ममता और चिकित्सा का अद्भुत संगम: 14 दिनों की देखभाल के बाद नवजात 'देवी' को मिला नया आश्रय
⚫ रेलवे बोगी से SNCU तक जीवन बचाने की जंग
⚫ भावुक विदाई जब भर आईं डॉक्टरों और स्टाफ की आँखें
⚫ ड्यूटी खत्म होने के बाद भी रुके डॉक्टर
हरमुद्दा
रतलाम, 22 जुलाई। चिकित्सा सेवा जब मानवीय संवेदनाओं और निःस्वार्थ प्रेम से मिलती है, तो वह केवल उपचार नहीं बल्कि जीवनदान बन जाती है। ऐसा ही एक भावुक और प्रेरणादायक दृश्य रतलाम के जिला चिकित्सालय में देखने को मिला, जहाँ रेलवे बोगी में मिली एक लावारिस नवजात बालिका 'देवी' को 14 दिनों की गहन देखभाल के बाद सकुशल सेवा भारती मातृछाया शिशुगृह सौंप दिया गया।

रेलवे बोगी से SNCU तक जीवन बचाने की जंग
गत 4 जुलाई को GRP स्टाफ को रेलवे की एक बोगी में अज्ञात अवस्था में एक नवजात बालिका मिली थी। बालिका की नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत जिला चिकित्सालय के SNCU (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती कराया गया, जहाँ उसका नाम अस्थायी रूप से 'देवी' रखा गया।
आ गई संतोष जनक स्थिति में
सिविल सर्जन डॉ. ए.पी. सिंह के मार्गदर्शन में SNCU के प्रभारी डॉ. प्रतीक आर्य एवं विशेषज्ञ नर्सिंग स्टाफ ने बालिका का उपचार शुरू किया। 14 दिनों तक डॉक्टरों और नर्सों की चौबीसों घंटे की सतत निगरानी, समर्पित चिकित्सा और मां जैसी ममता का ही परिणाम रहा कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ और संतोषजनक स्थिति में आ गई।
भावुक विदाई जब भर आईं डॉक्टरों और स्टाफ की आँखें
20 जुलाई को बच्ची को सेवा भारती मातृछाया शिशुगृह में प्रवेश के लिए सामाजिक कार्यकर्ता अर्पित गुप्ता एवं शीतल सोलंकी (यशोदा) को विधिवत सुपुर्द किया गया।विदाई का यह पल अत्यंत भावुक कर देने वाला था
ड्यूटी खत्म होने के बाद भी रुके डॉक्टर
SNCU प्रभारी डॉ. प्रतीक आर्य अपनी ड्यूटी समाप्त होने के बावजूद केवल 'देवी' को विदा करने के लिए रुके रहे और देर तक उसे गोद में लेकर दुलारते रहे।
अपनत्व भरा माहौल
वार्ड की प्रत्येक नर्स और कर्मचारी बच्ची को अपनी गोद में लेकर स्नेह लुटाते नजर आए।
खुद छोड़ने गए समाजसेवी
रोगी कल्याण समिति के सदस्य और समाजसेवी गोविंद काकानी भी इस पल भावुक हो उठे और स्वयं नवजात को मातृछाया शिशुगृह तक छोड़ने गए।
जनप्रतिनिधियों का भी मिला संबल
उल्लेखनीय है कि पूर्व में सांसद अनीता नागर सिंह चौहान ने भी SNCU पहुँचकर नवजात 'देवी' के स्वास्थ्य का हाल जाना था और डॉक्टरों को बच्ची की समुचित देखभाल के निर्देश दिए थे। बच्ची के पूरी तरह स्वस्थ होकर मातृछाया भेजे जाने की सूचना पर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की।
गर्व और भावुकता दोनों का क्षण
"यह केवल चिकित्सकीय सफलता नहीं है, बल्कि हमारी पूरी टीम की ममता, अपनत्व और मानवीय संवेदनाओं का उदाहरण है। 'देवी' का स्वस्थ होकर नए आश्रय में जाना हमारे लिए गर्व और भावुकता दोनों का क्षण है।"
⚫ डॉ. ए.पी. सिंह, सिविल सर्जन, रतलाम
मानवता की एक अनूठी मिसाल
SNCU रतलाम की टीम ने यह साबित कर दिया कि अस्पताल केवल बीमारियों का इलाज करने की जगह नहीं, बल्कि जहाँ अपनापन हो वहाँ हर जीवन मुस्कुरा उठता है। स्वस्थ होकर अपने नए घर 'मातृछाया' की ओर कदम बढ़ाने वाली नन्हीं 'देवी' आज हर किसी की प्रार्थनाओं और शुभकामनाओं का केंद्र बनी हुई है।
Hemant Bhatt