150वीं वर्षगांठ पर सृजन : वंदे मातरम, केवल नारा नहीं, भक्ति है, आस्था है, समर्पण है देश के लिए
⚫ दीपा शर्मा "उजाला"
वंदे मातरम
केवल नारा नहीं
भक्ति है
आस्था है
समर्पण है
देश के लिए
वंदे मातरम

केवल शब्द नहीं
यह भाव है
लगाव है
जोश है
जो सीमांत जवानों को
नई ऊर्जा से भर देता है
वंदे मातरम
कश्मीर से कन्याकुमारी तक
कच्छ से अरुणाचल तक
भारत की माटी
की पवित्रता है
वंदे मातरम
एक वाक्य नहीं
यह वह हथियार है
आजादी की लड़ाई में
जो सौ सौ तोपो
पर भारी था
वंदे मातरम
हर भारतीय की रगों में
बहने वाला लहु है
अपनी माटी से
जुड़ाव की कहानी है
वंदे मातरम
मुंह से निकला कोई
बोल नहीं है
हमारा व्यक्तित्व है
स्वाभिमान है
हमारे प्राण है
हमारी जान है
वंदे मातरम

⚫ दीपा शर्मा "उजाला", फरीदाबाद
Hemant Bhatt