जिला जेल में सनसनीखेज वारदात: हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में विचाराधीन कैदी ने जेल प्रहरी को मारी गोली
जिला जेल में सनसनीखेज वारदात: हाई-सिक्योरिटी ज़ोन में विचाराधीन कैदी ने जेल प्रहरी को मारी गोली
⚫ प्रहरी की हालत गंभीर
⚫ आरोपी कैदी पर पहले से है कई मामले दर्ज
⚫ लाख टके का सवाल जेल में कट्टा आया कैसे
⚫ परिजन का रो-रो कर बुरा हाल
⚫ सुरक्षा तंत्र ध्वस्त
हरमुद्दा
रायसेन, 2 सितंबर। मध्य प्रदेश की रायसेन जिला जेल के भीतर बुधवार सुबह एक दुस्साहसिक वारदात ने राज्य के जेल प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोल कर रख दी। धारा 307 (हत्या के प्रयास) के मामले में जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी ने ड्यूटी पर तैनात जेल प्रहरी को गोली मार दी। अचानक हुई इस फायरिंग से अति-सुरक्षित माने जाने वाले जेल परिसर में भगदड़ और अफरा-तफरी मच गई। गोली लगने से गंभीर रूप से घायल प्रहरी की नाजुक हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें तत्काल भोपाल रेफर किया गया है।

घायल प्रहरी तोमर
साजिश और लापरवाही: कैसे घटी घटना?
जानकारी के मुताबिक, आरोपी कैदी नीलेश निर्वेदी (निवासी दिमाड़ा, बरेली) ने सोची-समझी रणनीति के तहत इस वारदात को अंजाम दिया। जेल में स्कूली बच्चों के एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन होना था। इसी दौरान फलों की टोकरी उठाने के बहाने आरोपी जेल के मुख्य गेट के पास तक पहुंच गया और मौका मिलते ही प्रहरी दिग्विजय सिंह तोमर पर फायर कर दिया।

अस्पताल में परिजन रोते हुए
तत्काल प्रहरी को अस्पताल ले जाया गया, जहां पर स्थिति गंभीर होने से भोपाल रेफर किया गया है हादसे के बाद परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
सुरक्षा पर उठते 5 तीखे सवाल
⚫ कट्टा भीतर कैसे पहुंचा?
⚫ चारदीवारी और बहुस्तरीय चेकिंग के बावजूद एक संगीन अपराध का आरोपी बंदूक तक कैसे पहुंचा?
⚫ तलाशी में घोर लापरवाही: क्या मुख्य द्वार और बैरकों की नियमित तलाशी केवल कागजों पर हो रही थी?
⚫ अंदरूनी मिलीभगत की आशंका: क्या जेल के ही किसी कर्मचारी या बाहरी संपर्क के जरिए हथियार भीतर पहुंचाया गया?
⚫ कार्यक्रम के दौरान चूक: जब परिसर में स्कूली बच्चों का कार्यक्रम था, तब विचाराधीन कैदी को मुख्य द्वार के पास जाने की छूट किसने और क्यों दी?
⚫ निगरानी और सीसीटीवी का क्या? जेल की आंतरिक सुरक्षा और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस इस बड़ी साजिश को भांपने में नाकाम क्यों रहा?
सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की दरकार
जेल केवल अपराधियों को बंद रखने का स्थान नहीं, बल्कि एक नियंत्रित सुरक्षा क्षेत्र होता है। यदि जेल के भीतर ही तैनात रक्षक सुरक्षित नहीं हैं, तो यह सीधे तौर पर प्रशासनिक तंत्र के फेलियर को दर्शाता है। इस मामले में केवल निचले कर्मचारियों पर गाज गिराने के बजाय पूरे सुरक्षा प्रोटोकॉल की फॉरेंसिक और उच्चस्तरीय जांच जरूरी है, ताकि साजिश के हर पहलू और पर्दे के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
Hemant Bhatt