विचार सरोकार : मर चुकी है मानवता?
कोचिंग संस्थानों, शिक्षण संस्थानों में प्रतिवर्ष हजारों छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर रहे हैं। अभी विगत दिनों माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आत्महत्या रोकने के लिए कुछ बंधनकारी प्रावधानों का पालन करने हेतु संपूर्ण दिशा निर्देश प्रत्येक राज्यों को दिए थे।
⚫ आरसी पंवार, सेवानिवृत आईपीएस
रतलाम बोधी इंटरनेशनल स्कूल की घटना ने मन विचलित कर दिया। एक मासूम अबोध बालक को इतना बड़ा कदम क्यों उठाना पड़ा? यह विचारणीय है। 14 वर्षीय अबोध बालक 47 बार "सॉरी" कहता है, और किसी का दिल क्यों नहीं पसीजता? नि:संदेह यह लापरवाही और अमानवीता की पराकाष्ठा है। बच्चा मात्रा "सॉरी" ही नहीं बोल रहा था, बल्कि वह अंदर से भयाक्रांत और थरथराने वाली भौतिक स्थिति में होगा। बाद में बच्चे का कृत्य उसे आत्महत्या की परिणीति की ओर ले गया।

बचाव का बेहतरीन तरीका
आत्महत्या के पूर्व लक्षणों में असामान्य व्यवहार स्कूल प्रबंधन को क्यों महसूस नहीं हुआ, 47 बार सॉरी? हद हो गई। इंसानियत का तकाजा था कि बच्चा अगर चार बार "सॉरी" बोल दे तो उसे गले लगाकर माफ कर देना चाहिए। अभिभावक को बुलाने की चेतावनी देने की यहां कहां जरूरत आन पड़ी थी। गले लगाना, आत्महत्या से बचाव का बेहतरीन तरीका है।
कुकुरमुत्तों की तरह उग रहे शिक्षा केंद्र
कुकुरमुत्तों की तरह उग रहे शिक्षा केंद्र पूर्णतया व्यवसाय केंद्र बन चुके हैं। मोटी फीस, लाभ का धंधा किसी के जीवन से कोई लेना देना ही नहीं। ये व्यवस्था किसी की चेतना जगाने वाली नहीं। कोचिंग संस्थानों, शिक्षण संस्थानों में प्रतिवर्ष हजारों छात्र-छात्राएं आत्महत्या कर रहे हैं। अभी विगत दिनों माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आत्महत्या रोकने के लिए कुछ बंधनकारी प्रावधानों का पालन करने हेतु संपूर्ण दिशा निर्देश प्रत्येक राज्यों को दिए थे।
समाज हित में ले संकल्प
उम्मीद है कुछ मानवता, चेतना का संचार होगा और हम हमारी भावी पीढ़ी को आत्महत्या से रोक पाएंगे। आत्महत्या के पूर्व लक्षण जो समय पर गौर करें तो आत्महत्या करने वाली प्रवृत्ति को रोका जा सकता है। आइए हम संकल्प ले कि समाज हित में कुछ ऐसा करें कि देश में आत्महत्या रुक जाए। जय हिंद।
लक्षण
⚫ असामान्य व्यवहार
⚫ लगातार उदासी/बेहोशी
⚫ घोर निराशा
⚫ मनपसंद कार्य नहीं
⚫ आत्महत्या विचार
⚫ ऊर्जा स्तर कम
⚫ नींद न आना/अधिक सोना
⚫भूख कब लगा/वजन घटाना
⚫ जरूर से ज्यादा खाना/ मोटा होना
⚫ हीनता बोध
अनुभवी, लगनशील, संवेदनशील और जांबाज अधिकारी

आरसी पंवार
आईपीएस आर सी पंवार राज्य पुलिस सेवा से 2003 में भारतीय पुलिस सेवा में शुमार हुए। वे अत्यन्त अनुभवी, लगनशील, संवेदनशील, और जांबाज अधिकारी रहे। 2015 में सेवानिवृत्ति के पूर्व वे प्रदेश में कई मुश्किल स्थानों पर अपनी सेवा दे चुके। मानवता उनमें कूट कूट कर भरी हैं। माना जाता हैं कि पुलिस और लेखन का आपस में कोई बहुत अधिक मेल नहीं होता। पर पंवार ने इस किंवदंती को भी झुठलाया। वे बहुत अच्छे लेखक हैं। वे इन दिनों इन्दौर में निवासरत हो कर सामाजिक गतिविधियों में लगे हैं। पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में आपके लेक्चर भी होते हैं। नशा मुक्ति अभियान में उनकी विशेष रुचि है। प्रदेश के विभिन्न महाविद्यालयों में उनके नशा मुक्ति सहित अन्य समसामयिक विषयों पर लेक्चर भी होते हैं। लेखक ने "आत्महत्या क्यों", "न्याय कहां" नाम की पुस्तके भी लिखी हैं। लेखक, चिन्तक पंवार का एक-एक शब्द समाज की राहत के लिए होता हैं।
समाज के लिए जीवन पर्यंत करने की है सोच
आमतौर पर सेवानिवृत्ति के बाद लोग आराम के मूड में आ जाते हैं पर पंवार का सोच जीवनपर्यंत समाज के लिए कुछ करने का हैं। रतलाम की हाल ही की बोधी इंटरनेशनल स्कूल की घटना से पंवार खासे आहत हुए। हरमुद्दा डॉट कॉम के लिए उन्होंने विशेष आलेख भेजा। जिसे हम यहां इस उम्मीद के साथ प्रसारित कर रहे हैं कि समाज का कुछ भला अवश्य हो।
⚫ प्रस्तुति : वीरेन्द्र त्रिवेदी
Hemant Bhatt