विचार सरोकार : धरती पर एक रहस्यमयी नाग लोक और "स्वर्ण मुकुटधारी साँप"
कहते हैं जहां धन होगा, वहां सर्प होगा। स्वर्ण में ऊष्मा होती है और सांप को ऊष्मा पसंद होती है। सर्प धन के साथ जुड़ा मिथक है। जहाँ धन का आधिक्य होगा, वहाँ समस्याएं भी अचानक आएगी। सर्प सरीसृप है यानी उसके चलने की आवाज नहीं आती और यही यकायक दुर्घटना और मुसीबत से जुड़ा सत्य है। सर्प और धन का बड़ा गहरा सम्बन्ध है।
⚫ त्रिभुवनेश भारद्वाज
स्वर्ण मुकुटधारी साँप ( Golden-crowned Snake): भारत के सोनभद्र और ऑस्ट्रेलिया में पाई जाने वाली एक वास्तविक प्रजाति है, जो अपने सुनहरे रंग और मुकुट जैसी पट्टी के कारण जानी जाती है। आस्ट्रेलिया में स्वर्ण खानों के पास भंडार है और सर्प स्वर्ण की अनुषांगिक नियति है। यह हल्का विषैला होता है और रात में सक्रिय रहता है।

कहते हैं जहां धन होगा, वहां सर्प होगा। स्वर्ण में ऊष्मा होती है और सांप को ऊष्मा पसंद होती है। सर्प धन के साथ जुड़ा मिथक है। जहाँ धन का आधिक्य होगा, वहाँ समस्याएं भी अचानक आएगी। सर्प सरीसृप है यानी उसके चलने की आवाज नहीं आती और यही यकायक दुर्घटना और मुसीबत से जुड़ा सत्य है। सर्प और धन का बड़ा गहरा सम्बन्ध है क्योंकि धन के अंदर लोभ समाहित होता है और लोभ तमाम मुश्किलों की जड़ है। धन में धर्म भी होता है किंतु पाप धन में सर्प ही होता है।
धन भी परिवर्तन का उन्नायक
हमारे भारत के सोनभद्र में सोने के भंडार हुआ करते थे और यहाँ सांपो की भी भरमार थी। भारत में सोनभद्र जैसे इलाकों में सोने के बड़े भंडार पाए गए हैं, और इनमें कई सांप स्वर्ण रंग के ही होने से "सोने में सांप" वाली लोककथाओं को बल मिलता है। धन भी परिवर्तन का उन्नायक है और सर्प भी।
रक्षा की कामना में पूज्य
भारतीय संस्कृति में सर्प भी पूज्य है लेकिन रक्षा की कामना से पूजा जाता है। भगवत गीता की पहली कथा तक्षक नाग से ही आती है। यदि नाग नहीं होता तो परीक्षित भी नहीं होता। सर्प को नवीनीकरण, शक्ति और ज्ञान का प्रतीक है। सोना धन, समृद्धि और दिव्यता से जुड़ा है, सर्प भी आध्यात्मिक्ता का प्रतीक है। धरती पर एक रहस्यमयी नाग लोक भी है। शास्त्र के अनुसार भगवान विष्णु नाग शैया पर सोते हैं। कुंडलिनी को सर्प ही कहा गया है। भगवान शिव गले मे सर्प धारण करते हैं। हमारे अघोर साधना विधान में डरावनी नाग साधना का भी उल्लेख आता है।
तय करना जरूरी पर्याप्त की सीमा
संक्षेप में धन का अधिक विस्तार धर्म को क्षीण और मनोभावना को दूषित कर काम, क्रोध, मद, लोभ और मोह से भरता है और यही अधर्म की आधारशिला कही जाती है। इसलिए काल सर्प से बचने के लिए सभी को "पर्याप्त" की सीमा तय करना चाहिए। एक कहावत है चूहा हाथी की खुराक में जमीन आसमान का अंतर है यदि चूहा हाथी की खुराक का लोभ करेगा तो मर जाएगा।

⚫ त्रिभुवनेश भारद्वाज
Hemant Bhatt