धर्म संस्कृति : नव संवत्सर "रौद्र" की शुरुआत 19 मार्च से, राष्ट्रीय हितों में रहेगी व्याकुलता
⚫ शीतला सप्तमी पूजन 10 मार्च को
⚫ दशा माता उत्सव 13 मार्च को
हरमुद्दा
रतलाम, 9 मार्च। चैत्र नवरात्रि और नव संवत्सर 2083 की शुरुआत 19 मार्च से होगी। नव वर्ष को शास्त्रों में 'रौद्र संवत्सर' का नाम दिया गया है। सीमा सुरक्षा एवं राष्ट्रीय हितों के कारण राजाओं में परस्पर क्षोभ और व्याकुलता रहेगी।

ज्योतिर्विद पंडित दुर्गा शंकर ओझा ने बताया होली के पश्चात मनाई जा रहे उत्सव की श्रृंखला में 10 मार्च को जहां शीतला सप्तमी उत्सव मनाया जाएगा वहीं 13 मार्च को दशामाता व्रत महिलाओं द्वारा किया जाएगा। एकम तिथि क्षय होने के कारण 19 मार्च गुरुवार अमावस्या से ही नव वर्ष की शुरुआत होगी। इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि भी प्रारंभ होगी।

कौन संभालेगा इस साल की कमान?
हिंदू पंचांग में हर साल ग्रहों की एक 'कैबिनेट' बनती है। साल की शुरुआत जिस दिन से होती है, उस दिन का स्वामी उस वर्ष का 'राजा' कहलाता है। चूंकि, 2026 में नववर्ष गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस साल के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे। मंत्री का पद मंगल ग्रह के पास होगा। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, राजा गुरु होने से धार्मिक कार्यों और ज्ञान में वृद्धि होगी। लेकिन, मंत्री मंगल होने के कारण समाज में थोड़ा उग्र स्वभाव और साहसी निर्णय भी देखने को मिल सकते हैं।
कैसा रहेगा 'रौद्र' संवत्सर का प्रभाव?
नए संवत्सर का नाम 'रौद्र' है, जो उग्रता का संकेत देता है। शास्त्रों के अनुसार, रौद्र संवत्सर में वर्षा की स्थिति सामान्य से कम रह सकती है, जिसका सीधा असर कृषि और फसलों पर पड़ने की संभावना है। साथ ही, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र और मीन लग्न में साल की शुरुआत होने से प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक उतार-चढ़ाव की स्थितियां भी बन सकती हैं। सीमा सुरक्षा एवं राष्ट्रीय हितों के कारण राजनेताओं में परस्पर जब और व्याकुलता रहेगी।
शुरू होगी चैत्र नवरात्रि
19 मार्च की चैत्र नवरात्रि शुरू होगी। शक्ति की आराधना कर नई ऊर्जा का जमा करते हैं। ठंड की विदाई और गर्मी की दस्तक के बीच, यह नववर्ष हमें सात्विक जीवन शैली अपनाने की सीख देता है। 26 मार्च को दुर्गा अष्टमी का पूजन होगा वहीं 27 मार्च को श्री रामनवमी महोत्सव मनाया जाएगा।
Hemant Bhatt