धर्म संस्कृति : चेतन्य काश्यप जैसे गुरूभक्त मिल जाए, तो हो सकते है अनेक अच्छे काम 

धर्म संस्कृति : चेतन्य काश्यप जैसे गुरूभक्त मिल जाए, तो हो सकते है अनेक अच्छे काम 

श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी ने कहा 

⚫ गच्छाधिपति श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वरजी का पदार्पण

कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप के निवास पर हुई गहुली

हरमुद्दा
रतलाम, 21 मई। पुण्य सम्राट श्रीमद विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी मसा के शिष्य वर्तमान गच्छाधिपति, आचार्यदेवेश श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी म.सा. आदि ठाणा का गुरुवार सुबह कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप के निवास पर पदार्पण हुआ। इससे पहले दिलबहार चौराहा से चल समारोह निकाला गया। इसमें मंत्री चेतन्य काश्यप, महापौर प्रहलाद पटेल, भाजपा जिलाध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय, आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, उपाध्यक्ष गोविंद काकानी एवं प्रवीण सोनी सहित गणमान्यजन एवं समाजजन शामिल हुए।


श्री सौधर्म वृहत्तपोगच्छीय राजेन्द्रसूरी त्रिस्तुतिक जैन श्री संघ संरक्षक चेतन्य काश्यप ने परिवार सहित गच्छाधिपति के पदार्पण पश्चात गहुली कर आशीर्वाद लिया। उपस्थित गुरूभक्तों को संबोधित करते हुए श्री काश्यप ने कहा कि गुरू का आशीर्वाद उनके परिवार का सौभाग्य है। पुण्य सम्राट श्रीमद विजय जयन्तसेन सूरीश्वरजी म.सा. ने रतलाम में अंतिम चातुर्मास किया था। उनके बाद प्रथम शिष्य गच्छाधिपति, आचार्यदेवेश श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी म.सा. के माध्यम से सर्व समाज को उनकी कृपा दृष्टि प्राप्त हो रही है। गच्छाधिपति का 22 मई को सुबह लोकेन्द्र टाकीज क्षेत्र से नगर में मंगल प्रवेश होगा और मोहन टाकीज में धर्मसभा के बाद वे नीमवाला उपाश्रय में प्रवास करेंगे। इसके बाद 23 मई को वे जयंतसेन धाम जाएंगे और फिर इंदौर चातुर्मास के लिए विहार करेंगे। श्री काश्यप ने गुरूदेव को कांबली भी ओढाई।


गच्छाधिपति, आचार्यदेवेश श्रीमद विजय नित्यसेन सूरीश्वर जी मसा ने आशीर्वचन में कहा कि पुण्य सम्राट गुरूदेव का रतलाम चातुर्मास ऐतिहासिक था। पुण्य सम्राट स्वयं भी ये कहते थे और दीक्षा पश्चात उन्होंने भी रतलाम जैसा चातुर्मास नहीं देखा। गुरू के प्रति समर्पण के भाव के कारण ही ऐसा संभव हुआ। धन-वैभव मिलना और मिलने के बाद उसका सदुपयोग करना महानता का काम होता है। चेतन्य काश्यप परिवार ऐसे कार्य निरंतर करता आ रहा है, जो अनुमोदनीय है। ऐसे गुरू भक्त मिल जाए, तो अनेक अच्छे काम हो सकते है।

बह रही है श्रद्धा, विश्वास और आस्था की गंगोत्री

इससे पूर्व मुनिश्री विद्वरत्न विजय जी म.सा. ने कहा कि काश्यप परिवार आरंभ से परम भक्त और परम सुश्रावक होकर श्रद्धा, आस्था और विश्वास की गंगोत्री बहा रहा है। रतलाम में पुण्य सम्राट का वर्ष 2016  में ऐतिहासिक चातुर्मास करने से पूर्व मोहनखेडा में विक्रम संवत 2016 में स्व सेठ कन्हैयालाल काश्यप ने गुरूदेव श्रीमद विजय यतिन्द्रसेन सूरीश्वरजी की आज्ञा से हाल निर्मित कराया था। गुरू आज्ञा ही इस परिवार का धर्म है और चेतन्य काश्यप ने राजनीति में भी धर्मनीति का समावेश किया है। धर्मनीति जहां होती है, वहां सफलता मिलना निश्चित है।
कार्यक्रम के आरंभ में मंगलाचरण हुआ। समापन पर गुरूदेव ने महामांगलिक श्रवण कराई। कार्यक्रम का संचालन राजकमल दुग्गड़ द्वारा किया गया।

इस दौरान त्रिस्तुतिक जैन श्रीसंघ अध्यक्ष सुशील छाजेड़, ट्रस्टीगण, विभिन्न श्रीसंघों के अध्यक्ष अशोक चौटाला, विनोद मेहता, अशोक चौपड़ा, प्रकाश दरड़ा, हिम्मत गेलड़ा, अजय खिमेसरा, रजनीकांत झामर, मांगीलाल जैन, मंगल अग्रवाल, गौरव अजमेरा और भाजपा के प्रदेश, जिला, मंडल पदाधिकारी एवं मंडल अध्यक्षगण तथा आरडीए पदाधिकारी आदि उपस्थित रहे।