धर्म संस्कृति : भक्ताम्बर मंत्र कलयुग का कल्पवृक्ष
⚫ डॉ. संयमलता जी म.सा. ने कहा
⚫ सुबह उठते ही सर्वप्रथम परमात्मा से वास्ता रखो : डॉ. कमलप्रज्ञा जी म.सा.
नीलेश बाफना
रतलाम, 17 जुलाई । भक्ताम्बर कलयुग का कल्पवृक्ष है। सुबह की प्रार्थना में भक्ताम्बर का पाठ किया जाता है। धार नगरी में राजा भोज के शाशनकाल में एक बहुत पँहुचे हुए आचार्य मानतुंगाचार्य, एक दिन बात बात में राजा को राजा के जैन मंत्री हर्षदेव ने राजा से कहा कि जैन सन्त बहुत पँहुचें हुए होते है, चमत्कारी होते है।

यह विचार दक्षिण चन्द्रिका जैन दिवाकरीय महासती डॉ संयमलता जी म सा ने जैन स्थानक नीमचौक पर आयोजित धर्मसभा मे व्यक्त किये ।

महासती डॉ संयमलता जी ने फरमाया की राजा भोज ने आचार्य मानतुंगाचार्य को राज्यसभा में ससम्मान बुलवाया और उनसे निवेदन किया की आप कोई चमत्कार दिखलाओ तब आचार्य ने कहा हम जैन सन्त चमत्कार नही दिखलाते है। राजा ने बहुत अनुरोध किया लेकिन आचार्य नही माने तो राजा क्रोधित हो गए और आचार्य को हाथ पैर जंजीर से बंधवा कर 52 कोठडियो में बन्द करवा दिया सभी कोठडियो पर ताले लगवा दिये। आचार्य ने कोठरी में प्रभु का स्मरण करते प्रथम तीर्थंकर दादा आदिनाथ की स्तुति करना प्रारम्भ की और उनकी महिमा में 1-1 श्लोक की रचना करते गए 1-1 श्लोक पर एक एक कोठरी का ताला टूटता गया और जब 52 श्लोक पूर्ण हुए तब आचार्य समस्त बंधनो से मुक्त होकर राजा भोज के सम्मुख उपस्थित हो गए। राजा भोज उनके चरणों में गिर पड़ा और जैन धर्मावलंबी बन गया। इन 52 श्लोक में से 04 श्लोक इतने प्रभावशाली थे कि उनका जाप करने से देवता सेवा में हाजिर हो जाते, लेकिन जब इन श्लोक का दुरुपयोग होने लगा तो देवताओं ने वो 04 श्लोक विलुप्त कर दिए।
कण कण में है परमात्मा
धर्मसभा की सम्बोधित करते हुए पूज्याश्री डॉ. कमलप्रज्ञा जी म.सा. ने फरमाया की हमारे जीवन में दिन आते है रात्रि आती है। दिन की शुरुआत कैसे करे और रात की समापन कैसे करे। सुबह उठते ही परमात्मा को धन्यवाद दो, परमात्मा कँहा है, कण कण में परमात्मा है, हमारे अंदर ही परमात्मा है। सुबह उठते ही जिस व्यक्ति का वास्ता नाश्ते से होता है उसका परमात्मा से क्या वास्ता। जब नींद से जागो तो सर्वप्रथम परमात्मा को याद करो, और फिर स्वंय का आंकलन करो, अपने पुण्य और पाप को आँखे बंद करके अंतर्मन से देखो की औरों की राह में शूल या काँटे तो नही बिछाए है।
सुबह उठते ही परमात्मा से पूछे
Why me : मैं ही क्यूँ, जब भी हमारे साथ कुछ अच्छा हो तो परमात्मा को पूछे धन्यवाद देवे की मैं ही क्यूँ, जबकि होता यह है जब भी हमारे साथ कुछ बुरा होता है तो हम परमात्मा से कहते है why me ।
For what : मुझे ही किसलिये : भगवान में मुझे ही नया दिन क्यों दिया । दुनिया में कितने ही ऐसे लोग है जो सुबह उठ नही पाते है।
Who is my : मेरा कौन है। जो पत्नि कहती है कि तेरे बिना खाऊं नही, पियूँ नही नही जियूँ नही वही पत्नि आपके मरने के बाद दहलीज के बाहर तक भी नही साथ देगी। मतलब इस संसार में कोई तेरा सगा नही है।
Where I will go : मैं कँहा जाने वाला हूँ। जैसे रतलाम शहर एक जंक्शन है यँहा से सभी और की ट्रेन मिलती है वैसे ही मानव के भव में प्राणी चारों गति में जा सकता है। नरक गति, तिर्यंच गति, मनुष्य गति और देव गति। जैसा आप दूसरों के साथ व्यवहार करोगे वैसी ही आपकी गति निश्चित है।
14 नवकार मंत्र गिरना चाहिए सुबह उठते ही
पूज्य महासतिया जी ने फरमाया की सुबह उठते ही 14 नवकार गिनना चाहिए, और मन में यह कामना करना चाहिए कि हमें भी परमात्मा की तरह 14वां गुणस्थान मिल जाए।।सुबह उठते ही मोबाइल दर्शन करने के पहले परमात्मा के दर्शन करना है। दोनों हथेलियों को खोल कर उभरे हुए हिस्से में चन्द्र दर्शन और उंगलियों के 12 - 12 पौर कुल 24 पौर के रूप में 24 तीर्थंकर के दर्शन करना चाहिए। उसके बाद पैरों को जमीन पर रखना चाहिए, लेकिन उसके बाद भी मोबाइल टीवी व अखबार मत देखना थोड़े समय के लिए प्रार्थना कर दिन की शुरुआत करना चाहिए । फिर रात्रि को सोते वक्त पुनः प्रभु को याद करना चाहिए अगर सुबह का सवेरा दिखाया तो बहुत-बहुत धन्यवाद और नहीं दिखाओ तो मेरा अंतिम प्रणाम स्वीकार करना । जब जीवन का अंत हो मेरे सामने एक संत हो मेरा होठों पर अरिहंत हो महावीर का पंथ हो। सोते वक्त यह प्रत्याखान करना चाहिए की आहार शरीर उपाधि पच्छखु पाप अठारह मरूँ तो वोसिरे वोसिरे जीऊँ तो आगार। और सोने के ठीक पहले 1 2 3 4 5 का फार्मूला अपनाना चाहिए । जँहा एक मतलब एक लोगग्स का ध्यान फिर दो नमुठ्ठान तीन वंदना चार शरणा (अरिहंत शरणम गच्छामि, सिद्धे शरणम गच्छामि, साहू शरणम गच्छामि, केवली प्ररूपित धम्मं शरणम गच्छामि ये चार शरण जगत में और न शरणा कोई होगा) और अंत में पांच नवकार। इतना करने के बाद अपने आप को परमात्मा के सुपुर्द कर दो और चैन की नींद में सो जाओ।
Hemant Bhatt