धर्म संस्कृति : खुद का अनुशासन स्वयं पर बनाना ही स्वतंत्रता
⚫ साध्वी श्री शाश्वतप्रियाश्रीजी म.सा. ने कहा
हरमुद्दा
रतलाम,17 जुलाई । स्त्री, पुरुष एक समान, जितना हक दर्जा पुरुष को मिले, उतना दर्जा स्त्री को भी मिले। जिनशासन को सैल्यूट करो। इसमें जितना हक, दर्जा श्रावक को दिया है, उतना ही श्राविका को भी दिया है। जिनशासन में नारी को जो स्वतंत्रता मिली है, वह अन्य कही नहीं मिली।

यह बात साध्वी श्री शाश्वतप्रियाश्रीजी म.सा.ने कही | नीम वाला उपाश्रय में चातुर्मासिक प्रवचन में उन्होंने कहा कि जिनशासन ने नारी शक्ति को कहीं नहीं दबाया है, अपितु सदैव बाहर लाने का प्रयास किया है। नारी शक्ति जिनशासन के लिए संतान तैयार करती है, जो उसके लिए बड़ा चैलेंज है। जमीन के अंदर अच्छा बीज दबा रहता है, तो ही वह अच्छी फसल कर पाता है। इसलिए नारी जगत यदि घर के अंदर रहे तो वह जिनशासन के लिए अच्छे से अच्छे संतान तैयार कर सकती है। इसमें नारी जगत की गरिमा है, उन्हें स्वतंत्रता मिली है , तो उसने खुद का अनुशासन स्वयं पर बनाना ही सफलता है।
जीवन का दर्जे रखें ऊंचा
साध्वी जी ने कहा कि मनुष्य जीवन ऐसे गवाने जैसा नहीं है। जीवन को यूं ही हारे नहीं अपितु उसका दर्जा हमेशा ऊंचा रखना।धर्म l रक्षा करता है। इस जीवन में आस्था और श्रद्धा को बनाए रखना।व्यक्ति जब भी प्रिय लगने लगता है, तब उसके सारे वचन प्रिय लगने लगते हैं। हम घर पर रोचक कहानी तो शेयर करते हैं लेकिन क्या यहां सुना गया प्रवचन भी करते हैं? 1 घंटे का प्रवचन 23 घंटे तक दिल दिमाग में चलता है, तो ही वो प्रवचन प्रसाद माना जाता है। साध्वी जी ने कहा कि सद्गुरु जो श्रवण कराते हैं, वह यथा सत्य है। इसमें मिथ्या भाव नहीं है। वचन का और जीवा का दुरुपयोग ऐसे भव में लाकर फेंकता है, जहां कोई शक्ति नहीं मिलती है।प्रवचन में बड़ी संख्या में धर्मालुजन मौजूद रहे।
Hemant Bhatt