धर्म संस्कृति : कलियुग में तीन-चार घंटे बैठकर कथा श्रवण करना भी किसी तपस्या से कम नहीं
⚫ अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के दासानुदास श्री श्यामसखा दास ने कहा
⚫ प्रख्यात चिंतक, साहित्यकार, गीता मनीषी प्रो. अजहर हाशमी की स्मृति में श्रीराम मंदिर पर हुई श्रीमदभागवतम् कथा
⚫ विश्राम संध्या पर सभी भक्तों को भेंट की गई श्रील प्रभुपाद की टीका वाली श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप ग्रन्थ
हरमुद्दा
रतलाम, 16 अगस्त। अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के दासानुदास श्री श्यामसखा दास ने श्रद्धालुओं से कहा कि श्रीमदभागवत का एकनिष्ठ होकर और एकाग्र मन से श्रवण करने से जिस प्रकार परीक्षित महाराज को मुक्ति प्राप्त होकर श्रीकृष्ण प्रेम प्राप्त हुआ था। परीक्षित महाराज मात्र श्रवण करके मुक्त हो गए। श्री शुकदेव गोस्वामी मात्र कथा का कीर्तन करके मुक्त हो गए। इस कलियुग में तीन-चार घंटे बैठकर कथा श्रवण करना भी किसी तपस्या से कम नहीं है।

प्रख्यात चिंतक, साहित्यकार, गीता मनीषी प्रो. अजहर हाशमी की स्मृति में श्रीराम मंदिर पर श्रीमदभागवतम् कथा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की सूत्रधार एवं आयोजक नंदिनी सक्सेना ने बताया कि प्रो. हाशमी संत परम्परा के वाहक एवं भारतीय संस्कृति के अध्येता, ओजस्वी वक्ता, प्रखर लेखक, साहित्यकार एवं प्रवचनकार थे। वे श्रीमद्भगवद्गीता में विशेष रूचि रखते थे। इसलिए उनके स्मरण में यह आयोजन किया गया। विश्राम श्रीमद्भगवद्गीता मूल 700 श्लोक पाठ से हुआ। ब्रह्म-मध्व-गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के दासानुदास श्यामसखा दास द्वारा श्रीमदभागवतम् कथा पर सरल हिंदी भाषा में संस्कृत श्लोकों के साथ व्याख्यान किया गया।
कलियुग दोषों का महासागर लेकिन श्री कृष्ण का नाम तारणहार
कथाकार श्यामसखा दास ने कहा श्रीमद्भागवतम् में बताया गया है कि ये कलियुग दोषों का सागर है। लेकिन इसमें एक महान गुण है कि मात्र श्रीकृष्ण के नाम का कीर्तन करने से ही जीवात्मा मुक्त होकर भगवान के चरण कमलों में स्थित हो सकता है। श्रीमद्भगवदगीता में। श्रीकृष्ण ने गीता के श्लोक 10.10 में कहा है कि उनको प्रेमपूर्वक सतत भजने से उस भक्त के हृदय में भगवान ऐसी बुद्धि देते है जिससे भक्त भगवान तक पहुंच सकता है। श्रील प्रभुपाद कहते हैं कि इस भौतिक जीवन में हम सभी अपने पापों के कारण कष्ट भोग रहे है और उन पापों से मुक्ति मात्र गीता के श्लोक 18.66 के अनुसार श्रीकृष्ण अकेले की शरण ग्रहण करके ही हो सकती है।
सही उत्तर देने वालों भक्तों को दिए पुरस्कार
प्रतिदिन कथा के अंत में उपस्थित भक्तों से कथा पर आधारित प्रश्नोत्तरी में सही उत्तर देने वाले भक्तों को पुरस्कार स्वरूप श्रील प्रभुपाद लिखित आध्यात्मिक पुस्तक पुरस्कार स्वरूप दी गई।

समापन अवसर पर सभी भक्तों को भेंट की गई पुस्तक
श्रीमदभागवतम् कथा के समापन दिवस पर उपस्थित समस्त भक्तों को श्रील प्रभुपाद की टीका वाली श्रीमद्भगवद्गीता यथारूप ग्रन्थ वितरित किया गया। सबसे निवेदन किया गया कि जिस प्रकार प्रसाद को ग्रहण करके भगवान की प्रसाद सेवा की जाती है। उसी प्रकार धर्मग्रंथ की नियमित रूप से पढ़कर उसकी सेवा की जाती है।

विद्यार्थी परिवार के श्री त्रिपाठी विचार व्यक्त करते हुए
इस्कॉन मंदिर में होता है प्रतिदिन एक श्लोक का व्याख्यान
श्रीमदभागवतम् में ही कहा गया है कि नित्यं भागवतसेवया अर्थात प्रतिदिन नियमित रूप से भागवत श्रवण/पठन करना चाहिए। इसीलिए इस्कॉन के मंदिरों में प्रतिदिन श्रीमदभागवतम् के एक श्लोक पर व्याख्यान किया जाता है।
यह थे उपस्थित

कार्यक्रम में विद्यार्थी परिवार के संयोजक सतीश त्रिपाठी, डॉ. अनीला कंवर, डॉ. प्रवीणा दवेसर, डॉ. अंजना श्रीवास्तव, श्वेता नागर, नंदिनी सक्सेना, श्याम राव, पूनम राठौर, आरती मालवीय, अंबिका मिश्रा, लक्ष्मण सोनी, प्रवीण गिरी गोस्वामी, अनुराग सिंह सिसोदिया आदि उपस्थित रहे। संचालन श्वेता नागर ने किया। आभार डॉ. प्रवीणा दवेसर ने माना।
Hemant Bhatt