श्री गणेश चतुर्थी पर विशेष : तपस्वी मुद्रा की 368 वर्ष पुरानी चमत्कृत प्रतिमा है श्री उकाला गणेश
यहां ऐतिहासिक तीन कुंडों का निर्माण किया गया जिसमें एक में चूना और कीमती खनिजों से लगभग 53 डिग्री पर पानी उकलता और दूसरे कुंड में गिरता था, जो तीसरे कुंड में जाकर उस दौरान निर्मित संगमरमर की नालियों से छन कर राज महल तक जाता था, जो बेहद स्वास्थ्यवर्धक और शुद्ध पेयजल राज परिवार को मिलता था। इसलिए उकलते पानी से पग पथारते श्री गणेश ऊकाला गणेश कहलाए।
⚫ प्रदीपसिंह राव, वरिष्ठ इतिहासकार
रतलाम एक ज़माने में सिर्फ एक छोटा सा सूबा, परगना, झोपड़ियों का गांव था। लगभग 400 वर्ष पहले। लेकिन 1648 में 16, परगनों की रतनपुरी का, योद्धा रत्नसिंह को राजा बनाया गया तो उन्होंने अपने महज 10 वर्ष के कार्यकाल में रतलाम को कई सौगातें दे दी। उसी समय में 368 वर्ष पूर्व 1657 के आसपास श्री उकाला गणेश की ब्रह्मचारी मुद्रा की 12 फीट की खड़े भगवान की मूर्ति स्थापित की गई थी। जो कालांतर में विशाल तीर्थ और सिद्धि साधना का पवित्र स्थान बनता गया।

राजा का यह राज पथ था, जो हाथी खाना के पूर्व मुखी सूरजपोल दरवाजे तक जाता था। रतलाम राज्य का यही पहला मुख्य प्रवेश द्वार था। जब राजा रतनसिंह जी के कार्यकाल में इस जगह खुदाई हुई तो बेसाल्ट और चूने के पत्थरों के पानी की आंव निकली, जैसी केदारनाथ के गौरी कुंड में है। यह खनिज युक्त शुद्ध जल उस समय की अनुपम उपलब्धि थी।


यहां ऐतिहासिक तीन कुंडों का निर्माण किया गया जिसमें एक में चूना और कीमती खनिजों से लगभग 53 डिग्री पर पानी उकलता और दूसरे कुंड में गिरता था, जो तीसरे कुंड में जाकर उस दौरान निर्मित संगमरमर की नालियों से छन कर राज महल तक जाता था, जो बेहद स्वास्थ्यवर्धक और शुद्ध पेयजल राज परिवार को मिलता था। इसलिए उकलते पानी से पग पथारते श्री गणेश ऊकाला गणेश कहलाए। हर शुभ कार्य के लिए, युद्ध में जीत के लिए इन्हीं प्राचीन गणेश जी का आशीर्वाद रतलाम के राजाओं को मिलता रहा।
तपस्वी मुद्रा में ऐसी प्रतिमा दुर्लभ

तपस्वी मुद्रा में खड़े गणेश की ऐसी प्रतिमा दुर्लभ होती है। इसीलिए इनके दर्शन मात्र से मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।आज भी इस क्षेत्र में जल कुंडों और धार्मिक परिसर के रख-रखाव की कमी है। संपूर्ण क्षेत्र को धार्मिक पर्यटक स्थल का रूप दे कर रतलाम को इंदौर महू मार्ग से जोड़ने का वैकल्पिक प्रयास करना चाहिए। इन दिनों पक्के मार्ग से उकाला की दशा बहुत सुधरी है। मंगल कार्यों के लिए आज भी श्री उकाला गणेश को नगरवासी प्रथम निमंत्रण देते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर चोला चढ़ाते हैं। आपकी साधना, साधक श्री उकाला गणेश के चरणों में अवश्य पूर्ण होगी। लगभग चार सदियों पुरानी श्री गणेश की खड़ी प्रतिमा मालवा में कहीं भी न मिलेगी। इंदौर के प्रसिद्ध बड़े गणेश,चिंतामन उज्जैन के गणेश से भी पुरानी ऐतिहासिक प्रतिमा है श्री उकाला गणेश जी।

Hemant Bhatt