धर्म संस्कृति : मोह माया के भंवर जाल से निकलने के लिए करें श्रीमद् भागवत गीता का पठन-पाठन
⚫ अंतरराष्ट्रीय वक्ता आचार्य सत्यव्रत शास्त्री ने कहा
⚫ हर परिस्थिति में रहे एक समान : आचार्य महिधर शास्त्री
⚫ श्रीमद् भागवत गीता की निकली रथ यात्रा
⚫ महापौर और भाजपा जिला अध्यक्ष ने किया श्रीमद् भागवत गीता का पूजन अर्चन
हरमुद्दा
रतलाम, 2 दिसंबर। मनुष्य ऐसा प्राणी है जो संसार के मोह माया में फंसता है। यही जीवन में विपत्ति और दुख का कारण भी बनते हैं। मोह माया के भंवर जाल से निकलने के लिए मनुष्य को श्रीमद् भागवत गीता का पठन-पाठन करना चाहिए। व्यक्ति अपने विवेक और सेवा से ही संसार में रहते हुए भी धर्म के पथ पर बढ़ सकता है।

यह विचार अंतरराष्ट्रीय वक्ता आचार्य सत्यव्रत शास्त्री ने व्यक्त किए। श्री राधाकृष्ण संस्कार परिषद एवं श्री सनातन गीता परिवार एवं भक्त मंडल के बैनर तले प्राचीन श्री हनुमान बाग परिसर में हुए आयोजन में आचार्य शास्त्री ने कहा कि यह बात भी सच है कि जीवन में काम, क्रोध, लोभ, मोह सब दुख के कारण है, मगर इन पर संयम रखते हुए सुख और मोक्ष प्राप्त कर सकता है।
मोक्ष के लिए भी करते रहे जतन : पुष्पोदभव शास्त्री
श्री राधा कृष्ण संस्कार परिषद के संस्थापक संयोजक पुष्पोदभव शास्त्री ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता में जीवन का यही बताया है कि संसार में रहते हुए अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें मगर अपने मोक्ष के लिए भी जतन करते रहें। मोक्षदा एकादशी का भी यही सार है। जब तक अपने से मोह माया दूर नहीं होगी, तब तक प्रभु का मार्ग संभव नहीं है।
हर परिस्थिति में रहना चाहिए एक समान : आचार्य महिधर शास्त्री

आचार्य महिधर शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने जीवन में हर परिस्थिति में एक समान होना चाहिए। चाहे कितनी भी संपत्ति क्यों ना आ जाए या फिर कितनी विपत्ति क्यों ना आ जाए। अक्सर यही देखा गया है की संपत्ति आने पर हाव-भाव और व्यवहार सब कुछ बदल जाता है और विपत्ति आने पर गिड़गिड़ाने लगते हैं। सुख में अपनों को भूल जाते हैं और दुख में उन्हें याद करते हैं। यह तरीका सही नहीं है। जिस तरीके से फूल सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक लाल सुर्ख रहता है। मनुष्य को भी अपने जीवन में एक समान रहना चाहिए।
श्रीमद् भागवत गीता की निकली रथ यात्रा


रथ यात्रा में शामिल श्रद्धालु
श्रीमद भगवत गीता की धूमधाम के साथ रथ यात्रा निकाली गई। श्रीमद् भागवत गीता को धर्मनिष्ठ सतीश राठौर ने शीश पर उठाकर लाए। आचार्य सत्यव्रत शास्त्री के साथ रथ में विराजित किया। एक रथ में आचार्य महिधर शास्त्री विराजित थे। विभिन्न मार्गो से निकली रथ यात्रा का दर्जनों स्थानों पर पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। गाजे बाजे के साथ रथ यात्रा श्री प्राचीन हनुमान बाग मंदिर परिसर पहुंची, जहां पर श्रीमद् भागवत गीता जयंती का 22 वा उत्सव शुरू हुआ। पंडित नंदकिशोर व्यास एवं हरीश चतुर्वेदी के आचार्यत्व में 21 भूदेवों द्वारा श्रीमद् भागवत गीता का पाठ शुरू किया। मुख्य यजमान रत्नोद्भव द्विवेदी दम्पत्ति थे।
महापौर ने किया श्रीमद् भागवत गीता का पूजन अर्चन

पूजन करते हुए महापौर

पूजन करते हुए श्री उपाध्याय
कार्यक्रम में महापौर प्रहलाद पटेल, भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, नगर निगम में एमआईसी मेंबर पार्षद विशाल शर्मा सहित अन्य ने श्रीमद् भागवत गीता ग्रंथ का पूजन अर्चन कर आचार्य सत्यव्रत शास्त्री से आशीर्वाद लिया।
आचार्य शास्त्री का किया अभिनंदन

अभिनंदन करते हुए भक्त मंडल
भक्त मंडल के मुकेश गांधी, मनोज शर्मा, सतीश राठौर, शांतू गवली, नारायण राठौड़ सहित अन्य ने शास्त्री जी का पगड़ी पहनाकर सम्मान किया। कार्यक्रम में डॉ. विनोद भट्ट एवं अशोक शर्मा ने भजन प्रस्तुत किए।

आरती करते हुए मुख्य यजमान द्विवेदी दमत्ति
आरती के पश्चात महाप्रसादी भंडारे का आयोजन किया गया। भक्तों ने बैठकर फलाहारी प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम का संचालन शरद वर्मा ने किया। श्री राधा कृष्ण संस्कार परिषद के डॉ. राजेंद्र शर्मा ने आभार माना।
Hemant Bhatt