फैसला : बी एन गोल्ड लिमिटेड के डायरेक्टर सचिन को निवेशकों का रुपए हड़पने पर 7 वर्ष के कारावास की सजा 

फैसला : बी एन गोल्ड लिमिटेड के डायरेक्टर सचिन को निवेशकों का रुपए हड़पने पर 7 वर्ष के कारावास की सजा 

15,000 रुपए का जुर्माना

⚫ मामला 2016 का

⚫ निवेशकों को दिया था लालच रुपए डेढ़ गुना होने का

हरमुद्दा
रतलाम, 17 जुलाई। बी गोल्ड के डायरेक्टर ने रतलाम में शाखा खोली अधिकारी और कर्मचारियों ने लोगों से निवेदिता राशि ली और उन्हें कहा गया कि 5 साल में डेढ़ गुना राशि मिलेगी इस लालच में लोगों ने रुपए जमा करवाएं। जब निवेशक राशि लेने गए तो पहले राशि देने में टालम टोली किया। शाखा बंद कर बाद में भाग गए। इस प्रकरण में न्यायाधीश ने बीएन गोल्ड कंपनी के डायरेक्टर को 7 साल की सजा सुनाते हुए 15 हजार रुपए जुर्माना लगाया है।

अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान

अतिरिक्त लोक अभियोजक संजीव सिंह चौहान ने हरमुद्दा को बताया कि 28 अगस्त 2016 को फरियादी कृष्ण दास द्वारा थाना दीनदयाल नगर में उक्त आशय का लिखित आवेदन दिया गया था। आवेदन में बताया था कि बी एन गोल्ड लिमिटेड के कर्मचारी एवं अधिकारियों ने रतलाम में कंपनी की शाखा खोलकर आम लोगों को रुपए जमा करने पर 5 वर्ष पश्चात निवेशित राशि डेढ़ गुना हो जाने का लालच देकर पॉलिसीयां दी गई। हर माह  निवेशकों एवं ग्राहकों से कंपनी में रुपए जमा कराए गए परंतु 5 वर्ष पश्चात परिपक्वता अवधि पूर्ण हो जाने के पश्चात जब बी.एन. गोल्ड लिमिटेड की शाखा में पैसा लेने के लिए पहुंचे, तो कंपनी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा परिपक्वता राशि देने में टाल मटोल की। बाद में कंपनी की शाखा बंद कर भाग गए।

पांच के विरुद्ध हुआ प्रकरण दर्ज

पॉलिसी धारकों के साथ धोखाधड़ी व ठगी की गई। फरियादी के उक्त आवेदन पर कंपनी के अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध पुलिस थाना दीनदयाल नगर में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई जिसमें विवेचना के उपरांत आरोपी हीरालाल वैष्णव, सचिन डामोर, संदीप सराफी, आशीष गुप्ता और 5 के विरुद्ध अभियोग पत्र धारा 420, 467 120 बी 34 भादवी तथा 3 /4 इनामी चिट और धन परिचालन स्कीम अधिनियम के अंतर्गत प्रस्तुत किया गया था। अन्य आरोपी गुरविंदर एवं मनीष के संबंध में धारा 173( 8 )के अंतर्गत विवेचना जारी रखते हुए अभियोग पत्र प्रस्तुत किया गया।

डायरेक्टर सचिन को सुनाई सजा

प्रकरण का विचारण द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के न्यायालय में किया गया। अभियोजन द्वारा निवेशकों के साक्ष्य, उनके दस्तावेज तथा अन्य साक्षी के कथन न्यायालय में प्रस्तुत किए गए जिन पर न्यायालय द्वारा आरोपी सचिन डामर को कंपनी का डायरेक्टर मानते हुए उसके द्वारा निवेशकों से प्रवंचना कर राशि प्राप्त की। परिपक्वता अवधि के पश्चात निवेशकों को नहीं लौटना पाया गया। इस प्रकार आरोपी सचिन डामोर द्वारा निवेशकों से बेईमानी पूर्ण आशय से सदोष अभिलाभ प्राप्त करने एवं पॉलिसी की समयावधि पूर्ण होने के पश्चात उनके द्वारा जमा की गई धनराशि निवेशकों वापस नहीं की। बी. एन. गोल्ड लिमिटेड कंपनी का डायरेक्टर होते हुए कंपनी के कारोबार के संप्रवर्तन में इनामी चिट अथवा धन परिचालन स्कीम का अवैध कारोबार करते हुए उसमें सक्रिय भाग लेकर योगदान दिया जाना प्रमाणित हुआ है जिस पर द्वितीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश द्वारा आरोपी सचिन डामर को धारा 420 भादवी में 7 वर्ष का सश्रम कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना तथा 3/4 इनामी चिट एवं धन परिचालन स्कीम के अंतर्गत 3 वर्ष का कारावास एवं ₹5,000 के अर्थदंड से दंडित किया है। 

पर्याप्त साक्ष से नहीं होने पर चार दोष मुक्त

प्रकरण के अन्य आरोपी हीरालाल, मनिंदर, आशीष तथा संदीप को न्यायालय द्वारा पर्याप्त साक्ष्य ना होने के कारण दोष मुक्त किया। प्रकरण में अभियोजन की ओर से पैरवी संजीव सिंह चौहान अतिरिक्त लोक अभियोजन द्वारा की गई।