सामाजिक सरोकार : धर्मगुरुओं के सहयोग से बाल विवाह रोकने में मिल रही मदद

सामाजिक सरोकार : धर्मगुरुओं के सहयोग से बाल विवाह रोकने में मिल रही मदद

⚫ बाल विवाह मुक्त भारत (चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया) अभियान

⚫ वसुधा विकास संस्थान ने कहा जारी रहेगा जन जागरण

हरमुद्दा
रतलाम, 30 अप्रैल। बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश में नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) के रतलाम जिले में सहयोगी संगठन वसुधा विकास संस्थान की ओर से अक्षय तृतीया और शादी के सीजन को देखते हुए बाल विवाहों की रोकथाम के लिए विभिन्न धर्मों के विवाह संपन्न कराने वाले पुरोहितों के बीच चलाए जा रहे जागरूकता अभियान को व्यापक सफलता मिली है।

वसुधा विकास संस्थान के परियोजना समन्वयक भास्कर देव परिहार ने हरमुद्दा को बताया कि सभी धर्मगुरुओं ने इसकी सराहना करते हुए समर्थन का हाथ बढ़ाया है। संगठन ने कहा कि यह देखते हुए कि कोई भी बाल विवाह किसी पंडित मौलवी या पादरी जैसे पुरोहित के बिना संपन्न नहीं हो सकता है। हमने उन्हें बाल विवाह के खिलाफ अभियान से जोड़ने ने की पहल की। 

वसुधा विकास संस्थान के परियोजना समन्वयक परिहार ने बताया कि इसके सकारात्मक नतीजों को देखते हुए हम उम्मीद कर सकते हैं इस अक्षय तृतीया पर जिले में एक भी बाल विवाह नहीं होने पाएगा। जेआरसी 2030 तक देश से बाल विवाह खत्म करने के मकसद से चाइल्ड मैरिज फ्री इंडिया अभियान चला रहा है।  जेआरसी कानूनी हस्तक्षेपों के जरिए बाल अधिकारों की सुरक्षा व संरक्षण के लिए देश के 416 जिलों में जमीन पर काम कर 250 से भी ज्यादा नागरिक संगठनों का नेटवर्क है। इसने पिछले वर्षों में दो लाख से ज्यादा बाल विवाह रुकवाए हैं और पांच करोड़ से ज्यादा लोगों को बाल विवाह के खिलाफ शपथ दिलाई है। इसके सहयोगी संगठन वसुधा विकास संस्थान ने स्थानीय प्रशासन के साथ सहयोग व समन्वय से कानूनी हस्तक्षेपों और परिवारों एवं समुदायों को समझा-बुझा बाल विवाह रुकवाए हैं। यह संगठन 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जेआरसी के संस्थापक भुवन ऋभु की किताब  चिल्ड्रेन हैव चिल्ड्रेन टिपिंग प्वाइंट टू इंड चाइल्ड मैरेज में सुझाई गई समग्र रणनीति पर अमल कर रहा है।

जरूरी जागरूकता की कमी देश में

श्री परिहार ने बताया कि अभी भी देश में बाल विवाह के खिलाफ जरूरी जागरूकता की कमी है। ज्यादातर लोगों को यह पता नहीं है कि यह बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के तहत दंडनीय अपराध है। इसमें किसी भी रूप में शामिल होने या सेवाएं देने पर दो साल की सजा व जुर्माना या दोनों हो सकता है। इसमें बराती और लड़की के पक्ष के लोगों के अलावा कैटरर साज-सज्जा करने वाले डेकोरेटर, हलवाई, माली, बैंड बाजा वाले, मैरेज हाल के मालिक और यहां तक कि विवाह संपन्न कराने वाले पंडित और मौलवी को भी अपराध में संलिप्त माना जाएगा। उन्हें सजा व जुर्माना हो सकता है।

धर्मगुरुओं और पुरोहित वर्ग के बीच जागरूकता अभियान चलाने का फैसला

उन्होंने कहा कि इसीलिए हमने धर्मगुरुओं और पुरोहित वर्ग के बीच जागरूकता अभियान चलाने का फैसला किया क्योंकि यह वो सबसे महत्वपूर्ण वर्ग है, जो विवाह संपन्न कराता है। हमने उन्हें समझाया कि बाल विवाह और कुछ नहीं बल्कि बच्चों पर असमय बोझ डालना है। अठारह वर्ष से काम उम्र की किसी बच्ची से वैवाहिक संबंधों में भी यौन संबंध बनाना यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण पॉक्सो कानून के तहत अपराध है। बेहद खुशी का विषय है कि आज पंडित और मौलवी इस बात को समझते हुए न सिर्फ इस अभियान को समर्थन दे रहे हैं, बल्कि खुद आगे बढ़कर बाल विवाह नहीं होने देने की शपथ ले रहे हैं।