सामाजिक सरोकार : सर्वपितृ अमावस्या पर निशुल्क सामूहिक श्राद्धकर्म 21 सितम्बर को
⚫ सर्किल जेल में बंदीजन दो दिनी करेंगे तर्पण
⚫ तैयारी को लेकर हुई बैठक
हरमुद्दा
रतलाम, 7 सितम्बर। सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर निशुल्क सामूहिक श्राद्धकर्म 21 सितम्बर को संतश्री वाटिका चंपा विहार सागोद रोड पर रखा गया है। इसके पूर्व सर्किल जेल में बंदीजन भी अपने पूर्वजों का दो दिनी श्राद्धकर्म करेंगे। इस बार नागरिकों को ऑनलाइन श्राद्धकर्म की भी सुविधा दी जाएगी।
इस भव्य आयोजन की तैयारियो को लेकर आयोजक श्री योग वेदांत सेवा समिति, युवा सेवा संघ, महिला उत्थान मंडल एवं मांगल्य मन्दिर धर्म क्षेत्र रतलाम की बैठक रखी गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस वर्ष भी यह सामूहिक श्राद्धकर्म पूर्णतः निःशुल्क रहेगा। श्राद्धकर्म की आवश्यक सामग्री निःशुल्क उपलब्ध रहेगी। इसके लिए प्री रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। QR कोड स्कैन कर अथवा समिति के नंबरों पर कॉल कर या शहर विभिन्न क्षेत्रों में रजिस्ट्रेशन केंद्र बनाए जाएंगे।

घर घर निमंत्रण देंगे
विद्वान एवं संयमी ब्राह्मणों के मार्गदर्शन में कार्यक्रम 21 सितम्बर रविवार सुबह 9:00 बजे से संतश्री वाटिका, चम्पा विहार सागोद रोड पर आरंभ होगा। सभी श्राद्धकर्ताओ के लिए भोजन प्रसादी की व्यवस्था भी रहेगी। निशुल्क सामूहिक श्राद्धकर्म में शामिल होने के लिए संघ के कार्यकर्ता घर घर निमंत्रण देने जाएंगे। किसी कारणवश कार्यक्रम में ना आने वाले ऑनलाइन माध्यम से भी श्राद्ध कर्म कर सकेंगे। साथ ही YSS Ratlam के यूट्यूब चैनल पर होगा सीधा प्रसारण भी किया जाएगा। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस बार सर्किल जेल रतलाम में दो दिनी सामूहिक श्राद्धकर्म जेल प्रबंधन की अनुमति से किया जाएगा ताकि सभी बंदीजन अपने अपने दिवंगत परिजनों का श्राद्ध कर सके।
सामाजिक समरसता बढ़ेगी
बैठक में सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर सामूहिक श्राद्धकर्म की महिमा बतलाते हुए जगन्नाथ पूरी (उड़ीसा) के पं. शारदा प्रसाद मिश्रा ने बताया कि हिन्दू धर्म में श्राद्धकर्म एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण अनुष्ठान है, जो पितरों की आत्मा की शांति, तृप्ति और मोक्ष के लिए किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि सामूहिक श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को व्यक्तिगत श्राद्ध से कई गुना अधिक पुण्य प्राप्त होता है। पितृगण प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं, जिससे वंश में सुख, समृद्धि और उन्नति होती है। सामूहिक श्राद्ध सामाजिक समरसता और धर्म के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देता है। यह लोगों को उनके कर्तव्यों की याद दिलाता है और एक सकारात्मक आध्यात्मिक वातावरण का निर्माण करता है। इसलिए नागरिकों को इस आयोजन में अवश्य शामिल होना चाहिए।
Hemant Bhatt