श्रद्धांजलि : सात सुरों की साधिका आशा भोसले को संक्रमण ने कर दिया शांत

श्रद्धांजलि : सात सुरों की साधिका आशा भोसले को संक्रमण ने कर दिया शांत

सोमवार को होगा अंतिम संस्कार

⚫ 7 दशक तक चलाया सुरीला जादू

हरमुद्दा
रविवार, 12 अप्रैल। सात सुरों की साधिका आशा भोसले को संक्रमण ने शांत कर दिया।  92 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया है। बेटे आनंद भोसले ने खबर की पुष्टि की है। सोमवार को अंतिम संस्कार किया जाएगा।

करीब सात दशक तक सिनेमाई दुनिया में अपनी सुरीली आवाज का जादू चलाने वाली गायिका को शनिवार को तबीयत खराब होने के चलते अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज यूनिट में उपचार चल रहा था।

सीने में संक्रमण के कारण अस्पताल में कराया गया था भर्ती

शनिवार को आशा भोसले की तबीयत बिगड़ने की खबर आई थी। गायिका की तबीयत खराब होने के बाद अस्पताल के बाहर फैंस की भीड़ जमा होने लगी। साथ ही आशा भोसले के आवास के बाहर भी लोग एकत्र होने लगे। सभी को आस थी कि गायिका स्वस्थ होकर लौटेंगी, मगर फैंस की यह उम्मीद टूट गई।

मराठी फिल्म से गायन की शुरुआत

8 सितंबर 1933 को आशा भोसले का जन्म एक संगीत से जुड़े परिवार में हुआ था। उनके पिता पंडित दीनानाथ मंगेशकर एक एक्टर और क्लासिकल सिंगर थे। आशा भोसले स्वर कोकिला लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। आशा भोसले जब नौ साल की थीं, तभी उनके पिता का निधन हो गया था। इसके बाद उनकी फैमिली पुणे से कोल्हापुर और बाद में मुंबई आ गई। बड़ी बहन लता मंगेशकर के पद्चिह्नों पर चलते हुए वह भी संगीत की दुनिया में आईं। आशा भोसले ने पहला गीत मराठी फिल्म 'माझा बाल' (1943) में ‘चला चला नाव वाला’ गाया था। जबकि बॉलीवुड में उनका पहला गाना ‘चुनरिया (1948)’ फिल्म में ‘सावन आया’ था। यहां से शुरू हुआ संगीत और गीतों का सफर पांच दशक से ज्यादा समय तक चला और आशा भोसले देखते-देखते भारतीय संगीत की दिग्गजों में शामिल हो गईं।

सोमवार को होगा अंतिम संस्कार

आशा भोसले का अंतिम संस्कार सोमवार को होगा।  गायिका का पार्थिव शरीर सुबह 11 बजे लोअर परेल में उनके घर पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।  शाम 4 बजे दादर के शिवाजी पार्क में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। यही वही जगह है, जहां उनकी बहन लता मंगेशकर का भी अंतिम संस्कार हुआ था।