शख्सियत : एआई लाखों लोगों की रोजी रोटी छीन लेगा
एआई पर अत्यधिक निर्भरता के कारण इंसानों की सोचने समझने की शक्ति कम हो सकती है, जिससे हम पूरी तरह मशीनों पर निर्भर हो जाते हैं। एआई को पक्षपाती डेटासेट पर प्रशिक्षित किया जा सकता है, जिससे वह पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण निर्णय ले सकता है।
⚫ कवयित्री कविता सक्सेना का कहना
⚫ नरेंद्र गौड़
‘एआई अर्थात आर्टिफिशियल इन्टेलिजेंस (कृत्रिम बुदिमत्ता) से जितने लाभ हैं, तो नुकसान भी कम नहीं हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसकी वजह से 2032 तक लगभग 9 करोड़ लोग बेराजगार हो जाएंगे और इनके वैकल्पिक रोजगार के भी आसार नजर नहीं आते। वहीं गोपनीयता और सुरक्षा संबंधी चिंताए बढ़ जायेंगी। इस पर अत्यधिक निर्भरता से पक्षपाती तथा गलत निर्णय भी हो सकते हैं। वहीं एआई के जरिये कविता भी लिखी जाना सम्भव है।’

कवयित्री कविता सक्सेना
यह बात जानी मानी कवयित्री कविता सक्सेना ने कही। इनका कहना था कि एआई का दुरूपयोग भी किया जा सकता है। जिससे डीपफेक जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं और यह मानवीय संपर्क के अभाव में कुछ क्षेत्रों में अनुपयुक्त भी हो सकता है। एआई संचालित मशीनें इंसानों व्दारा किये जाने वाले कई दोहराये जाने वाले कार्यों को सम्भाल सकती हैं, जिससे लाखों की नौकरी छूटने और बेरोजगारी का खतरा पैदा हो गया है। एआई बड़ी मात्रा में डेटा एकत्र करता है, जिसमें व्यक्तिगत जानकारी भी शामिल हो सकती है। जिसके चलते गोपनीयता भंग हो सकती है और डेटा के दुरूपयोग का खतरा बढ़ जाता है। कई बार एआई सिस्टम हैक भी हो सकते हैं।
सोचने समझने की शक्ति पर असर
एक सवाल के जवाब में कविता जी का कहना था कि एआई पर अत्यधिक निर्भरता के कारण इंसानों की सोचने समझने की शक्ति कम हो सकती है, जिससे हम पूरी तरह मशीनों पर निर्भर हो जाते हैं। एआई को पक्षपाती डेटासेट पर प्रशिक्षित किया जा सकता है, जिससे वह पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण निर्णय ले सकता है। वहीं कई बार तो पता भी नहीं चलता, क्योंकि लोग एआई के निर्णयों को निष्पक्ष मान लेते हैं। एआई का उपयोग गलत उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है। दूसरे यह सुनिश्चित करना आश्चर्यजनक रूप से कठिन है कि एआई पूरी तरह से मानवीय लक्ष्यों के अनुरूप हो और इसके लिए सावधानीपूर्वक प्रोग्रामिंग की आवश्यक्ता होती है।
गलत सलत उत्तर
एक सवाल के जवाब में कविता जी का कहना था कि वर्ष 2024 के नेचर अध्ययन में कहा गया था कि नए बड़े चैटबॉट अज्ञानता स्वीकार करने की तुलना में गलत उत्तर देने के लिए अधिक इच्छुक है। मतलब वह हर प्रश्न का उत्तर देगा ही भले ही इससे और गलतियां हों। आज के एआई चैटबॉट के पास हर चीज़ का जवाब है और यही एक समस्या है। एआई मॉडल हमेशा जवाब देते हैं तब भी जबकि उन्हें जवाब नहीं देना चाहिए। यहां एक बात और एआई से सवाल पूछते समय स्पष्ट और संक्षिप्त भाषा का उपयोग करना जरूरी है और बात को घुमा फिराकर पूछने के बजाए सीधे मुद्दे पर आ जाना चाहिए।
एआई लिख सकता है कविताएं
कृत्रिम बुध्दिमत्ता प्रौद्योगिकी या एआई के आगमन के साथ रचनात्मता वाले कार्य भी अब एआई उपकरणों की मदद से किये जा सकते हैं। कविता लेखन के साथ भी यही स्थिति है। यह साहित्य की एक ऐसी श्रेणी थी जिसमें किसी भाषा का व्यापक ज्ञान और विशिष्ट तुकांत शब्दों का प्रयोग करने का कौशल आवश्यक था। इसके जरिये तुकांत कविता और दोहे आसानी से लिखे जा सकते हैं। यह विभिन्न काव्य संरचनाओं के लिए सुझाव देने में सक्षम है। ऑनलाइन ढेरों एआई कविता लेखन उपकरण उपलब्ध हैं। लेकिन मुक्तिबोध, निराला, तुलसी, कबीर जैसी कविता एआई के जरिए लिखना असंभव है।
आशु कविता के क्षेत्र में महारथ
पचोर जिला राजगढ़ में स्व. अचलबिहारी सक्सेना और श्रीमती स्व. सुभद्रा देवी के यहां जन्मी कविता जी हिंदी साहित्य में एमए कर चुकी हैं। आप गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, दोहे के साथ ही आधुनिक कविताएं भी लिखती हैं। आपकी रचनाएं दूरदर्शन, देश न्यूज, साधना, साइन्स इंडिया आदि चैनलों से प्रसारित होती रही हैं। इसके अलावा इनकी रचनाएं दैनिक भास्कर, नईदुनिया, शुभसंकल्प, शब्दों के सारथी जैसी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं। इनकी रचना ’पिंजरे में कैद’ को ग्वालियर साइंस सेंटर व्दारा पुरस्कृत किया जा चुका है। कविता जी की रचनाओं की भाषा बहुत सरल लेकिन गूढ अर्थ लिए होती है। आपके तीखे व्यंग्य धारदार होते हैं। उल्लेखनीय है कि आप आशु कविता के जरिए चमत्कृत करने की कला में भी महारथी हैं।
चुनिंदा कविताएं
पुतले को जलाकर
पुतले को जलाकर
न कोई विचार किया
अहंकार को जिंदा कर
कहते हैं -हमने रावण मार दिया
झूठ की वकालत की
न सत्य स्वीकार किया
लालच को जिंदा कर
कहते हैं-हमने रावण मार दिया
जब-जब हरण की खबर सुनी
न कोई प्रतिकार किया
चार मोमबत्ती जलाकर
कहते हैं-हमने रावण मार दिया
दूजे की चाटुकारी की
अपनो से न अच्छा व्यवहार किया
राग द्वेष को जगाकर
कहते हैं-हमने रावण मार दिया
न राम सा धेर्य रखा
न त्याग और उपकार किया
दिए दान की प्रदर्शनी लगाकर
कहते हैं -हमने रावण मार दिया।
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एक उम्र के बाद
एक उम्र के बाद
बच्चों से बच्ची सी
बतियाती है न मां..
अपने बचपन की बातें
शरारतें ,सखियों के किस्से
कभी खुशी कभी गम
पुरानी यादों के पुलिंदे
खोल जाती है न मां
कभी अपने हाथों से
बिटिया को सजाया करती थी
सुंदर चोटी काजल टीका
लगाया करती थी
आज बिटिया से पूछे बिना
खुद संवर नहीं पाती है न मा.
नन्हा जब बीमार पड़ता
कहानी में उलझाकर उसे
कड़वी दवाई पिलाया करती थी
अब उसी नन्हें की मीठी
डांट से खुद दवाई खाती है न मां.
अक्सर उनकी शरारतों पर
पापा का डर दिखाया करती थी
और अब पापा की शिकायत
उन्ही मस्तीखोरो से कर जाती है न मां.
एक उम्र के बाद
बच्चों से बच्ची सी
बतियाती है न मां।
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मकड़ी बिफर गई
देख उजड़ा घर बार
मकड़ी बिफर गई
गुस्से में होकर लाल
मकड़ी बिफर गई...
मैंने तो बस एक
जाल बुना है
तूने ओ मानव
जंजाल बुना है
करके ढेर सवाल
मकड़ी बिफर गई ...
इस जाले में बस
मेहनत लगाई
न कोई काली
कमाई लगाई
छीनी न किसी की थाल
मकड़ी बिफर गई....
तेरे अपने तेरा
बाग उजाड़े
चाहे तू कितनी
बाड़ लगा ले
रखियो अपना ख्याल
मकड़ी बिफर गई....
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बोलने वाले बहुत
बोलने वाले बहुत हैं
तोलने वाले बहुत हैं
अपनी गलती दूजे पर
ढोलने वाले बहुत हैं
खूबसूरत फिजा हैं
मेरे हिन्दुस्तान की
उसमे भी देखो जहर
घोलने वाले बहुत हैं
खिला पिला कर पाला
जिन्हें बड़े ही नाज से
आज आस्तिनो में नाग
डोलने वाले बहुत हैं
कसमें खाकर बैठे
राज कभी न खोलेंगे
घुमाफिरा कर मन
टटोलने वाले बहुत हैं
पूरे आसमा पर लगा
शिकारियों का पहरा
निडर जांबाज पंछी पंख
खोलने वाले बहुत हैं।
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जहर न हो जाना
मीठे हो कड़वे
जहर न हो जाना
मेरे गांव तुम
शहर न हो जाना
पेड़ों के झुरमुट
चिड़ियों से चहचहाना
शब्दो के भंडारे
नपीतुली बहर न हो जाना
उछलते कंकड़ की ठप
जरूर सुनाना
शांत ताल,उछलती
लहर न हो जाना
घट्टियों का संगीत
सुनाकर जगाना
गुनगुनाना गीत, शोरभरी
दोपहर न हो जाना
पायल की सरगम
चूड़ियों की खनखन सुनाना
पनघट का बातूनी दौर
ठहर न जाना
कभी ज्वार कभी बाजरा
मौसमी फसल उगाना
कंक्रीट जाल खेतो में
बिखर न जाना
कठिन जीवन में मुस्कुराने का
हुनर सिखाना
सींचना रिश्तों को
सूखी नहर न हो जाना
मेरे गाँव तुम शहर न हो जाना।

Hemant Bhatt