धार भोजशाला है वाग्देवी मंदिर 

धार भोजशाला है वाग्देवी मंदिर 

हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला 

⚫ एएसआई (ASI) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण को आधार माना अदालत ने

हरमुद्दा
इंदौर, 15 मई। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार की भोजशाला को लेकर एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए इसे देवी वाग्देवी (सरस्वती) का हिंदू मंदिर घोषित किया है। अदालत ने एएसआई (ASI) के वैज्ञानिक सर्वेक्षण को आधार माना और मुस्लिम पक्ष को वहां नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाले पुराने आदेश को रद्द कर दिया। 

भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। हिंदू पक्ष के वकील के अनुसार अदालत ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। कोर्ट ने जैन समाज और मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया है। यह निर्णय भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है, जिस पर अदालत ने भरोसा जताया है। भोजशाला मामले में अदालत के फैसले ने परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी है। धार में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं।

एडवोकेट विष्णु शंकर जैन ने कही ये बात

धार-भोजशाला मामले पर अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इंदौर उच्च न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 7 अप्रैल, 2003 के एएसआई के आदेश को आंशिक रूप से रद्द कर दिया है। इसके अलावा, न्यायालय ने हिंदू पक्ष को पूजा-अर्चना का अधिकार प्रदान किया है और भोजशाला परिसर को राजा भोज की संपत्ति के रूप में मान्यता दी है। लंदन के एक संग्रहालय में रखी हमारी मूर्ति को वापस लाने की मांग के संबंध में, न्यायालय ने सरकार को इस अनुरोध पर विचार करने का निर्देश दिया है; न्यायालय ने यह भी कहा है कि मुस्लिम पक्ष भी सरकार के समक्ष अपने विचार रखने के लिए स्वतंत्र है। इसके अतिरिक्त, न्यायालय ने सरकार से मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक भूमि आवंटित करने पर विचार करने को कहा है। न्यायालय ने हमें पूजा-अर्चना करने का अधिकार प्रदान किया है और सरकार को स्थल के प्रबंधन की निगरानी करने का निर्देश दिया है। एएसआई का पिछला आदेश, जिसमें नमाज अदा करने का अधिकार दिया गया था, पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है; अब से वहां केवल हिंदू पूजा-अर्चना ही होगी। 

वैज्ञानिक प्रमाणों और एएसआई रिपोर्ट आधार

हाई कोर्ट के इस फैसले के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं। मंदिर का दर्जा: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवादित ढांचा मूल रूप से हिंदू मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र था। वैज्ञानिक प्रमाणों और एएसआई रिपोर्ट के आधार पर इसे देवी सरस्वती का स्थान माना गया। 

मुस्लिम पक्ष के लिए वैकल्पिक व्यवस्था 

अदालत ने कहा कि चूंकि यह परिसर मंदिर है, इसलिए मुस्लिम पक्ष यहां नमाज नहीं पढ़ सकता, हालांकि, मुस्लिम पक्ष अगर राज्य सरकार से आवेदन करता है तो उन्हें धार जिले में ही मस्जिद के लिए अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। 

सुप्रीम कोर्ट में देंगे चुनौती

 हम अपने खिलाफ दिए गए फैसले की समीक्षा करेंगे। हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।

वकार सादिक, शहर काजी धार 

एएसआई का नियंत्रण

पूरे परिसर का समग्र प्रशासन, प्रबंधन और संरक्षण भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के पास ही रहेगा। 

वाग्देवी की प्रतिमा लंदन संग्रहालय में

कोर्ट ने कहा कि सरकार लंदन के संग्रहालय (म्यूजियम) में रखी वाग्देवी की मूल प्रतिमा को वापस लाने के लिए प्रयास कर सकती है।