विचार सरोकार : प्रतिभाओं के प्रोत्साहन का मंच है ऐतिहासिक गुलाब चक्कर

ऐतिहासिक गुलाब चक्कर  जनता को समर्पित करने से शहर में साहित्य, संगीत, कला के क्षेत्र में साहित्य-संगीत का वातावरण निर्मित हुआ। साथ ही कई नए कलाकारों को मंच मिला और कई नई प्रतिभाएं भी उभर कर आई।

विचार सरोकार : प्रतिभाओं के प्रोत्साहन का मंच है ऐतिहासिक गुलाब चक्कर

प्रसंग : रतलाम स्थापना दिवस (बसंत पंचमी) 

⚫ संजय परसाई 'सरल'

रोज संध्या की लालिमा जब खिलने लगती हैं, इंद्रधनुषी छटाएं अपना रंग बिखरने लगती है, तो इसमें चार चाँद लगाने को शामिल हो जाती है सितार, तबला, ढोलक, गिटार जैसी अनगिनत साजों की मधुर धुनें। साथ ही गूंजने लगती है सुर सजी सुरीली, मीठी स्वर लहरियां। यह सब होता है रत्नपुरी के नाम से विख्यात रतलाम शहर में। शहर की ऐतिहासिक धरोहर गुलाब चक्कर में रोज शाम ढलते ही गूंजने लगती है नए-पुराने गीतों की स्वर लहरियां।


रतलाम कलेक्टर राजेश बाथम के प्रयासों से ऐतिहासिक गुलाब चक्कर  जनता को समर्पित करने से शहर में साहित्य, संगीत, कला के क्षेत्र में साहित्य-संगीत का वातावरण निर्मित हुआ। साथ ही कई नए कलाकारों को मंच मिला और कई नई प्रतिभाएं भी उभर कर आई।


विदित हो कि राजा-महाराजाओं के ज़माने में गुलाब चक्कर में रोजाना शाम को गीत-संगीत की महफिल सजा करती थी, जिसमें महाराजा, राजकुमार, रानियां, राजकुमारियां कलाकारों की हौसला आफजाई के लिए उपस्थित रहकर उनकी प्रतिभा को सुनती, समझती, आंकलन करती और प्रोत्साहित भी किया करती थी। नवश्रृंगारित गुलाब चक्कर में आजकल उन्हीं दिनों की यादें ताजा होती रहती है।      

जिला प्रशासन ने नि:शुल्क लाइट,साउण्ड, कुर्सियां आदि उपलब्ध करवा कर कलाकारों का सम्मान बढ़ाया है। वहीं रोज शाम को गूंजती गीत-संगीत की स्वर लहरियां शहर के वातावरण को भी सुरमयी कर रही है। ऐतिहासिक गुलाब चक्कर की ख्याति ने देश भर में अपनी पहचान कायम की और यही कारण है कि देश भर से संस्थाएं इस स्थल पर अपनी प्रस्तुति के लिए लालायित है। पिछले दिनों भोपाल के कलाकारों की दो-तीन बेहतरीन प्रस्तुतियां दर्शकों और श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर गई। 

कलेक्टर बाथम के जाने के बाद उनके स्थान पर पदस्थ कलेक्टर मीशा सिंह भी उसी सादगी से गुलाब चक्कर की लोकप्रियता के लिए प्रयासरत है। कलाकार और संस्थाएं अपना बेस्ट देने को सदैव प्रयासरत है लेकिन प्रशासन से चाही गई पानी और सुविधा घर जैसी व्यवस्थाओं को लेकर चिंतित भी है। यदि प्रशासन इन दोनों व्यवस्थाओं को सुचारू कर दें तो कलाकारों का हौसला भी बढ़ेगा और इस अभाव की पूर्ति होने पर श्रोताओं और दर्शकों की संख्या में इजाफा भी होगा। हम आशा करते हैं जिला प्रशासन रतलाम स्थापना दिवस के इस अवसर पर यह सौगात देकर कलाकारों और श्रोताओं की भावनाओं का सम्मान करेगी। 

संजय परसाई सरल, 118, शक्ति नगर, गली नंबर 2, रतलाम (मप्र) मोबा. 9827047920