फैसला : बहन का सुहाग उजाड़ने वाले भाई को आजीवन कारावास
⚫ मामला नवंबर 2025 का
⚫ जाकर देखा तो पता चला उनके दामाद का है शव
हरमुद्दा
गुना, 28 अप्रैल। अपने बहनोई की हत्या कर बहन को विधवा करने वाले भाई को सत्र न्यायाधीश गुना अमिताभ मिश्र ने आजीवन कारावास से दण्डित किया। प्रकरण में मध्यप्रदेश राज्य की ओर से पैरवी लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने की।

लोक अभियोजक अलंकार वशिष्ठ ने हरमुद्दा को बताया कि अभियोजन के अनुसार फरियादी बाबूलाल ने 16 नवंबर 25 सुबह लगभग 10:40 बजे थाना बजरंगगढ़ में इस आशय की रिपोर्ट की कि सुबह 7 बजे उसके मोहल्ले के बच्चे चिल्लाते हुए आए कि माता मोहल्ला मरघट शाला चौपट नदी के पास वाले कुआं में एक व्यक्ति मरा हुआ पड़ा है, तब बाबूलाल और विजय अहिरवार ने वहां जाकर देखा कि उनका दामाद देवेन्द्र अहिरवार का शव कुएं में पड़ा दिखा।
गुमशुदगी की रिपोर्ट हुई थी 14 नवंबर को दर्ज
मृतक की गुमशुदगी की रिपोर्ट बाबूलाल ने 14 नवंबर 25 को थाने पर की थी। मौके पर मोहल्ले के और भी लोग आ गये थे। डायल 100 पर सूचना देने पर पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों की सहायता से मृतक के शव को कुएं से निकालकर लिखा-पढ़ी की। डॉक्टर की रिपोर्ट में मृतक की मृत्यु सिर में आई चोट के कारण हुई।
तो नहीं आ सकती वैसी चोट
डॉक्टर ने अपने बयान में बताया कि कुएं में पानी होने की स्थिति में मृतक देवेन्द्र को जिस प्रकार की चोटें आईं हैं वैसी चोटें नहीं आ सकतीं।
मारकर फेंका कुएं में
घटना का कोई चक्षुदर्शी साक्षी नहीं था और पूरा प्रकरण परिस्थितिजन्य साक्ष्य पर आधारित था। जांच में पुलिस ने पाया कि मृतक देवेन्द्र उसकी पत्नी भुरिया बाई को जो कि आरोपी विजय अहिरवार की बहन थी, परेशान करता था, इस कारण विजय पुत्र बाबूलाल अहिरवार निवासी माता मोहल्ला थाना बजरंगगढ़ ने 13 नवंबर 25 रात्रि लगभग 10 - 11 बजे उसके बहनोई की मारपीट कर सिर में गम्भीर चोट पहुंचाकर उसकी हत्या कर लाश कुएं में फेंक दी।
जांच के लिए भेजा
पुलिस ने विवेचना में घटना स्थल से बियर की 2 खाली बोतल, शराब के 2 खाली पाउच, शर्ट के बटन जब्त किये। आरोपी को गिरफ्तार किया और जब्त शुदा सामग्री को रासायनिक जांच हेतु fsl भेजा।
न्यायालय में मृतक के पिता राजाराम ने बताया कि घटना के समय भुरिया बाई एक माह से मायके में रह रही थी और देवेन्द्र 13 नवंबर 25 को मोटर साइकिल से भुरिया बाई को लेने गया था। अगले दिन जब राजाराम ने देवेन्द्र को फोन लगाया तो विजय की पत्नी ने फोन उठाया और कहा कि रात के 10 बजे से देवेन्द्र लापता है।
विजय और देवेंद्र को देखा था लड़ते हुए
साक्षियों द्वारा रात्रि के समय देवेन्द्र और विजय अहिरवार को आपस में झगड़ते हुए भी देखा गया था। बजरंगगढ़ स्थित कलारी की दुकान के सीसीटीवी कैमरे में भी मृतक देवेन्द्र और आरोपी विजय अहिरवार एक साथ देखे गए थे। अभियोजन ने सन्देह से परे ये प्रमाणित किया कि मृतक देवेन्द्र की मृत्यु शराब पीकर कुएं में गिरने से नहीं हुई थी बल्कि आरोपी विजय अहिरवार ने देवेन्द्र की हत्या कर लाश कुएं में फेंक दी थी।
सुनाई सजा
सम्पूर्ण साक्ष्य और अभियोजन तथा बचाव पक्ष के समस्त तर्कों को सुनने के पश्चात् न्यायालय ने अभियोजन की इस कहानी को सन्देह से परे प्रमाणित मानते हुए आरोपी विजय अहिरवार को उसके बहनोई की हत्या का दोषी पाते हुए भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) में आजीवन कारावास और 2 हजार रुपए के अर्थदंड तथा भारतीय न्याय संहिता की धारा 238(ख) में 2 वर्ष के सश्रम कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड से दण्डित किया।
Hemant Bhatt