धर्म संस्कृति : समग्र विश्व की सृजनकर्ता है मांँ

धर्म संस्कृति : समग्र विश्व की सृजनकर्ता है मांँ

डॉ. शरद जोशी ने कहा

ओरो आश्रम में चल रहे शिविर का दूसरा दिन

हरमुद्दा
रतलाम, 6 दिसंबर। माँ समग्र विश्व का सृजन करती है और सारे सृजन को परमात्मा से जोड़ने का कार्य भी मांँ ही करती है। मांँ परम प्रभु की आत्मशक्ति है।

श्रीअरविन्द मार्ग स्थित ओरो आश्रम में चल रहे पांँच दिवसीय स्वाध्याय, साधना, सत्संग, समागम शिविर में वडोदरा से आए वरिष्ठ साधक डॉ. शरद जोशी ने यह विचार व्यक्त किए। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि श्रीअरविन्द के योग में मानव समाज की उन्नति समाहित है। हमारा मन, प्राण और शरीर अतिमानस शक्ति के प्रति खुलना चाहिए। शरणागति ही शुरुआत है।

अपने भीतर झांके

डॉ. जोशी ने कहा कि हमें अपने भीतर झांकने की आवश्यकता है। हमारे निम्न प्राण में जो अशुद्धियां है, उन्हें माताजी को सौंप कर प्रार्थना करनी चाहिए कि वे उन सभी अशुद्धियों को ठीक कर दें। हमें पूरी पवित्रता से मांँ को पुकारना चाहिए। श्रद्धा ही हमें आगे ले जाती है। प्रारम्भ में धार से आई रेखा व्यास ने सुंदर स्तुति सुनाई।