साहित्य सरोकार : रचनाकार की बेचैनी उसे लिखने के लिए करती है प्रेरित

साहित्य सरोकार : रचनाकार की बेचैनी उसे लिखने के लिए करती है प्रेरित

प्रो. रतन चौहान ने कहा

⚫ जनवादी लेखक संघ का आयोजन

हरमुद्दा
रतलाम, 12 अप्रैल। रचनाकार के भीतर एक बेचैनी होती है जो उसे लिखने के लिए प्रेरित करती है। प्रत्येक रचनाकार अपनी परिस्थितियों और परिवेश से बहुत कुछ सीखता है और उसके अनुरूप हर वक़्त कुछ नया रचने की कोशिश करता है । स्व.मदन वर्मा ने भी अपने भीतर के उस रचनाकार को कभी मरने नहीं दिया और सदैव नया से नया रचते रहे। उनकी लिखी हुई रचनाएं आज भी प्रासंगिक है। इसका कारण यही है कि वे सदैव जन सरोकारों से जुड़कर रहे और उन्होंने समाज को सकारात्मक संदेश देने का प्रयास किया।


यह विचार जनवादी लेखक संघ द्वारा आयोजित श्रंखला 'एक रचनाकार का रचना संसार' की 12वीं कड़ी में दिवंगत रचनाकार मदन वर्मा पर केंद्रित आयोजन में वरिष्ठ कवि एवं अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि किसी भी रचनाकार के लिए यह आवश्यक होता है कि वह निरंतर सृजनरत रहे । मदन वर्मा ने अपने जीवन में यह निरंतर जारी रखी और वे बहुत कुछ करना चाहते थे । उन्होंने कई क्षेत्रों में बेहतर कार्य किया भी।

असीम ऊर्जा थी उनमें

वरिष्ठ रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र ने मदन वर्मा के जीवन से जुड़े प्रसंग सुनाते हुए कहा कि उनमें असीम ऊर्जा थी । वे निरंतर गीत लिखते भी रहे, उसका संगीत भी तैयार करते रहे और उन गीतों को विद्यार्थियों के बीच में पहुंचाते भी रहे।

उम्मीद जगाने की होती प्रेरणा

वरिष्ठ रंगकर्मी कैलाश व्यास ने कहा कि रचनाकार के भीतर एक नई उम्मीद जगाने की प्रेरणा होती है । वह सदैव अपने मन के भीतर के युवा स्वर को एक खुला आकाश प्रदान करना चाहता है। उन्होंने इस संदर्भ में प्रो. रतन चौहान की कविता की व्याख्या करते हुए उन्हें वर्तमान संदर्भों से जोड़ा।

मिलन सारिता के साथ करते थे वे कार्य

जनवादी लेखक संघ के अध्यक्ष युसूफ जावेदी ने कहा कि मदन वर्मा में हास्यबोध भी था । वे अपने साथी रचनाकारों के साथ बहुत मिलन सारिता के साथ कार्य करते थे।

इन्होंने पढ़ीं रचनाएं

आयोजन में स्व.मदन वर्मा की रचनाओं का पाठ किया गया। रणजीत सिंह राठौर, नानू डामोर, मांगीलाल नगावत, कीर्ति कुमार शर्मा , डॉ.एन. के .शाह, डॉ. पूर्णिमा शर्मा, आई.एल. पुरोहित, रचना चंद्रावत, हीरालाल खराड़ी, आशा श्रीवास्तव, पद्माकर पागे, पूजा चोपड़ा, लक्ष्मण पाठक, मुकेश सोनी, जवेरीलाल गोयल, योगिता राजपुरोहित, गीता राठौर, श्याम सुंदर भाटी, कला डामोर ने रचनाएं पढ़ी। संचालन आशीष दशोत्तर ने किया। आभार जनवादी लेखक संघ सचिव रणजीत सिंह राठौर ने व्यक्त किया।

महिला संगोष्ठी 26 अप्रैल को

जनवादी लेखक संघ द्वारा 26 अप्रैल रविवार को प्रातः 11 बजे भगत सिंह पुस्तकालय , शहर सराय , रतलाम पर महिला संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा।  इसी तरह 'एक रचनाकार का रचना संसार' श्रृंखला की 13वीं कड़ी में 10 मई को दिवंगत कवि ललिता शंकर सुरोलिया की रचनाओं का पाठ एवं चर्चा होगी । जनवादी लेखक संघ ने सुधिजनों से उपस्थिति का आग्रह किया है।