साहित्य सरोकार : आशीष दशोत्तर के नवीन संग्रह ' तुतलाती आवाज़ ' का हुआ विमोचन

साहित्य सरोकार : आशीष दशोत्तर के नवीन संग्रह ' तुतलाती आवाज़ ' का हुआ विमोचन

बच्चों पर केन्द्रित सात सौ दोहे लिखना प्रेरक

हरमुद्दा
रतलाम, 12 जनवरी। रचनाकार का बचपन की स्मृतियों को शब्दों में ढालना उसकी रचनात्मक ईमानदारी और जीवन के प्रति अनुराग को व्यक्त करता है। आशीष दशोत्तर ने बच्चों पर केन्द्रित पुस्तक का लेखन कर अपने रचनात्मक दायित्व को निभाया है। यह सराहनीय भी है और प्रेरक भी।


उक्त विचार युवा रचनाकार आशीष दशोत्तर की नई पुस्तक ' तुतलाती आवाज़ ' के विमोचन अवसर पर वरिष्ठ कवि, अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए। जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बच्चों पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन नन्हें बच्चों कपिल और रोशनी डामर ने किया।

गुम होते जा रहे बचपन को बचाने की पहल

प्रो. चौहान ने कहा कि बच्चों पर केन्द्रित सात सौ दोहे लिखना उनकी बच्चों के प्रति जागरूकता और जीवन से गुम होते जा रहे बचपन को बचाने की पहल है। आज का बचपन तकनीक के क़रीब आ गया है लेकिन अपनों से दूर हो गया है। ऐसे में आशीष का यह कार्य शहर की रचनाधर्मिता में सकारात्मक प्रयोग की तरह अंकित हो गया है। जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष रणजीत सिंह राठौर ने कहा कि निरन्तर सृजन व्यक्ति को परिमार्जित करता है। आशीष भाई की यह सृजन प्रक्रिया उनकी निरन्तरता को दर्शाती है।

शहर के वरिष्ठजनों के स्नेह से निरंतर बढ़ रही मेरी रचना प्रक्रिया

रचनाकार आशीष दशोत्तर ने कहा कि मेरी रचना प्रक्रिया शहर के वरिष्ठजनों के स्नेह से ही निरंतर आगे बढ़ रही है। यह दोहा संग्रह इंक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित है। इसे नई दिल्ली में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में भी इस वर्ष प्रकाशित पुस्तक की श्रेणी में प्रदर्शित किया गया है। इसमें बचपन के विभिन्न दृश्यों को दोहों के माध्यम से व्यक्त किया गया है। एक ही विषय पर तकरीबन सात सौ दोहे लिखने का प्रयास साहित्यजनों को पसंद आएगा ऐसा विश्वास है।

इनकी मौजूदगी रही

उल्लेखनीय है कि यह आशीष दशोत्तर की 26 वीं पुस्तक है। आयोजन में  वरिष्ठ हास्य कवि जुझार सिंह भाटी, आई.एल.पुरोहित, डॉ.  एन.के.शाह,रवि गेहलोत, मांगीलाल नगावत, कीर्ति शर्मा, विनोद झालानी, सुभाष यादव, चरणसिंह जाधव, गीता राठौर, आशा श्रीवास्तव, रचना चंद्रावत, सपना ठाकुर, मुन्नीबेन, अनीस ख़ान, पंकज व्यास सहित सुधिजन मौजूद थे।