जिसे यूरोपीय उपनिवेशवादियों द्वारा सूरीनाम में लाया गया था। लगभग आधे लोग ईसाई हैं, मुख्य रूप से रोमन कैथोलिक और मोरावियन। हिंदू, जिनमें से लगभग सभी दक्षिण एशियाई हैं, जनसंख्या का लगभग पाँचवाँ हिस्सा हैं। सूरीनाम के दसवें से पाँचवें हिस्से के बीच मुस्लिम हैं, जिनमें से ज़्यादातर जावानीस और एक छोटा दक्षिण एशियाई समूह है। यहूदी धर्म, जो 16वीं शताब्दी की शुरुआत से सूरीनाम में मौजूद है, अभी भी प्रचलित है, जबकि कई चीनी कन्फ्यूशियन हैं। अफ्रीकी और भारतीय धर्मों का अभी भी व्यापक रूप से पालन किया जाता है। श्री शास्त्री ने बताया कि वह ढाई दशक से सूरीनाम में हिंदू धर्म एवं भारतीय संस्कृति तथा परंपरा का प्रचार प्रसार कर रहे हैं। इतना ही नहीं वहां पर बच्चों को संस्कृत के साथ कर्मकांड, पुराण एवं धर्म की शिक्षा दे रहे हैं।