छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड: नियामकों की लापरवाही और डॉक्टर पर कार्रवाई का सवाल
दवा कंपनी के मालिक को हिरासत में लिया जाए, और लाइसेंस अथॉरिटी व ड्रग इंस्पेक्टर्स पर भी कार्रवाई हो। यह इसलिए जरूरी है कि डॉक्टर को सजा दी गई है, लेकिन सच्ची जिम्मेदारी नियामकों की है।
⚫ ब्रजेश कुमार त्रिवेदी
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में दूषित कोल्ड्रिफ कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। इस घटना ने न केवल स्वास्थ्य प्रणाली की कमियों को उजागर किया है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा किया है कि क्या डॉक्टर को ही दोषी ठहराना सही है, जबकि असली जिम्मेदारी दवा निर्माताओं और नियामक संस्थाओं की है। इस मामले में डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार और निलंबित कर दिया गया है, लेकिन दवा कंपनी और नियामकों पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जो हैरान करने वाली बात है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिस्टम की गहरी विफलता है, और अब कड़े कदम उठाने की जरूरत है।

पिछले महीने से छिंदवाड़ा में बच्चों में अचानक किडनी फेल्योर के मामले बढ़े, जिनकी जांच में पता चला कि कोल्ड्रिफ सिरप में डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) नामक जहरीला पदार्थ 48.6% तक मिला था। यह सिरप तमिलनाडु की श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स द्वारा बनाया गया था, जो मध्य प्रदेश में बिक्री के लिए पहुंचा। राज्य सरकार ने तुरंत सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया और कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया, लेकिन कंपनी के मालिक या प्रबंधन को अभी तक हिरासत में नहीं लिया गया।
तो उठाता है सवाल
डॉक्टर सोनी पर आरोप है कि उन्होंने सबसे ज्यादा प्रभावित बच्चों को यह सिरप प्रिस्क्राइब किया, जिसके लिए उन्हें भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 और 276 के तहत गिरफ्तार किया गया और स्वास्थ्य विभाग ने निलंबित कर दिया। लेकिन सवाल उठता है कि क्या डॉक्टर दवा की आंतरिक गुणवत्ता जांच कर सकता था? यह जिम्मेदारी दवा नियामकों की है, जो लाइसेंस देते हैं और गुणवत्ता सुनिश्चित करते हैं।
दवा कंपनी और नियमों की निगरानी
जब कोई दवा कंपनी बनती है या नई दवा बनाई जाती है, तो उस पर सख्त नियम लागू होते हैं, जो ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 और इसके नियमों (1945) में दिए गए हैं। इन नियमों की निगरानी
संस्थाएं करती हैं देखरेख
सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ)
यह केंद्र सरकार के अधीन शीर्ष नियामक है। सीडीएससीओ नई दवाओं के लाइसेंस, गुणवत्ता मानक निर्धारण और क्लिनिकल ट्रायल्स की मंजूरी देता है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) इसकी देखरेख करते हैं।
राज्य ड्रग कंट्रोल अथॉरिटी
हर राज्य में ड्रग कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन होता है। श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स का लाइसेंस तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल एडमिनिस्ट्रेशन ने दिया होगा। यह अथॉरिटी फैक्ट्री का निरीक्षण, लाइसेंस जारी करना और नियमित ऑडिट करवाती है।
ड्रग इंस्पेक्टर्स
ये राज्य और केंद्र सरकार के अधीन काम करते हैं। वे दवा निर्माण इकाइयों का दौरा करते हैं, सैंपल लेते हैं और जांच के लिए भेजते हैं। इस मामले में सैंपल जांच में डीईजी की पुष्टि हुई।
कहां हुई चूक?
श्री सन को लाइसेंस तमिलनाडु अथॉरिटी ने दिया था, जिसमें प्रारंभिक जांच और सैंपल टेस्टिंग शामिल होती है। लेकिन मिलावट का पता पोस्ट-इंसिडेंट जांच में चला, जो दर्शाता है कि न तो प्रारंभिक मंजूरी में और न ही नियमित ऑडिट में सही निगरानी हुई। ड्रग इंस्पेक्टर्स ने समय पर सैंपल नहीं लिए या जांच में लापरवाही बरती, और लाइसेंस अथॉरिटी ने इसकी अनदेखी की। यह सिस्टमिक विफलता है, जिसकी जिम्मेदारी इन नियामकों पर है।
जांच और पारदर्शिता की कमी
सिरप के नमूने ड्रग इंस्पेक्टर्स द्वारा लिए गए और लैब टेस्ट में डीईजी की पुष्टि हुई। ये रिपोर्ट सीडीएससीओ और राज्य अथॉरिटी को भेजी जाती हैं, लेकिन इन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? विशेषज्ञों का कहना है कि नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (एनएसक्यू) लिस्ट सीडीएससीओ वेबसाइट पर आती है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट्स छिपाई जाती हैं, जो पारदर्शिता की कमी दिखाती है।
जांच समिति और कार्रवाई
चिकित्सा समुदाय और जनता की मांग है कि राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल को पत्र लिखे और पांच चिकित्सकों व एक रिटायर्ड जज की समिति बनाकर जांच करे। इसके अलावा, दवा कंपनी के मालिक को हिरासत में लिया जाए, और लाइसेंस अथॉरिटी व ड्रग इंस्पेक्टर्स पर भी कार्रवाई हो। यह इसलिए जरूरी है कि डॉक्टर को सजा दी गई है, लेकिन सच्ची जिम्मेदारी नियामकों की है।
सुधार की जरूरत सिस्टम में
यह घटना 2022 के गाम्बिया कांड की याद दिलाती है, जहां भारतीय दवाओं से 90 से ज्यादा मौतें हुई थीं। अगर नियामकों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई होती, तो यह हादसा टल सकता था। सरकार से मांग है कि सभी दोषियों पर तुरंत कार्रवाई हो और सिस्टम में सुधार लाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी न हो।
Hemant Bhatt