विचार सरोकार : हर क्षेत्र में महिलाएं लहरा रही सफलता का परचम

राजनीति में, वह प्रभावी ढंग से देश का प्रतिनिधित्व कर रही है और विज्ञान, कला तथा खेल जैसे हर मैदान में वह नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। चाहे वह लड़ाकू विमान उड़ाना हो, अंतरिक्ष की यात्रा हो, या ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना हो, आज नारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि कोई भी क्षेत्र उसके लिए वर्जित नहीं है।

विचार सरोकार : हर क्षेत्र में महिलाएं लहरा रही सफलता का परचम

उमा त्रिवेदी

​सदियों से भारतीय समाज में नारी को शक्ति, ममता और त्याग की प्रतिमूर्ति माना गया है। वह घर की धुरी थी, जिसने परिवार को संस्कार और स्नेह से सींचा। लेकिन आज की 'नवयुग की नारी' ने अपनी इस पारंपरिक भूमिका को एक नई, सशक्त और बहुआयामी पहचान दी है। वह केवल घर की लक्ष्मी नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाने वाली 'महाशक्ति' बन चुकी है, और इसीलिए यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि आज की नारी सब पर भारी है।


​यह 'भारी' होना किसी पर बोझ बनना नहीं, बल्कि अपने असाधारण सामर्थ्य, प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से हर चुनौती पर विजय पाना है। शिक्षा के क्षेत्र में, वह मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर है। कॉर्पोरेट जगत में वह सफलतापूर्वक बहुराष्ट्रीय कंपनियों का नेतृत्व कर रही है। राजनीति में, वह प्रभावी ढंग से देश का प्रतिनिधित्व कर रही है और विज्ञान, कला तथा खेल जैसे हर मैदान में वह नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। चाहे वह लड़ाकू विमान उड़ाना हो, अंतरिक्ष की यात्रा हो, या ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना हो, आज नारी ने यह सिद्ध कर दिया है कि कोई भी क्षेत्र उसके लिए वर्जित नहीं है।

अमिट छाप छोड़ता हर जगह

सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन यह है कि उसने रूढ़िवादिता की बेड़ियों को तोड़कर, अपने लिए एक समान अवसर का निर्माण किया है। वह आत्मविश्वास से भरी हुई है और अपने फैसलों की कमान खुद संभालती है। वह एक तरफ माँ, बेटी और पत्नी की भूमिका निभाती है, तो दूसरी तरफ एक पेशेवर, उद्यमी और समाज सुधारक की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाती है। वह एक साथ कई मोर्चों पर संघर्ष करती है और हर जगह अपनी अमिट छाप छोड़ती है।

शुभ संकेत यह वर्चस्व

​आज की नारी केवल पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर नहीं चल रही, बल्कि कई मायनों में उनसे आगे निकल गई है। उसका मानसिक और भावनात्मक बल उसे मुश्किल से मुश्किल परिस्थितियों में भी अटल रहने की शक्ति देता है। वह बदलाव की वाहक है, जो न केवल अपने जीवन को, बल्कि समाज की दिशा और दशा को भी सकारात्मक रूप से प्रभावित कर रही है। अर्थात हम कह सकते हैं कि आज की नारी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक सशक्त  विचारधारा है। स्वतंत्रता, साहस और शक्ति की विचारधारा। उसने अपनी योग्यता से यह सिद्ध कर दिया है कि वह किसी की मोहताज नहीं है, बल्कि स्वयं में एक संपूर्ण और अजेय शक्ति है। इसीलिए, उसका यह वर्चस्व (सब पर भारी होना) एक स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक और शुभ संकेत है।

उमा त्रिवेदी, लेखिका कर्नाटक बैंगलोर