ऐसी विदाई : हर कोई भावविह्वल, नेत्र सजल, रुंधे हुए गले

ऐसी विदाई : हर कोई भावविह्वल, नेत्र सजल, रुंधे हुए गले

चिंतक और कर्मचारी नेता त्रिभुवनेश भारद्वाज की हुई सेवानिवृत्ति

⚫ हर पल कमी होगी महसूस :  अनीता सागर

⚫ संघर्ष से बढ़ते हैं उत्कर्ष की ओर : त्रिभुवनेश भारद्वाज

हरमुद्दा
रतलाम, 30 नवंबर। हर कोई भावविह्वल, नेत्र सजल, रुंधे हुए गले। ऐसा लग रहा था मानो शरीर का कोई अंग जुदा हो रहा है। बोलना तो बहुत कुछ चाह रहे थे, मगर गले भर आए। अश्रु धारा बह निकली सुनने वालों की और सुनाने वालों की। लाख छुपाने के बाद भी आंखें हर किसी की सजल हो गई। हाथों में हार फूल थे, मगर दिल में विदाई के शूल का दर्द भी था। 

ऐसा दृश्य बना जिला शिक्षा कार्यालय में। अवसर था चिंतक एवं कर्मचारी नेता त्रिभुवनेश भारद्वाज की विदाई का। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में सहायक ग्रेड एक त्रिभुनवेश भारद्वाज 36 साल की शासकीय सेवा का सफलतापूर्वक निर्वहन करते सेवा निवृत हुए। कार्यालय में भावभीनी विदाई दी गई। साफा पहनाकर शॉल ओढ़ाकर श्रीफल भेंट कर सम्मान करते हुए विदाई दी। 

हर पल होगी कमी महसूस

समारोह में जिला शिक्षा अधिकारी अनीता सागर ने श्री भारद्वाज के सेवाकाल की सराहना करते हुए कहा कि उनकी कमी कार्यालय को पल पल महसूस होगी।

संघर्ष से ही मिलता है उत्कर्ष

स्वागत सम्मान और विदाई की बेला पर श्री भारद्वाज ने कहा कि जो सत्य के पथ पर चलता है अविराम उसे संघर्ष करना ही पड़ता है और संघर्ष से ही उत्कर्ष की ओर बढ़ते हैं। संघर्ष की इस यात्रा में साथी भी मिलते रहे। कंधे से कंधा, चित्त से चित्त, मन से मन, आत्मा से आत्मा मिलाकर सहयोग करने वाले मिलते रहे। पूरी सेवा यात्रा में अनेक सुखद अनुभव हैं। मेरे दायरे में जो भी आए उन्हें उत्कृष्ट स्वाभिमान दिया। संघर्ष करने की भावना दी। प्रेम का गीत दिया। स्नेह की वृंदा दी। और यही बात कही की सत्य के पथ पर संघर्ष बहुत रहेंगे, मगर उत्कर्ष भी होगा। सभी से मिला स्नेह की मेरे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। 

सेवाकाल की हुई सराहना

समारोह में सहायक संचालक शिक्षा राहुल मंडलोई, प्राचार्य सुभाष कुमावत, जितेंद्र जोशी, दीपेंद्र सिंह ठाकुर, मुकेश ठन्ना, रितेश गर्ग, महेंद्र सिंह सोलंकी अशोक व्यास आदि ने रुंधे हुए गले से श्री भारद्वाज के सेवाकाल की सराहना की। आंखे डबडबा गई। रतन चौहान ने गीतों से अपनी भावना व्यक्त की।

इनके काम की बोलती तूती 

रतलाम के सरकारी महकमे में भारद्वाजजी का नाम काफी सम्मान के साथ लिया जाता हैं। शिक्षा विभाग में उनके काम की तूती बोलती थी। कानून में स्नातक श्री भारद्वाज शासकीय सेवा में आने के पूर्व रतलाम में पत्रकारिता में भी सक्रिय रहे। काम के मामले में माना जाता था कि उनका लिखा कोई काटता नहीं। ज्योतिषी के मामले में भी उन्हें महारथ हैं। जिला शिक्षा अधिकारी को वे कानूनी मामलों में उचित सलाह देते रहे। पूरे कार्यालय में उनका विशिष्ट स्थान रहा। बरसों तक वे जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में मान्यता कक्ष प्रभारी रहे। पर उन पर कोई आरोप नहीं लगा। जूनियर स्टॉफ को उचित मार्ग दर्शन देने के कारण वे जूनियर के बीच काफी लोकप्रिय थे। पूरे कार्यालय में हरेक को हर समय उनकी कमी महसूस होगी। श्री भारद्वाज बरसो तक लिपिकवर्गीय कर्मचारी संघ में जिलाध्यक्ष भी रहे।

यह थे मौजूद

आयोजन में उपसंचालक शिक्षा राहुल मंडलोई, जिला योजना कार्यालय के विनय उपाध्याय, लोकेश कटारिया, रणजीत सिंह राठौड़, एपीसी अशोक लोढ़ा, योजना अधिकारी जितेंद्र जोशी, महेंद्र सिंह सोलंकी, ज्योति नारायण त्रिवेदी, योगेश पाल, डीएसओ दीपेंद्र सिंह ठाकुर, एसएस देवड़ा, प्रमोद बरानिया, प्रमोद जोशी, जय श्री सोलंकी, सेल प्रभारी मुकेश ठन्ना, संदीप कुलकर्णी, सतर्कता प्रभारी रितेश गर्ग, रोहित शर्मा ल, अमित चाहर, नागेश्वर पांचाल, देवेंद्र चावंड, के सी व्यास, रमेश बारिया, रतन चौहान, वजीह अहमद रिजवी, सुरेश बिलवाल, सुरेंद्र सिंह भाटी, सत्यम ठाकुर, चिन्मय अग्रवाल, प्रफुल्ल रामावत, दीपक बैरागी, दिनेश बरेलिया, शिव शंकर मेहता, नारायण डिंडोर, नानूराम, प्रहलाद सिंह भाटी, लक्ष्मण मइड़ा, फकीर चंद्र मालवीय, पुरुषोत्तम, दुर्गेश, कांतिलाल कटारा सहित अन्य मौजूद थे। संचालन आर सी तिवारी ने किया। आभार अमित चाहर ने माना।